erer | Source: rereनई दिल्ली। नेपाल-तिब्बत सीमा पर भीषण बाढ़ और भूस्खलन से मची तबाही के बीच अब एक और बड़े प्राकृतिक संकट का खतरा सामने आया है। चीन के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि सीमा क्षेत्र के ऊपरी हिस्से में बनी एक बैरियर झील अगले 72 घंटों के भीतर टूट सकती है। प्राकृतिक बांध के कारण बनी यह झील चोचेन खोला (Chhochen Khola) और पुरेपु सांगपो (Purepu Tsangpo) नदियों के संगम के पास स्थित है। चीन का जल संसाधन मंत्रालय इस झील की स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है और संभावित खतरे को देखते हुए निगरानी तथा आकलन बढ़ा दिया गया है।

72 घंटे क्यों बेहद अहम हैं?

चीनी सरकारी प्रसारक CCTV की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने हिमालयी सीमा क्रॉसिंग के ऊपरी हिस्से में स्थित इस बैरियर झील से जुड़े गंभीर जोखिम की पहचान की है। बताया गया है कि यह झील उस इलाके में है, जहां पहले ही बाढ़ और भूस्खलन के कारण राहत एवं बचाव अभियान चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। ऐसे में यदि प्राकृतिक बांध पर पानी का दबाव बढ़ता है और झील टूटती है, तो अचानक बड़ी मात्रा में पानी नीचे की ओर आने का खतरा पैदा हो सकता है।

सरकारी मीडिया के अनुसार, चीन के जल संसाधन मंत्रालय ने आपदा स्थल के उत्तर-पूर्व में चोचेन खोला और पुरेपु त्सांगपो नदियों के संगम पर बनी झील की निगरानी और जोखिम आकलन तेज कर दिया है। इसका उद्देश्य संभावित दूसरी आपदा के प्रभाव को कम करना और जारी राहत एवं बचाव अभियान को सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ाना है।

झील में पहले से जमा है करीब 20 लाख घन मीटर पानी

CCTV की रिपोर्ट में बताया गया है कि गुरुवार तक बैरियर झील में लगभग 20 लाख क्यूबिक मीटर यानी करीब 20 लाख घन मीटर पानी जमा हो चुका था। सबसे बड़ी चिंता यह है कि झील में पानी का स्तर लगातार बढ़ रहा है और यह पहले से ही ओवरफ्लो होने लगी है। मौसम की मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए आशंका है कि अगले तीन दिनों में इसमें लगभग 30 लाख घन मीटर अतिरिक्त पानी पहुंच सकता है।

यदि पानी की यह मात्रा प्राकृतिक बांध पर दबाव बढ़ाती है, तो झील के टूटने का जोखिम और गंभीर हो सकता है। इसी वजह से चीनी अधिकारियों ने अगले 72 घंटों को लेकर विशेष चेतावनी जारी की है। फिलहाल अधिकारियों की निगरानी का मुख्य उद्देश्य झील के जलस्तर और प्राकृतिक बांध की स्थिति में होने वाले बदलाव का समय रहते पता लगाना है।

एक आपदा से उबरने से पहले दूसरी चुनौती

नेपाल और तिब्बत का यह सीमावर्ती क्षेत्र अभी हाल में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के प्रभाव से जूझ रहा है। बुधवार सुबह अचानक आई विनाशकारी बाढ़ ने नेपाल में भारी तबाही मचाई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, नेपाल में अब तक कम से कम 332 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों लोग लापता बताए जा रहे हैं।

बाढ़ के तेज बहाव ने कई घरों, सड़कों और बिजली परियोजनाओं को नुकसान पहुंचाया है। सीमा के पास चीन के जिइरोंग क्षेत्र में ल्हेंदे नदी में मिट्टी और चट्टानों के गिरने से तीन लोगों की मौत की भी जानकारी सामने आई है। इस आपदा ने सीमावर्ती क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्यों को बेहद कठिन बना दिया है।

