जयपुर के मालवीय नगर में स्थित 45 साल पुरानी नूरानी मस्जिद को हटाने की कार्रवाई ने राजस्थान की राजनीति, प्रशासन और स्थानीय समाज में नई बहस छेड़ दी है। रविवार को जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मस्जिद को जमींदोज कर दिया। प्रशासन का दावा है कि यह कार्रवाई सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत की गई, जबकि मस्जिद कमेटी का आरोप है कि उन्हें पर्याप्त समय नहीं दिया गया और दशकों पुराने धार्मिक स्थल को जल्दबाजी में हटाया गया। इस कार्रवाई के दौरान पूरे इलाके को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया था। करीब 3000 पुलिसकर्मियों की तैनाती, ड्रोन निगरानी और 24 घंटे के लिए इंटरनेट बंद करने जैसे कदमों ने इस अभियान की संवेदनशीलता को स्पष्ट कर दिया।

सड़क चौड़ीकरण बनाम धार्मिक पहचान

जयपुर विकास प्राधिकरण का कहना है कि मालवीय नगर क्षेत्र में लंबे समय से ट्रैफिक जाम की गंभीर समस्या बनी हुई थी। सड़क चौड़ीकरण परियोजना के लिए पहले ही सैकड़ों नोटिस जारी किए जा चुके थे और अधिकांश अवरोधक निर्माण हटाए जा चुके थे। प्रशासन के अनुसार नूरानी मस्जिद, एक मजार, दो मंदिर और एक सत्संग भवन सड़क विस्तार की जद में आ रहे थे, इसलिए सभी संरचनाओं पर समान रूप से कार्रवाई की गई। अधिकारियों का दावा है कि यह किसी धर्म विशेष के खिलाफ कार्रवाई नहीं, बल्कि सार्वजनिक अवसंरचना परियोजना का हिस्सा है। हालांकि, स्थानीय मुस्लिम समुदाय का तर्क है कि 1981 से अस्तित्व में रही मस्जिद केवल एक इमारत नहीं, बल्कि इलाके की धार्मिक और सामाजिक पहचान का केंद्र थी। यही वजह है कि कार्रवाई के बाद भावनात्मक प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं।

नोटिस पर विवाद, वैकल्पिक जमीन और कानूनी सवाल

मस्जिद कमेटी का कहना है कि जिस जमीन पर नूरानी मस्जिद बनी थी, वह एक स्वीकृत हाउसिंग सोसाइटी से खरीदी गई थी और पिछले चार दशकों से वहां नियमित रूप से नमाज अदा की जा रही थी। कमेटी के अनुसार, प्रशासन ने अंतिम नोटिस बहुत कम समय पहले दिया, जिससे कानूनी और प्रशासनिक विकल्प तलाशने का अवसर नहीं मिल सका। दूसरी ओर जेडीए अधिकारियों का दावा है कि परियोजना को लेकर काफी पहले से प्रक्रिया चल रही थी और प्रभावित पक्षों को वैकल्पिक व्यवस्था के प्रस्ताव भी दिए गए थे। बताया जा रहा है कि खो नागोरियन क्षेत्र में वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भी रखा गया था। लेकिन सवाल यह बना हुआ है कि क्या लंबे समय से मौजूद धार्मिक स्थलों के पुनर्वास और संवाद की प्रक्रिया और अधिक व्यापक हो सकती थी?

बुलडोजर कार्रवाई से पहले सुरक्षा का अभूतपूर्व बंदोबस्त

नूरानी मस्जिद पर कार्रवाई को लेकर प्रशासन किसी भी तरह का जोखिम लेने के मूड में नहीं था। हाल के वर्षों में देश के विभिन्न हिस्सों में धार्मिक स्थलों पर कार्रवाई के दौरान हुए विरोध-प्रदर्शनों और झड़पों को देखते हुए जयपुर पुलिस ने अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था की। कार्रवाई से पहले फ्लैग मार्च निकाला गया, संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया और सोशल मीडिया पर अफवाहों को रोकने के लिए इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से बंद कर दी गईं। प्रशासन का उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखना था, लेकिन इंटरनेट बंदी और भारी सुरक्षा व्यवस्था ने इस कार्रवाई को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया। अब यह मामला केवल एक मस्जिद या सड़क चौड़ीकरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शहरी विकास, धार्मिक आस्था, कानूनी प्रक्रिया और प्रशासनिक संवेदनशीलता के बीच संतुलन को लेकर भी महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर रहा है।