पूर्व भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी Jwala Gutta ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक ऐसा खुलासा किया, जिसने पूरे देश में ब्रेस्ट मिल्क डोनेशन को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी। ज्वाला गुट्टा ने बताया कि मां बनने के बाद उन्होंने हैदराबाद और चेन्नई के सरकारी अस्पतालों में लगभग 60 लीटर ब्रेस्ट मिल्क डोनेट किया। उनके इस कदम की सोशल मीडिया पर जमकर सराहना हो रही है। वहीं कई लोग यह भी जानना चाह रहे हैं कि आखिर भारत में ब्रेस्ट मिल्क डोनेट करना कानूनी रूप से सही है या नहीं। इस मुद्दे ने नवजात शिशुओं की देखभाल, ह्यूमन मिल्क बैंक और मातृत्व स्वास्थ्य को लेकर नई बहस छेड़ दी है।


भारत में ब्रेस्ट मिल्क डोनेट करना पूरी तरह लीगल

भारत में सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त ह्यूमन मिल्क बैंकों के जरिए ब्रेस्ट मिल्क डोनेट करना पूरी तरह कानूनी है। नेशनल हेल्थ मिशन के दिशा-निर्देशों के तहत स्वस्थ महिलाएं अपनी इच्छा से अतिरिक्त ब्रेस्ट मिल्क दान कर सकती हैं। इसके बदले किसी तरह का आर्थिक लाभ नहीं दिया जाता। देश में इस समय 125 से ज्यादा ह्यूमन मिल्क बैंक और कॉम्प्रिहेंसिव लेक्टेशन मैनेजमेंट सेंटर काम कर रहे हैं, जो सरकारी और निजी अस्पतालों से जुड़े हुए हैं। ये सेंटर डोनेट किए गए दूध को इकट्ठा करने, उसकी जांच करने, पाश्चराइज करने और सुरक्षित तरीके से स्टोर करने का काम करते हैं, ताकि जरूरतमंद नवजात शिशुओं तक सुरक्षित दूध पहुंचाया जा सके।


कई मेडिकल जांचों के बाद ही इस्तेमाल होता है दूध

डोनेट किया गया दूध सीधे किसी दूसरे बच्चे को नहीं दिया जाता। संक्रमण और किसी भी तरह के खतरे से बचाने के लिए इसकी कई स्तरों पर मेडिकल जांच की जाती है। अस्पताल डोनर महिलाओं की एचआईवी, हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी और सिफिलिस जैसी गंभीर बीमारियों के लिए स्क्रीनिंग करते हैं। इसके बाद ही दूध को सुरक्षित माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, मां का दूध नवजात बच्चों के लिए प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला सबसे महत्वपूर्ण पोषण माना जाता है। खासकर समय से पहले जन्मे या कमजोर बच्चों के लिए यह जीवन रक्षक साबित हो सकता है।


कौन महिलाएं कर सकती हैं ब्रेस्ट मिल्क डोनेट?

सिर्फ स्वस्थ और स्तनपान कराने वाली महिलाएं ही ब्रेस्ट मिल्क डोनेट करने के लिए योग्य मानी जाती हैं। जो महिलाएं तंबाकू, शराब या किसी नशीले पदार्थ का सेवन करती हैं या किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित होती हैं, उन्हें इस प्रक्रिया में शामिल होने की अनुमति नहीं दी जाती। डॉक्टरों का कहना है कि ब्रेस्ट मिल्क डोनेशन सिर्फ एक मेडिकल जरूरत नहीं, बल्कि कई नवजात बच्चों के लिए उम्मीद की किरण भी है। ज्वाला गुट्टा के इस कदम ने लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने का काम किया है और अब सोशल मीडिया पर कई लोग इसे “मदरहुड की सबसे खूबसूरत मिसाल” बता रहे हैं