राजस्थान के बीकानेर जिले के श्रीडूंगरगढ़ स्थित श्री कन्हैयालाल सिखवाल महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम राजकीय विद्यालय पर गंभीर आरोप लगे हैं। 
Bikaner School Controversy: 'पिकनिक' के नाम पर बच्चों को RSS शाखा ले जाने का आरोप परेंट्स ने किया हंगामा।Source : Abp news.com
दावा किया जा रहा है कि स्कूल के कुछ बच्चों को उनके अभिभावकों की जानकारी और अनुमति के बिना राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की शाखा में ले जाया गया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला तूल पकड़ गया और अभिभावकों ने स्कूल प्रशासन के खिलाफ जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है।
बताया जा रहा है कि इस पूरे मामले को सबसे पहले हर्षित मेहला ने सोशल मीडिया पर उठाया। उनका दावा है कि उन्हें सूचना मिली थी कि सरकारी स्कूल के बच्चों को पिकनिक के नाम पर आरएसएस शाखा में ले जाया गया है। इसके बाद वह कुछ अभिभावकों के साथ मौके पर पहुंचे और वहां का वीडियो रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर साझा किया। वीडियो सामने आते ही यह मामला चर्चा का विषय बन गया और स्थानीय स्तर पर विवाद गहरा गया।
अभिभावकों ने उठाए कई सवाल
वीडियो वायरल होने के बाद अभिभावकों ने स्कूल प्रशासन से पूरे घटनाक्रम पर जवाब मांगा। उनका आरोप है कि बच्चों को पिकनिक और शैक्षणिक भ्रमण का हवाला देकर स्कूल से बाहर ले जाया गया, लेकिन बाद में पता चला कि वे आरएसएस शाखा के कार्यक्रम में मौजूद थे। इस पर अभिभावकों ने सवाल उठाया कि यदि यह स्कूल की आधिकारिक गतिविधि थी, तो इसकी पूर्व सूचना क्यों नहीं दी गई और अभिभावकों से लिखित अनुमति क्यों नहीं ली गई।
कई अभिभावकों का कहना है कि सरकारी स्कूल के विद्यार्थियों को किसी भी सामाजिक, सांस्कृतिक या वैचारिक कार्यक्रम में शामिल करने से पहले परिवार की सहमति लेना अनिवार्य होना चाहिए। उनका आरोप है कि बिना अनुमति बच्चों को इस तरह किसी कार्यक्रम में ले जाना उचित नहीं है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
घटना का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई है। एक पक्ष इसे सरकारी स्कूलों की निष्पक्षता और अभिभावकों के अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला बता रहा है, जबकि दूसरे पक्ष का कहना है कि यह एक सामान्य गतिविधि थी, जिसे अनावश्यक रूप से राजनीतिक विवाद का रूप दिया जा रहा है।
जांच और कार्रवाई की मांग
मामले के तूल पकड़ने के बाद अभिभावकों ने पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि बच्चों को बिना अनुमति किसी बाहरी कार्यक्रम में ले जाया गया है, तो इसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
फिलहाल इस पूरे विवाद पर शिक्षा विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। वहीं, अभिभावकों का कहना है कि वे मामले की निष्पक्ष जांच और प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।
