erer | Source: rereपटना। बिहार की राजनीति में जन सुराज पार्टी के नेता और बांकीपुर विधायक प्रशांत किशोर के एक बयान को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को लेकर कथित तौर पर गोली मारने की बात कहे जाने के बाद उठे राजनीतिक विवाद पर प्रशांत किशोर ने सफाई दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है और उन्होंने जो बात कही ही नहीं, उसे जबरन उनके मुंह में डाला जा रहा है। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने जो कहा है, उस पर कायम हैं।

प्रशांत किशोर की इस प्रतिक्रिया के बाद बिहार की सियासत में बयानबाजी और तेज होने के संकेत मिले हैं। शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को प्रशांत किशोर विधान परिषद चुनाव में अपने प्रत्याशियों के समर्थन में वोट मांगने निकले थे। इसी दौरान पत्रकारों ने उनसे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को गोली मारने संबंधी कथित बयान के बारे में सवाल किया। इस पर उन्होंने अपने पुराने बयान का बचाव करते हुए कहा कि उनकी बात को कुछ और तरीके से पेश कर दिया गया है। उन्होंने मुख्यमंत्री को लेकर अपनी कही गई बातों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने सम्राट चौधरी को सातवीं फेल, अनपढ़ और अपराधी कहा था।

प्रशांत किशोर बोले- जो नहीं कहा, उसे मेरे मुंह में मत डालिए

पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए प्रशांत किशोर ने कहा, “बोला कुछ और, बना दिया गया कुछ और।” उन्होंने आगे कहा, “आपके कैमरे पर कह रहे हैं कि सम्राट चौधरी सातवीं फेल हैं, अनपढ़ हैं, अपराधी हैं। इससे ज्यादा कुछ नहीं, इससे कम कुछ नहीं।” प्रशांत किशोर ने अपनी बात पर जोर देते हुए कहा, “जो बात मैंने कही नहीं, उसे मुंह में डालिए नहीं, और जो बात मैंने कही है, उस पर कायम हूं। जो करना है कर लो।” उनकी इस प्रतिक्रिया का मुख्य संदेश यही था कि उनके बयान को जिस रूप में प्रचारित किया जा रहा है, वह उसके मुताबिक नहीं है। हालांकि, उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को लेकर पहले दिए गए अपने राजनीतिक बयान से पीछे हटने के बजाय उस पर कायम रहने की बात कही। यह बयान ऐसे समय आया है, जब उनके एक वीडियो को लेकर भारतीय जनता पार्टी और जनता दल यूनाइटेड के नेताओं की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।

आखिर किस बयान से शुरू हुआ बिहार में सियासी विवाद?

विवाद की शुरुआत शुक्रवार को सोशल मीडिया पर प्रसारित हुए प्रशांत किशोर के एक वीडियो से हुई। यह वीडियो बिहार में अपराधियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई और मुठभेड़ में गोली मारने के मुद्दे पर उनके विचारों से संबंधित बताया जा रहा है। वीडियो में प्रशांत किशोर कथित तौर पर कहते दिखाई दे रहे हैं कि यदि अपराधियों को गोली मारनी है, तो सम्राट चौधरी से बड़ा अपराधी कौन है। उन्होंने इसी क्रम में सम्राट चौधरी पर सात लोगों की हत्या के मामले में जेल जाने का आरोप भी लगाया। बताया गया कि यह वीडियो विधान परिषद चुनाव के सिलसिले में सीतामढ़ी में आयोजित एक जनसभा का है। हालांकि, इन आरोपों को प्रशांत किशोर के राजनीतिक बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए। मुख्यमंत्री के खिलाफ लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस समाचार में उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है। वीडियो सामने आने के बाद बिहार के राजनीतिक गलियारों में विवाद शुरू हो गया। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने प्रशांत किशोर के बयान पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के लिए इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना उचित नहीं है और इसे लोकतांत्रिक व्यवहार के अनुरूप नहीं माना जा सकता।

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने जताई नाराजगी

प्रशांत किशोर के कथित बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने उनके शब्दों पर सवाल उठाए। विवाद का केंद्र मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के खिलाफ इस्तेमाल की गई भाषा और लगाए गए आरोप हैं। बीजेपी की ओर से इस बयान को संवैधानिक पद की गरिमा से जोड़कर देखा गया है। पार्टी नेताओं की नाराजगी के बीच प्रशांत किशोर ने शनिवार को पत्रकारों के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि उनके बयान को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए और उनकी कही गई बात को उसी संदर्भ में समझा जाना चाहिए। इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार में राजनीतिक बयानबाजी को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। एक तरफ प्रशांत किशोर अपने बयान पर कायम रहने की बात कह रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बीजेपी नेता उनके शब्दों और मुख्यमंत्री पर लगाए गए आरोपों को लेकर विरोध जता रहे हैं।

जदयू के वरिष्ठ नेता श्याम रजक ने भी किया विरोध

प्रशांत किशोर के वीडियो पर जनता दल यूनाइटेड के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री श्याम रजक ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने उनके बयान की आलोचना करते हुए कहा कि कोई समझदार व्यक्ति इस तरह की भाषा का इस्तेमाल नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि वे प्रशांत किशोर को एक बुद्धिजीवी व्यक्ति मानते थे, लेकिन उनके बयान से उन्हें निराशा हुई है। श्याम रजक ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के बारे में लगाए गए आरोपों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस व्यक्ति पर राज्य की 14 करोड़ जनता को भरोसा है, उसके बारे में इस तरह के आरोप लगाना उचित नहीं है। उन्होंने प्रशांत किशोर की भाषा और शब्दों के चयन पर भी आपत्ति जताई। पूर्व मंत्री ने कहा कि यदि प्रशांत किशोर के पास सम्राट चौधरी के खिलाफ कोई सबूत है, तो उन्हें अदालत का दरवाजा खटखटाना चाहिए। उनके मुताबिक, किसी व्यक्ति पर आरोप लगाने के बजाय उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कानूनी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। श्याम रजक की प्रतिक्रिया से स्पष्ट है कि इस विवाद में केवल बीजेपी ही नहीं, बल्कि जदयू के नेताओं ने भी प्रशांत किशोर के बयान पर सवाल उठाए हैं। इससे बिहार की राजनीति में इस मुद्दे को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।

सम्राट चौधरी पर हमले से बढ़ी राजनीतिक बयानबाजी

प्रशांत किशोर की सफाई के बावजूद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को लेकर दिया गया उनका बयान राजनीतिक चर्चा में बना हुआ है। प्रशांत किशोर ने एक ओर अपने शब्दों को गलत तरीके से प्रस्तुत किए जाने की बात कही, तो दूसरी ओर उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे अपनी कही गई बात पर कायम हैं। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने जहां बयान की भाषा और संवैधानिक पद की गरिमा पर सवाल उठाए, वहीं जदयू नेता श्याम रजक ने आरोपों को लेकर सबूत और न्यायिक प्रक्रिया का मुद्दा उठाया। इस तरह विवाद केवल एक बयान की व्याख्या तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक भाषा, सार्वजनिक आरोपों और नेताओं की जिम्मेदारी को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।