बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था अब बड़े बदलाव के दौर से गुजरने वाली है। करीब 47 साल पुरानी कार्यप्रणाली को बदलने की तैयारी शुरू हो चुकी है। राज्य सरकार ने साफ संकेत दे दिए हैं कि अब 1979 में बनी पुरानी कार्यपालिका नियमावली को मौजूदा समय की जरूरतों के हिसाब से पूरी तरह नया रूप दिया जाएगा। सरकार नई कार्यपालिका नियमावली 2026 तैयार कर रही है, जिसका उद्देश्य प्रशासनिक ढांचे को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और तेज बनाना है। लंबे समय से चली आ रही कई ऐसी प्रक्रियाएं, जो अब अप्रासंगिक हो चुकी हैं, उन्हें हटाने की तैयारी है। वहीं नई तकनीक, डिजिटल व्यवस्था और वर्तमान योजनाओं को इसमें शामिल किया जाएगा।
दरअसल, 1979 में बनी नियमावली उस दौर की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई थी। तब न डिजिटल व्यवस्था थी, न ऑनलाइन सेवाओं का विस्तार और न ही प्रशासनिक कामकाज का मौजूदा दबाव। समय के साथ इसमें कई संशोधन जरूर किए गए, लेकिन अब सरकार मान रही है कि सिर्फ छोटे बदलावों से काम नहीं चलेगा।
सभी विभागों को मिला बड़ा निर्देश
मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग ने राज्य के सभी विभागों को निर्देश जारी किया है कि वे अपने कामकाज की पूरी समीक्षा करें। विभागों से कहा गया है कि वे ऐसे कार्यों की पहचान करें—
जो अब उपयोग में नहीं हैं, जिनकी प्रासंगिकता खत्म हो चुकी है, या जो अनावश्यक रूप से प्रशासनिक प्रक्रिया को धीमा कर रहे हैं।
साथ ही विभागों से यह भी कहा गया है कि वे वर्तमान में जिन नई योजनाओं, जिम्मेदारियों और प्रशासनिक जरूरतों पर काम कर रहे हैं, उनकी सूची भी तैयार करें ताकि उन्हें नई नियमावली में शामिल किया जा सके।
11 मई तक मांगी गई रिपोर्ट
सरकार ने सभी विभागों को 11 मई तक अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। इसके बाद 12 मई को अपर मुख्य सचिव, मंत्रिमंडल सचिवालय के स्तर पर एक महत्वपूर्ण बैठक होगी, जिसमें सभी सुझावों की समीक्षा की जाएगी। इसी बैठक में प्रस्तावित बदलावों को अंतिम रूप देने की दिशा तय होगी।
क्या-क्या बदल सकता है?
सूत्रों के मुताबिक नई नियमावली में कई पुरानी प्रक्रियाओं को हटाया जा सकता है। इनमें—
मैनुअल रजिस्टर प्रणाली, पुरानी फाइलिंग व्यवस्था, डाक के जरिए पत्राचार, एक ही फाइल पर कई स्तर की मंजूरी,
मैनुअल भुगतान प्रणाली, पुरानी रिपोर्टिंग व्यवस्था, और अनावश्यक भौतिक सत्यापन जैसी प्रक्रियाएं शामिल हो सकती हैं। सरकार की कोशिश है कि इनकी जगह डिजिटल और तेज प्रक्रिया लाई जाए।
आम लोगों को क्या होगा फायदा?
अगर यह नई व्यवस्था लागू होती है तो इसका सीधा असर आम लोगों पर भी पड़ेगा--
सरकारी सेवाओं में देरी कम हो सकती है।
फाइलों के लंबे चक्कर घट सकते हैं।
निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज हो सकती है।
और सरकारी कामकाज में पारदर्शिता बढ़ सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशासनिक सुधार सिर्फ सरकारी दफ्तरों तक सीमित नहीं होता, बल्कि इसका असर जनता को मिलने वाली सेवाओं पर भी पड़ता है।
क्यों अहम है यह बदलाव?
बिहार में लगातार डिजिटल गवर्नेंस, ऑनलाइन सेवाओं और नई योजनाओं का विस्तार हो रहा है। ऐसे में दशकों पुरानी नियमावली मौजूदा जरूरतों के साथ तालमेल नहीं बैठा पा रही थी। यही वजह है कि सरकार अब प्रशासनिक ढांचे को पूरी तरह अपडेट करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। अगर यह योजना सफल होती है तो बिहार की नौकरशाही में यह सबसे बड़े संरचनात्मक बदलावों में से एक माना जा सकता है।