तिब्बत में 558 लोग लापता, चीन के करीब 100 नागरिकों का भी पता नहीं

ताजा जानकारी के मुताबिक, तिब्बत क्षेत्र से कम से कम 558 लोग लापता बताए गए हैं। चीन के विदेश मंत्रालय के अनुसार, नेपाल की सीमा की ओर लगभग 100 चीनी नागरिक भी लापता हैं। इसके अलावा नेपाल की बाढ़ से प्रभावित लोगों और सीमा क्षेत्र में फंसे लोगों को लेकर भी स्थिति गंभीर बनी हुई है।

ऐसे समय में नई बैरियर झील का खतरा सामने आने से बचाव अभियान में जुटी एजेंसियों के सामने अतिरिक्त चुनौती खड़ी हो गई है। यदि झील का पानी अचानक नीचे की ओर आता है, तो पहले से प्रभावित नदी घाटियों और बुनियादी ढांचे पर दबाव बढ़ सकता है।

चीन ने संवेदनशील गांव खाली कराए, बचाव दल रवाना

संभावित खतरे को देखते हुए तिब्बती क्षेत्र के संवेदनशील गांवों को खाली कराया गया है। चीन ने राहत और बचाव अभियान को मजबूत करने के लिए बीजिंग और चेंगदू से विशेष अग्निशमन एवं बचाव दल रवाना किए हैं। ये दल स्थानीय पुलिस और सेना के साथ मिलकर राहत कार्यों में सहायता करेंगे।

अधिकारियों का ध्यान फिलहाल प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, संभावित जलप्रवाह के खतरे की निगरानी करने और आवश्यक बचाव संसाधनों को तैयार रखने पर है। इस बीच जिइरोंग कस्बे के केंद्रीय शहरी हिस्सों में बिजली और संचार सेवाएं बहाल कर ली गई हैं। हालांकि, बंदरगाह से जुड़े इलाके अभी भी पूरी तरह कटे हुए बताए जा रहे हैं।

हिमालय की बदलती परिस्थितियां फिर चिंता का कारण

नेपाल और तिब्बत में सामने आया यह संकट हिमालयी क्षेत्र में प्राकृतिक आपदाओं के बढ़ते जोखिम की ओर भी ध्यान खींचता है। पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश, भूस्खलन, नदी के तेज प्रवाह और प्राकृतिक रूप से बनी झीलों में पानी बढ़ने जैसी घटनाएं अचानक गंभीर रूप ले सकती हैं। मौजूदा स्थिति में बैरियर झील पर लगातार निगरानी इसलिए महत्वपूर्ण हो गई है क्योंकि प्राकृतिक बांध की स्थिति में बदलाव होने पर नीचे बसे क्षेत्रों के लिए अचानक बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है।

पिछले साल भी सामने आया था ग्लेशियल झील का खतरा

अगस्त 2025 में भी इसी इलाके में अचानक बाढ़ की घटना सामने आई थी। उस समय अधिक तापमान के कारण तिब्बत में एक ग्लेशियल झील का पानी ओवरफ्लो हो गया था। इस घटना में नौ लोगों की मौत हुई थी और नेपाल तथा चीन को जोड़ने वाले पुल सहित महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा था।

पिछली घटना के बाद एक बार फिर उसी व्यापक हिमालयी क्षेत्र में प्राकृतिक जलस्रोतों और झीलों से जुड़ा खतरा सामने आना चिंता बढ़ाने वाला है। मौजूदा स्थिति में चीन की ओर से झील की निगरानी बढ़ाने और संवेदनशील आबादी को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के कदम उठाए गए हैं।

अगले तीन दिन रहेंगे बेहद महत्वपूर्ण

नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में पहले से जारी बाढ़ और भूस्खलन संकट के बीच अब चोचेन खोला और पुरेपु सांगपो नदियों के संगम पर बनी बैरियर झील पर निगरानी बढ़ा दी गई है। झील में लगभग 20 लाख घन मीटर पानी जमा होने और अगले तीन दिनों में करीब 30 लाख घन मीटर अतिरिक्त पानी आने की आशंका ने खतरे को गंभीर बना दिया है। चीन द्वारा 72 घंटे की चेतावनी, संवेदनशील गांवों को खाली कराना और विशेष बचाव दलों की तैनाती इस स्थिति की गंभीरता को दर्शाती है