बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर और चुनाव चिन्ह स्कूल का बस्ता। | Source: Chrome

बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर और चुनाव चिन्ह स्कूल का बस्ता।Source : Chrome

बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से पहले जन सुराज पार्टी के चुनाव चिह्न को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। पार्टी ने चुनाव चिह्न के मुद्दे पर प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि प्रशांत किशोर को इस बार भी 'स्कूल बैग' चुनाव चिह्न मिलेगा या नहीं।

चुनाव चिह्न को लेकर क्यों बढ़ा सस्पेंस?

जन सुराज पार्टी ने पटना में चुनाव चिह्न के मुद्दे पर प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाने का ऐलान किया है। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा शुरू हो गई कि कहीं पार्टी के 'स्कूल बैग' सिंबल पर कोई संकट तो नहीं है। हालांकि पार्टी से जुड़े सूत्रों का दावा है कि प्रशांत किशोर को उपचुनाव में भी वही चुनाव चिह्न मिलने की उम्मीद है।

2025 के विधानसभा चुनाव में मिला था 'स्कूल बैग' सिंबल

पिछले बिहार विधानसभा चुनाव में जन सुराज पार्टी के सभी उम्मीदवारों को 'स्कूल बैग' चुनाव चिह्न आवंटित किया गया था। पार्टी ने तीन प्रतिशत से अधिक वोट हासिल किए थे, लेकिन कोई सीट जीतने में सफल नहीं हुई। अब उपचुनाव में भी इसी चुनाव चिह्न को लेकर स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार है।

चुनाव आयोग के नियम क्या कहते हैं?

सूत्रों के अनुसार, बांकीपुर के रिटर्निंग ऑफिसर ने अभी तक किसी भी उम्मीदवार को आधिकारिक चुनाव चिह्न आवंटित नहीं किया है। निर्वाचन आयोग की मंजूरी मिलने के बाद ही सभी प्रत्याशियों को चुनाव चिह्न दिया जाएगा। नियमों के मुताबिक, आम विधानसभा चुनाव में कुछ शर्तों के तहत एक ही चुनाव चिह्न दिया जा सकता है, लेकिन उपचुनाव में यह व्यवस्था स्वतः लागू नहीं होती।

बांकीपुर में मुकाबला हुआ दिलचस्प

भाजपा के नितिन नवीन के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद यह सीट खाली हुई है। यहां 30 जुलाई को मतदान होना है। मैदान में करीब दो दर्जन उम्मीदवार हैं, लेकिन मुख्य मुकाबला भाजपा के नीरज सिन्हा, जन सुराज के प्रशांत किशोर और राजद की रेखा गुप्ता के बीच माना जा रहा है।

दल-बदल से भी बदला चुनावी माहौल

उपचुनाव से पहले जन सुराज पार्टी के कई नेताओं ने भाजपा का दामन थाम लिया है। वहीं भाजपा ने भी अपने संगठन को पूरी तरह सक्रिय कर दिया है और कार्यकर्ताओं को घर-घर संपर्क अभियान चलाने की जिम्मेदारी सौंपी है।

हाई-प्रोफाइल बना बांकीपुर उपचुनाव

प्रशांत किशोर के खुद चुनाव मैदान में उतरने से बांकीपुर उपचुनाव की अहमियत काफी बढ़ गई है। राजनीतिक विश्लेषकों की नजर इस चुनाव पर टिकी है, क्योंकि इसके नतीजों को बिहार की मौजूदा राजनीति और आने वाले विधानसभा चुनावों की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है।