1बिहार की राजनीति इस वक्त एक बेहद संवेदनशील और बड़े मोड़ पर खड़ी है। हाल ही में हुए बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के नतीजों और चुनावी रण में जन सुराज के आक्रामक उभार ने राष्ट्रीय जनता दल के भीतर खतरे की घंटी बजा दी है। पिछले कुछ दिनों से सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो चुकी है, जहां एक तरफ तेजस्वी यादव अपनी पार्टी को नए सिरे से खड़ा करने की जद्दोजहद में जुटे हैं, तो वहीं भारतीय जनता पार्टी लगातार यह दावा कर रही है कि राजद के भीतर एक बहुत बड़ी बगावत होने जा रही है जो पार्टी को पूरी तरह खत्म कर देगी।

बीजेपी का दावा और बगावत की सुगबुगाहट

भारतीय जनता पार्टी इस समय राजद पर चौतरफा मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। बीजेपी नेताओं का साफ कहना है कि राजद के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है और पार्टी के करीब पंद्रह से सोलह विधायक उनके निरंतर संपर्क में बने हुए हैं जो किसी भी वक्त पाला बदल सकते हैं। बीजेपी के बड़े नेताओं का आरोप है कि तेजस्वी यादव के तानाशाही रवैये और उनके खास सलाहकारों की मनमानी से तंग आकर पार्टी के जमीनी कार्यकर्ता और विधायक अपना भविष्य अंधकार में देख रहे हैं। हाल ही में राजद के कुछ पुराने चेहरों के इस्तीफे और बागी सुरों को आधार बनाकर बीजेपी यह दावा कर रही है कि लालू प्रसाद यादव की बनाई यह विरासत अब अपनी आखिरी सांसें गिन रही है और बिहार की जनता का इस परिवारवादी राजनीति से पूरी तरह मोहभंग हो चुका है।

हार के बाद तेजस्वी की बड़ी संगठनात्मक सर्जरी

इस पूरे सियासी संकट और बांकीपुर उपचुनाव में राजद उम्मीदवार की जमानत जब्त होने जैसी करारी शिकस्त को तेजस्वी यादव ने बेहद गंभीरता से लिया है। अंदरूनी कलह और गुटबाजी को जड़ से खत्म करने के इरादे से तेजस्वी यादव ने एक बेहद कड़ा और अप्रत्याशित कदम उठाते हुए राजद की बिहार इकाई के सभी प्रकोष्ठों, जिला, प्रखंड और पंचायत स्तर की तमाम कमेटियों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। राजद नेतृत्व का मानना है कि संगठन में लंबे समय से निष्क्रिय पड़े और सिर्फ मलाई काटने वाले नेताओं को बाहर का रास्ता दिखाना अब जरूरी हो गया था। इस अभूतपूर्व फैसले के जरिए तेजस्वी यादव 2029-30 के बड़े चुनावों को ध्यान में रखते हुए पूरी तरह से एक नई, युवा, समर्पित और आक्रामक टीम तैयार करना चाहते हैं ताकि विरोधियों को कड़ा जवाब दिया जा सके।

तेजस्वी के सामने भीतर और बाहर की दोहरी चुनौती

वर्तमान समय में तेजस्वी यादव अपने राजनीतिक जीवन की सबसे कठिन अग्निपरीक्षा से गुजर रहे हैं क्योंकि उन्हें एक साथ दो अलग-अलग मोर्चों पर जंग लड़नी पड़ रही है। एक तरफ जहां पार्टी के पुराने और वफादार नेता दबी जुबान में तेजस्वी के करीबी सलाहकारों के 'दिल्ली दरबार' पर मनमानी करने और जमीनी नेताओं की अनदेखी करने का गंभीर आरोप लगा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बाहरी मोर्चे पर चुनौती और विकट हो चुकी है। प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज ने राजद के पारंपरिक एम-वाई यानी मुस्लिम-यादव समीकरण और राज्य के बेरोजगार युवाओं के बीच बहुत गहरी सेंधमारी कर दी है। अब तेजस्वी यादव के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे एक तरफ बीजेपी की मजबूत राष्ट्रवाद और हिंदुत्व की राजनीति का सामना कैसे करें, और दूसरी तरफ प्रशांत किशोर की सूक्ष्म रणनीतिक घेराबंदी से अपनी बची हुई जमीन को कैसे बचाएं।