erer | Source: erereनई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को 7 लोक कल्याण मार्ग स्थित अपने सरकारी आवास पर हुई उच्चस्तरीय बैठक में नीतिगत फैसलों को लेकर कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए। बैठक में प्रधानमंत्री ने सरकारी विभागों, विश्वविद्यालयों और युवाओं के बीच अधिक सहभागिता बढ़ाने पर जोर दिया, ताकि नीतियां तैयार करते समय नए विचारों और अलग-अलग दृष्टिकोणों को शामिल किया जा सके। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई के इस्तेमाल में मानव हस्तक्षेप, समझ और विवेक को महत्वपूर्ण बताया।

सचिवों के साथ तीसरी उच्चस्तरीय बैठक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भारत सरकार के सचिवों के साथ यह हाल-फिलहाल में हुई तीसरी उच्चस्तरीय बैठक थी। बैठक में कैबिनेट सेक्रेट्री, अहम मंत्रालयों के मंत्री, विभिन्न विभागों के सचिव और प्रधानमंत्री कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। इस दौरान सचिवों ने अपने अनुभव साझा किए और अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़ी चुनौतियों तथा उनकी प्राथमिकताओं पर चर्चा की।

बैठक में बुनियादी ढांचे और संपर्क व्यवस्था, सुरक्षा एवं विदेश मामलों तथा प्रशासन से जुड़े मंत्रालयों और विभागों की भविष्य की कार्ययोजनाओं पर विचार किया गया। प्रधानमंत्री ने अधिकारियों से केवल तत्कालीन मामलों और उपलब्ध आंकड़ों तक सीमित सोच रखने के बजाय देश के भविष्य को आकार देने वाले विषयों पर भी व्यापक दृष्टिकोण के साथ विचार करने को कहा।

एआई के इस्तेमाल पर प्रधानमंत्री का जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रभावी इस्तेमाल पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि एआई का उपयोग मानव हस्तक्षेप, समझ और विवेक के साथ किया जाना चाहिए। बैठक में डेटा के महत्व पर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने डेटा को राष्ट्रीय संपत्ति बताते हुए अलग-अलग उद्देश्यों के लिए डेटा एकत्र करने और उसके प्रबंधन के तरीकों में अंतर की ओर ध्यान दिलाया।

उन्होंने ऐसे समाधान तलाशने की जरूरत बताई, जिनसे उपलब्ध डेटा का प्रभावी ढंग से इस्तेमाल सुनिश्चित किया जा सके। प्रधानमंत्री के निर्देशों में तकनीक के उपयोग के साथ मानवीय समझ और निर्णय क्षमता को बनाए रखने पर विशेष जोर दिखाई दिया।

युवाओं और विश्वविद्यालयों से जुड़े नए विचारों पर जोर

प्रधानमंत्री ने नीतियां तैयार करने की प्रक्रिया में नए दृष्टिकोणों को शामिल करने के लिए सरकारी विभागों, विश्वविद्यालयों और युवाओं के बीच बेहतर सहभागिता की आवश्यकता बताई। उनका जोर इस बात पर रहा कि नीति निर्माण केवल पारंपरिक सोच तक सीमित न रहे, बल्कि नए विचारों, शोध और युवाओं की सोच को भी इसमें जगह मिले।

उन्होंने अधिकारियों को देश की दीर्घकालिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विचार करने और नीतियों को व्यापक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाने का संदेश दिया। इससे नीति निर्माण में अलग-अलग क्षेत्रों के अनुभव और नए विचारों को जोड़ने की दिशा में काम करने पर जोर सामने आया।

विभागों के बीच बेहतर तालमेल और टीम भावना जरूरी

बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने अधिकारियों से सहयोग और जुड़ाव की भावना के साथ काम करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग क्षेत्रों में बंटकर काम करना केवल संगठनात्मक समस्या नहीं है, बल्कि यह सोच से जुड़ा विषय भी है।

प्रधानमंत्री ने अधिकारियों के बीच अनौपचारिक संवाद और टीम भावना विकसित करने के महत्व पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय और सहयोग से नीतियों को अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने में मदद मिल सकती है।

रक्षा उद्योग को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने पर जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के रक्षा उद्योग को और मजबूत करने तथा उसे वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने रक्षा क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार पर अधिक ध्यान देने की बात कही।

प्रधानमंत्री ने नए और रचनात्मक रक्षा पाठ्यक्रम विकसित करने तथा रक्षा क्षेत्र में मानव संसाधन विकास को मजबूत करने के महत्व को भी रेखांकित किया। बैठक में रक्षा क्षेत्र की प्राथमिकताओं और उनसे जुड़ी चुनौतियों पर भी अधिकारियों ने अपने विचार साझा किए।

समुद्री क्षेत्र के लिए व्यापक दृष्टिकोण की जरूरत

प्रधानमंत्री ने भारत के समुद्री क्षेत्र को मजबूत करने के लिए व्यापक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर भी चर्चा की। इसके साथ ही बुनियादी ढांचे, संपर्क व्यवस्था, सुरक्षा, विदेश मामलों और प्रशासन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की भविष्य की कार्ययोजनाओं पर विचार किया गया।

बैठक में सचिवों ने विभिन्न प्राथमिकताओं को लागू करने के दौरान सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में भी अपने दृष्टिकोण साझा किए। प्रधानमंत्री ने इन विषयों पर दीर्घकालिक सोच के साथ आगे बढ़ने और देश के भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखने पर जोर दिया।

बैठक से सामने आया नीति निर्माण का व्यापक एजेंडा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस उच्चस्तरीय बैठक में युवाओं और विश्वविद्यालयों की भागीदारी बढ़ाने, एआई और डेटा के प्रभावी उपयोग, विभागों के बीच बेहतर तालमेल, रक्षा उद्योग को मजबूत करने, अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देने और समुद्री क्षेत्र को मजबूत करने जैसे विषय प्रमुख रहे।

कुल मिलाकर, बैठक में प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को तत्कालीन चुनौतियों के साथ-साथ देश की दीर्घकालिक जरूरतों पर भी ध्यान केंद्रित करने का संदेश दिया। नीति निर्माण में नए विचारों और युवाओं की भागीदारी से लेकर एआई के विवेकपूर्ण इस्तेमाल तथा रक्षा क्षेत्र में अनुसंधान और मानव संसाधन विकास तक, चर्चा का केंद्र भविष्य की जरूरतों के अनुरूप प्रशासनिक और रणनीतिक तैयारियों को मजबूत करना रहा।