वर्दी में तलवार, सड़क पर करतब और चारों ओर जुटी भीड़... मुजफ्फरपुर के ताजिया जुलूस का यह वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आते ही बिहार पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे। पुलिस अधिकारी की वर्दी में तलवारबाजी का वीडियो तेजी से वायरल हुआ तो मामला सीधे वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचा। जांच के बाद एसएसपी ने संबंधित दरोगा को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया और उनसे स्पष्टीकरण भी तलब किया है। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली घटनाओं पर पुलिस की जवाबदेही पहले से अधिक चर्चा का विषय बनी हुई है।ताजिया जुलूस में तलवारबाजी करते दरोगा का वायरल वीडियो, SSP की कार्रवाई के बाद लाइन हाजिर

ताजिया जुलूस में तलवारबाजी करते दरोगा का वायरल वीडियो, SSP की कार्रवाई के बाद लाइन हाजिर

वायरल वीडियो ने बढ़ाई पुलिस महकमे की चिंता

मुजफ्फरपुर जिले के कांटी थाना क्षेत्र में मोहर्रम के दौरान निकले ताजिया जुलूस में तैनात दरोगा मुस्तकीम खान का दोनों हाथों में तलवार लेकर करतब दिखाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में वे पुलिस की वर्दी में नजर आ रहे हैं और उनके पास सरकारी पिस्टल भी दिखाई दे रही है। मौके पर मौजूद लोगों ने इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा कर दिया, जिसके बाद यह तेजी से वायरल हो गया। देखते ही देखते मामला पुलिस प्रशासन के संज्ञान में पहुंचा और अधिकारियों ने इसकी जांच शुरू कर दी।

जांच के बाद SSP का बड़ा फैसला

मामले की जांच ग्रामीण एसपी राजेश सिंह प्रभाकर की निगरानी में कराई गई। प्रारंभिक जांच और वीडियो के सत्यापन में यह स्पष्ट हुआ कि वायरल वीडियो में दिखाई दे रहे अधिकारी कांटी थाना में तैनात दरोगा मुस्तकीम खान ही हैं। इसके बाद मुजफ्फरपुर के एसएसपी कुंदन कुमार मिश्रा ने तत्काल प्रभाव से उन्हें लाइन हाजिर करने का आदेश जारी किया। साथ ही उनसे यह भी पूछा गया है कि ड्यूटी के दौरान इस प्रकार का प्रदर्शन क्यों किया गया और इसे सेवा आचरण के नियमों का उल्लंघन क्यों न माना जाए।

वर्दी में प्रदर्शन को लेकर उठे सवाल

पुलिस सेवा में तैनात अधिकारियों से अनुशासन, संयम और निष्पक्ष आचरण की अपेक्षा की जाती है। ऐसे में वर्दी पहनकर धार्मिक जुलूस के दौरान तलवारबाजी करने की घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि ड्यूटी के दौरान किसी भी प्रकार का सार्वजनिक प्रदर्शन पुलिस आचार संहिता के अनुरूप नहीं माना जाता। विशेष रूप से तब, जब अधिकारी सरकारी हथियार के साथ मौजूद हो। यही वजह है कि विभागीय कार्रवाई को अनुशासन बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम माना जा रहा है।

सोशल मीडिया के दौर में बढ़ी जवाबदेही

यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि डिजिटल दौर में सोशल मीडिया किसी भी घटना को कुछ ही मिनटों में लाखों लोगों तक पहुंचा सकता है। पहले जो घटनाएं स्थानीय स्तर तक सीमित रह जाती थीं, अब वे प्रशासनिक कार्रवाई का आधार बन रही हैं। पुलिस विभाग भी ऐसे मामलों में तेजी से जांच और कार्रवाई कर यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि सेवा नियमों का उल्लंघन किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। अब सबकी नजर विभागीय जांच और दरोगा के स्पष्टीकरण पर रहेगी कि आगे इस मामले में क्या अंतिम कार्रवाई होती है।