Source: Abp

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UP Politics: उत्तर प्रदेश की की राजनीति फिर एक बार चर्चे का विषय बन गया है। AIMIM के आधिकारिक प्रतिनिधि शादाब चौहान ने अखिलेश यादव के ब्यान पर कई सवाल उठाए, और उन्होंने कहा के उन्होंने कहा के समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव कहते हैं की मर्यादा का पहला नाम श्री राम और दूसरा संविधान है। इससे ये बात साफ सामने आता है कि अखिलेश यादव अब समाजवाद की राजनीति को छोड़कर "सॉफ्ट हिंदुत्व" की ओर चल पड़े हैं। उनके ब्यान से ये साबित होता है कि सपा प्रमुख अब बीजेपी की विचारधारा के करीब पहुंच रहे हैं। अखिलेश यादव के इस ब्यान के बाद AIMIM प्रवक्ता शादाब चौहान ने कहा के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव की भाषा में ज्यादा अंतर नहीं रह गया है, क्योंकि दोनों ही आस्था को सबसे ऊपर रख रहे हैं।

AIMIM के प्रवक्ता ने ये भी कहा कि भारत में संविधान सबसे ऊपर है और किसी भी धार्मिक आस्था को उससे ऊपर नहीं रखा जा सकता। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में देश का संचालन कानून के मुताबिक होना चाहिए, न कि किसी एक धर्म की आस्था के आधार पर। उन्होंने कहा कि किसी भी धार्मिक ग्रंथ से ऊपर उनके लिए भारत का संविधान है, क्योंकि वही देश की सबसे बड़ी ताकत और पहचान है।

अखिलेश पर AIMIM का बड़ा आरोप

शादाब चौहान ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि सपा प्रमुख यह मानकर चल रहे हैं कि उत्तर प्रदेश का मुस्लिम समाज हर हाल में उनके साथ रहेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि अब यह सोच बदल चुकी है और लोग केवल परंपरागत राजनीति के आधार पर वोट नहीं देंगे। उन्होंने आगे यह भी कहा, "अब मुसलमान दरी नहीं बिछाएगा बल्कि अधिकार, हिस्सेदारी की बात करेगा, उनके मुताबिक, मुस्लिम समाज अब अपने अधिकारों, सम्मान और राजनीतिक हिस्सेदारी की बात करेगा, न कि सिर्फ चुनाव के समय समर्थन देने तक सीमित रहेगा।

सपा पर मुस्लिम मुद्दों की अनदेखी का आरोप

शादाब चौहान ने आगे यह भी कहा, "अखिलेश यादव का समाजवाद का मुखौटा आज बेनकाब हो गया। मदरसा और खानकाहों से जुड़े मामलों सहित मुसलमानों पर होने वाली घटनाओं पर समाजवादी पार्टी ने उस पर आवाज नहीं उठाई। शादाब चौहान ने आरोप लगाया कि सपा ने मुस्लिम समाज के समर्थन से राजनीति की, लेकिन उनके मुद्दों को गंभीरता से नहीं लिया।

सीएम योगी और अखिलेश यादव दोनों की भाषा हिंदुत्व की भाषा है। जहाँ भारत के संविधान को सेंकेडरी बताया जाता है। जो की बहुत ही दुख की बात है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में संविधान के अनुसार देश को चलाने का काम होना चाहिए वहां यह लोग आस्था को सुप्रीम कर रहे हैं।