भारत में बोर्ड परीक्षाओं की विश्वसनीयता हमेशा चर्चा का विषय रही है, लेकिन इस बार मामला और गंभीर हो गया है। CBSE की नई ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली जिसे एक आधुनिक और पारदर्शी कदम माना जा रहा था।अब उसी पर सवाल उठ रहे हैं। वजह है सोशल मीडिया पर वायरल हुई कई स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाएँ, जिन्हें देखने के बाद छात्रों और अभिभावकों ने यह चिंता जताई है कि क्या कॉपियां सही तरीके से स्कैन हुईं या नहीं। इस विवाद ने देशभर में परीक्षा मूल्यांकन की पारदर्शिता और डिजिटल स्कैनिंग की गुणवत्ता पर नई बहस छेड़ दी है।


CBSE की कक्षा 12 की परीक्षाओं के परिणाम जारी होने के बाद कई छात्रों की ऑन-स्क्रीन स्कैन की गई कॉपियों की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगे। इन पोस्ट में कई कॉपियां धुंधली, कम प्रकाश वाली या आंशिक रूप से स्पष्ट दिख रही थीं। छात्रों का आरोप है कि कम गुणवत्ता वाली स्कैनिंग की वजह से उनके कई उत्तर ठीक से दिखाई नहीं दिए होंगे और इससे मार्किंग प्रभावित हुई होगी। कई छात्रों ने कहा कि पेंसिल में लिखे अंश, डायग्राम और चार्ट स्कैन में लगभग गायब दिखे, जिससे यह आशंका बढ़ी कि एग्ज़ामिनर वास्तविक उत्तर नहीं देख पाए।


विवाद बढ़ने पर CBSE ने इस पूरे मामले पर सफाई जारी की। बोर्ड का कहना है कि स्कैनिंग और मूल्यांकन की पूरी प्रक्रिया निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार की गई है और यह दावा कि कॉपियां गलत तरीके से स्कैन हुईं तथ्यात्मक रूप से गलत और भ्रामक है। बोर्ड ने बताया कि हर स्कैन पर क्वालिटी चेक की एक अनिवार्य प्रक्रिया होती है, जिसे इस साल भी पूरी तरह से लागू किया गया। CBSE के अनुसार, ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली को अपनाने का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और मानवीय त्रुटियों को कम करना है, और सोशल मीडिया पर वायरल कुछ तस्वीरों के आधार पर संपूर्ण प्रक्रिया पर सवाल उठाना उचित नहीं है।


लेकिन छात्रों की चिंता सिर्फ स्कैन क्वालिटी तक सीमित नहीं रही। हज़ारों छात्रों ने शिकायत की कि जब वे अपनी स्कैन की गई कॉपियां देखने के लिए CBSE के पोर्टल पर लॉग-इन कर रहे थे, तो पोर्टल लगातार क्रैश हो रहा था, कैप्चा लोड नहीं हो रहा था और पेज बार-बार फेल हो रहा था। बोर्ड ने तकनीकी खराबी स्वीकार करते हुए कहा कि पोर्टल पर रिकॉर्ड लेवल ट्रैफिक की वजह से समस्या आई, जिसे तकनीकी टीम सुधार रही है।


इस विवाद ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब कई छात्रों ने बताया कि उन्होंने JEE Main जैसी परीक्षाओं में बेहतरीन प्रदर्शन किया, लेकिन बोर्ड परिणाम में अपेक्षाकृत कम अंक मिले। इससे यह सवाल और गहरा हुआ कि क्या ऑन-स्क्रीन मार्किंग ने कहीं न कहीं मूल्यांकन की सटीकता को प्रभावित किया है। हालांकि, CBSE ने दोहराया है कि प्रक्रिया सुरक्षित और मानक के अनुसार थी।इसी बीच, छात्रों के बढ़ते दबाव को देखते हुए बोर्ड ने एक फैसला और लिया उत्तर-पुस्तिका देखने की फीस 700 रुपये से घटाकर 100 रुपये कर दी गई है, ताकि अधिक से अधिक छात्र अपनी कॉपियों की जांच कर सकें और संदेह दूर कर सकें।


CBSE की यह नई ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम थी, लेकिन वायरल कॉपियों ने इसे विवादों के घेरे में ला दिया है। आने वाले दिनों में यह समझना अहम होगा कि यह मामला सिर्फ सोशल मीडिया की गलतफहमी है या वास्तव में डिजिटल स्कैनिंग तकनीक में सुधार की आवश्यकता है।