बिहार में चर्चित रिशु श्री मामले ने अब बड़ा राजनीतिक रंग ले लिया है। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के सांसद सुधाकर सिंह ने इस पूरे प्रकरण को लेकर बिहार सरकार और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी आनंद किशोर पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि पिछले एक दशक में शिक्षा विभाग में हुए कई कथित घोटालों की जड़ आनंद किशोर के कार्यकाल में है और रिशु श्री को पहला सरकारी टेंडर भी उनके कार्यकाल में मिला था। हालांकि, इन आरोपों पर राज्य सरकार या संबंधित अधिकारियों की ओर से खबर लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि भी नहीं हुई है। ऐसे में यह मामला अब सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं, बल्कि बिहार की शिक्षा व्यवस्था, सरकारी टेंडर प्रक्रिया और प्रशासनिक जवाबदेही पर बड़ा राजनीतिक सवाल बन गया है।रिशु श्री मामले पर आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह का बड़ा हमला, आनंद किशोर पर लगाए गंभीर आरोप

रिशु श्री मामले पर आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह का बड़ा हमला, आनंद किशोर पर लगाए गंभीर आरोप

'शिक्षा विभाग में 10 साल से घोटालों का नेटवर्क', सुधाकर सिंह ने लगाए गंभीर आरोप

पटना में मीडिया से बातचीत करते हुए आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह ने कहा कि बिहार की शिक्षा व्यवस्था पिछले कई वर्षों से कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार से प्रभावित रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीते दस वर्षों के दौरान आयोजित कई प्रतियोगी परीक्षाओं, भर्ती प्रक्रियाओं और टेंडर सिस्टम में गंभीर गड़बड़ियां हुईं। सांसद का कहना है कि चर्चित टॉपर घोटाला से लेकर हाल के विवादित मामलों तक एक ही तरह का पैटर्न देखने को मिलता है। उन्होंने दावा किया कि शिक्षा विभाग में काम करने वाले कुछ अधिकारियों ने ऐसा तंत्र तैयार किया, जिसने सरकारी व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में उन्होंने सार्वजनिक रूप से कोई दस्तावेज पेश नहीं किया।

'रिशु श्री को पहला टेंडर किसने दिया?' आरोपों के केंद्र में आए आनंद किशोर

सुधाकर सिंह ने सबसे बड़ा आरोप यह लगाया कि विवादों में घिरे रिशु श्री को पहला सरकारी टेंडर वरिष्ठ आईएएस अधिकारी आनंद किशोर के कार्यकाल में मिला था। सांसद ने दावा किया कि यहीं से शिक्षा विभाग में कथित वित्तीय अनियमितताओं का सिलसिला शुरू हुआ। उन्होंने यहां तक कहा कि आनंद किशोर बिहार के "सबसे बड़े माफिया" हैं और शिक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने में उनकी अहम भूमिका रही है। हालांकि, इन दावों की किसी जांच एजेंसी या न्यायिक प्रक्रिया ने अब तक पुष्टि नहीं की है। इसलिए फिलहाल ये आरोप राजनीतिक बयान के रूप में ही देखे जा रहे हैं। दूसरी ओर, आनंद किशोर या उनके कार्यालय की ओर से इन आरोपों पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

मुख्य सचिव से लेकर कई आईएएस अधिकारियों तक जांच की मांग, कोर्ट मॉनिटरिंग की उठी आवाज

आरजेडी सांसद ने अपने आरोपों का दायरा और बढ़ाते हुए बिहार के पूर्व मुख्य सचिव दीपक कुमार का भी नाम लिया। उन्होंने दावा किया कि आनंद किशोर कथित तौर पर उनके संरक्षण में काम करते रहे और पूरे मामले में कई अन्य वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। सुधाकर सिंह ने आरोप लगाया कि अरबों रुपये के कथित घोटाले की निष्पक्ष जांच तभी संभव है, जब इसकी निगरानी अदालत करे। उन्होंने चारा घोटाले का उदाहरण देते हुए कहा कि पूरे मामले की कोर्ट मॉनिटरिंग में जांच कराई जानी चाहिए, ताकि सच सामने आ सके। सांसद ने यह भी कहा कि यदि सरकार उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करना चाहती है, तो वह इसके लिए तैयार हैं और उनके पास अपने आरोपों के समर्थन में सबूत मौजूद हैं। हालांकि, उन कथित सबूतों को उन्होंने सार्वजनिक नहीं किया।

अब सरकार और जांच एजेंसियों की प्रतिक्रिया पर नजर

रिशु श्री प्रकरण अब बिहार की राजनीति में बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। विपक्ष लगातार सरकार पर शिक्षा विभाग में पारदर्शिता की कमी और भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहा है, जबकि सरकार की ओर से अब तक इन ताजा आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि इन आरोपों की जांच होती है, तो इसका असर सिर्फ प्रशासनिक स्तर पर ही नहीं बल्कि बिहार की राजनीति पर भी दिखाई दे सकता है। फिलहाल पूरा मामला आरोप-प्रत्यारोप के दौर में है और अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार, संबंधित अधिकारी और जांच एजेंसियां इस पूरे विवाद पर आगे क्या कदम उठाती हैं। जब तक किसी सक्षम जांच एजेंसी या अदालत की ओर से निष्कर्ष सामने नहीं आता, तब तक इन आरोपों को प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।