erer | Source: erereनई दिल्ली। निजी अस्पताल में इलाज का बिल पूरा नहीं होने पर मरीज की मौत के बाद शव परिजनों को नहीं सौंपने का संवेदनशील मामला सोमवार को राज्यसभा में उठा। राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने विशेष उल्लेख के जरिए इस मुद्दे को सदन के सामने रखा और ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए प्रभावी कानूनी व्यवस्था बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि कुछ निजी अस्पताल मृतकों के शव को बकाया रकम की वसूली का माध्यम बना रहे हैं, जो बेहद गंभीर और मानवीय चिंता का विषय है।

अल्मोड़ा की महिला के मामले से उठाया मुद्दा

राघव चड्ढा ने सदन में इसी साल जनवरी में अल्मोड़ा में सामने आए एक मामले का जिक्र किया। उनके अनुसार, एक महिला को आपात स्थिति में निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। करीब दो घंटे के इलाज के बाद महिला की मौत हो गई। इसके बाद अस्पताल की ओर से परिवार को 80 हजार रुपये का बिल दिया गया।

चड्ढा के मुताबिक, महिला के परिवार ने किसी तरह पैसों की व्यवस्था करके 57 हजार रुपये का भुगतान कर दिया, लेकिन 23 हजार रुपये बकाया रह गए। आरोप है कि बकाया रकम जमा नहीं होने के कारण अस्पताल ने महिला का शव परिजनों को सौंपने से इनकार कर दिया।

23 हजार रुपये के लिए शव रोकने का आरोप

राज्यसभा सांसद ने बताया कि परिवार पहले ही अपने प्रियजन को खो चुका था और आर्थिक संकट के बीच 57 हजार रुपये का भुगतान कर चुका था। इसके बावजूद 23 हजार रुपये बकाया रहने के कारण कथित तौर पर शव रोक दिया गया। चड्ढा के अनुसार, परिवार अस्पताल से शव सौंपने की गुहार लगाता रहा, लेकिन अस्पताल ने कथित तौर पर बकाया रकम जमा होने तक शव देने से इनकार किया।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल की ओर से परिवार की गाड़ी रोकने की धमकी तक दी गई। इस मामले को राघव चड्ढा ने केवल एक परिवार से जुड़ी घटना नहीं बल्कि देशभर में सामने आ रही एक गंभीर समस्या के रूप में सदन में उठाया।

पुलिस के हस्तक्षेप के बाद मिला शव और मृत्यु प्रमाण पत्र

राघव चड्ढा के अनुसार, पुलिस के हस्तक्षेप के बाद ही परिवार को महिला का शव और मृत्यु प्रमाण पत्र सौंपा गया। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके शव को बकाया रकम की वसूली के लिए रोकना गंभीर विषय है।

चड्ढा ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में देश के अलग-अलग हिस्सों से निजी अस्पतालों में बिल बकाया रहने के कारण शव परिजनों को नहीं सौंपे जाने की कई खबरें सामने आई हैं। उन्होंने सरकार से ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए स्पष्ट और प्रभावी कानून बनाने की मांग की।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद घटनाओं पर चिंता

राघव चड्ढा ने सदन में कहा कि इस तरह की परिस्थितियों को लेकर उच्चतम न्यायालय के निर्देश भी मौजूद हैं। इसके बावजूद देश के अलग-अलग हिस्सों से ऐसी घटनाएं सामने आना चिंता का विषय है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि मौजूदा व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जाए, ताकि किसी मृत व्यक्ति के शव को बकाया बिल के भुगतान के लिए रोका न जा सके।

उन्होंने कहा कि अस्पतालों को अपने बकाया भुगतान की वसूली के लिए कानूनी रास्ता अपनाना चाहिए, लेकिन किसी परिवार के मृत परिजन का शव रोककर उस पर आर्थिक दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए।

निजी अस्पतालों की जवाबदेही का सवाल

राज्यसभा में उठाए गए इस मुद्दे ने निजी स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों और उनके परिजनों के अधिकारों को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। किसी परिवार में व्यक्ति की मृत्यु के बाद परिजन पहले ही मानसिक और भावनात्मक संकट से गुजर रहे होते हैं। ऐसी स्थिति में शव सौंपने को लेकर आर्थिक दबाव बनाए जाने से उनकी परेशानी और बढ़ सकती है।

राघव चड्ढा ने सरकार से ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए सख्त और स्पष्ट व्यवस्था तैयार करने की मांग की। उनके अनुसार, मरीज की मृत्यु के बाद शव को बकाया बिल की वसूली के साधन के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

नकली दवाइयों का मुद्दा भी राज्यसभा में उठा

विशेष उल्लेख के दौरान राज्यसभा में कई अन्य जनहित से जुड़े मुद्दे भी उठाए गए। भाजपा के दिनेश शर्मा ने नकली दवाइयों के मुद्दे को सदन के सामने रखा। उन्होंने कहा कि नकली दवाइयों का मामला केवल धोखाधड़ी या चोरी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संगठित अपराध का रूप ले सकता है और इससे नागरिकों के जीवन के साथ-साथ राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को भी गंभीर नुकसान पहुंचता है।

उन्होंने नकली दवाइयों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

बच्चों के मोबाइल इस्तेमाल पर भी चिंता

भाजपा के केसरी देव सिंह झाला ने बच्चों द्वारा मोबाइल फोन पर अधिक समय बिताए जाने की समस्या को विशेष उल्लेख के जरिए उठाया। उन्होंने कहा कि बच्चों में मोबाइल फोन के अत्यधिक इस्तेमाल की समस्या पर गंभीरता से ध्यान देने और इस दिशा में प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है।

ई-कचरे के निपटारे का मुद्दा सदन में उठा

भाजपा की कल्पना सैनी ने ई-कचरे से जुड़े विषय को राज्यसभा में उठाया। उन्होंने ई-कचरे के प्रभावी तरीके से निपटान की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके अलावा विशेष उल्लेख के जरिए कई अन्य सदस्यों ने भी लोक महत्व से जुड़े विभिन्न मुद्दों को सदन के सामने रखा।

शव रोकने के मामलों पर सख्त व्यवस्था की मांग

राज्यसभा में राघव चड्ढा द्वारा उठाया गया मुद्दा निजी अस्पतालों में बकाया भुगतान और मरीजों के अधिकारों से जुड़ा है। अल्मोड़ा की महिला के मामले का उल्लेख करते हुए उन्होंने सरकार से ऐसी व्यवस्था बनाने की मांग की, जिससे किसी परिवार को बकाया बिल के कारण अपने मृत परिजन का शव पाने में परेशानी न हो।

फिलहाल सदन में इस मुद्दे के जरिए निजी अस्पतालों की जवाबदेही, मरीजों के अधिकार और मृत्यु के बाद शव सौंपने की प्रक्रिया को लेकर बहस का एक महत्वपूर्ण विषय सामने आया है। राघव चड्ढा ने सरकार से प्रभावी कानूनी कदम उठाने की मांग की है, जबकि राज्यसभा में विशेष उल्लेख के माध्यम से अन्य सदस्यों ने भी जनहित से जुड़े अलग-अलग मुद्दों पर ध्यान आकर्षित किया।