
Source: Abp
पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की बेटी और पूर्व कांग्रेस नेता शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कांग्रेस की पॉलिटिकल स्ट्रैटेजी, ऑर्गेनाइजेशनल सिचुएशन और राहुल गांधी की लीडरशिप पर खुलकर अपने विचार रखे हैं। IANS को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस 2029 के लोकसभा चुनाव में अपने दम पर सरकार बनाने का सपना देखती है, तो उसे गठबंधन की पॉलिटिक्स से आगे बढ़कर जमीनी लेवल पर अपने ऑर्गेनाइजेशन को मजबूत करना होगा। उन्होंने राहुल गांधी के काम करने के तरीके पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि पॉलिटिक्स सिर्फ चुनाव कैंपेन तक सीमित नहीं है; इसके लिए पूरे साल जनता और वर्कर्स के बीच एक्टिव रहने की जरूरत होती है।
'भारत जोड़ो यात्रा' का असर दिखा, लेकिन उस गति को कायम नहीं रखा
शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा कि वह 2029 के चुनाव के बारे में कोई पॉलिटिकल भविष्यवाणी नहीं करना चाहतीं, लेकिन राहुल गांधी की 'भारत जोड़ो यात्रा' ने 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की 99 सीटों में अहम भूमिका निभाई। उनके मुताबिक, यात्रा से कांग्रेस पार्टी के लिए पॉजिटिव माहौल बना और पार्टी की परफॉर्मेंस बेहतर हुई। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि किसी बड़े कैंपेन के बाद वैसी ही एनर्जी और पब्लिक आउटरीच बनाए रखना ज़रूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी कुछ बड़े इवेंट्स और रैलियों के बाद ज़्यादा देर तक एक्टिव नहीं दिखते, जबकि पॉलिटिक्स में पब्लिक और ऑर्गनाइजेशन के साथ लगातार मौजूद रहना ज़रूरी है।
'सिर्फ गठबंधन के भरोसे नहीं, संगठन मजबूत करना होगा'
कांग्रेस की इलेक्शन स्ट्रैटेजी पर सवाल उठाते हुए शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा कि किसी भी नेशनल पार्टी की असली ताकत उसके मज़बूत ऑर्गनाइजेशन में होती है। उन्होंने बताया कि कांग्रेस पार्टी में काम करने के अपने एक्सपीरियंस के आधार पर, उनका मानना है कि पार्टी का मेन फोकस अलायंस के ज़रिए पावर हासिल करना है। उनके मुताबिक, कांग्रेस पार्टी को बूथ लेवल से लेकर डिस्ट्रिक्ट और स्टेट लेवल तक अपने ऑर्गनाइजेशन को मज़बूत करना चाहिए ताकि वह अपने दम पर इलेक्शन लड़ सके। उन्होंने कहा कि सिर्फ़ दूसरी पार्टियों के सपोर्ट से सरकार बनाने का आइडिया सही नहीं है, और कांग्रेस लीडरशिप में अभी अकेले सरकार बनाने का उतना जोश नहीं है, जितना एक नेशनल पार्टी में होना चाहिए।
पीएम मोदी और राहुल गांधी की तुलना पर क्या बोलीं शर्मिष्ठा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी की तुलना के बारे में शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा कि दोनों नेताओं की तुलना करना सही नहीं होगा। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी 2014 से कांग्रेस पार्टी का मुख्य चेहरा रहे हैं, लेकिन उनके नेतृत्व में पार्टी को कुछ राज्यों को छोड़कर, राष्ट्रीय स्तर पर लगातार चुनावी हार का सामना करना पड़ा है। इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार चुनावी जनादेश जीतकर अपनी लोकप्रियता साबित की है। शर्मिष्ठा ने कहा कि राहुल गांधी अब तक अपने और कांग्रेस के लिए ऐसा जनादेश हासिल करने में नाकाम रहे हैं, इसलिए दोनों नेताओं की तुलना करना सही नहीं होगा। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि ये उनके निजी राजनीतिक विचार हैं। उनके बयानों पर कांग्रेस पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है।
