महोबा। उत्तर प्रदेश के महोबा जिले के सिद्धनडेरा गांव में स्कूल जाने वाले बच्चों की परेशानी ने प्रशासन का ध्यान खींचा है। गांव में आजादी के बाद से करीब 500 मीटर लंबी सड़क कच्ची पड़ी है। बारिश होते ही इस रास्ते पर पानी और कीचड़ भर जाता है, जिससे प्राथमिक और जूनियर स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के लिए स्कूल पहुंचना मुश्किल हो जाता है। लंबे समय से चली आ रही इस समस्या से परेशान करीब 100 बच्चे अपने अभिभावकों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंच गए और सड़क निर्माण की मांग को लेकर अपनी आवाज उठाई।
कलेक्ट्रेट पहुंचकर बच्चों ने बताई अपनी परेशानी
सिद्धनडेरा गांव के बच्चों ने कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचकर अपनी समस्या अधिकारियों के सामने रखी। बच्चों का कहना था कि बारिश के मौसम में गांव से स्कूल तक जाने वाला कच्चा रास्ता पूरी तरह कीचड़ और पानी से भर जाता है। इस दौरान कई बच्चे रास्ते में फिसलकर गिर जाते हैं। रास्ते की खराब स्थिति का सीधा असर उनकी पढ़ाई पर पड़ रहा है।
बच्चों ने बताया कि स्कूल जाने के लिए उन्हें इसी रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है। बारिश के दौरान स्थिति इतनी खराब हो जाती है कि कई बार रास्ते से निकलना भी मुश्किल हो जाता है। बच्चों और उनके अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की कि स्कूल तक पहुंचने वाली इस सड़क को जल्द से जल्द पक्का कराया जाए।
छात्राओं ने पूछा- ‘कीचड़ में गिरेंगे तो कैसे पढ़ेंगे?’
कलेक्ट्रेट पहुंची छात्राओं ने भी अपनी परेशानी खुलकर सामने रखी। छात्रा आकांक्षा और चांदनी ने सवाल उठाया कि अगर बेटियां कीचड़ में गिरेंगी तो पढ़ेंगी कैसे? छात्राओं का कहना था कि सरकार बेटियों की शिक्षा को बढ़ावा देने की बात करती है, लेकिन उनके गांव में स्कूल तक जाने के लिए सुरक्षित रास्ता तक उपलब्ध नहीं है।
बच्चों की यह बात प्रशासन के सामने ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं के बीच मौजूद समस्या को सामने रखती है। बच्चों का कहना है कि यदि रास्ता ठीक हो जाए तो बारिश के दिनों में स्कूल पहुंचने में उन्हें इतनी परेशानी नहीं होगी।
डीएम नहीं मिले तो एडीएम ने सुनी बच्चों की बात
बच्चे और उनके अभिभावक अपनी समस्या सीधे जिलाधिकारी के सामने रखना चाहते थे, लेकिन उस समय जिलाधिकारी मौजूद नहीं थे। इसके बाद एडीएम इंद्रानंदन सिंह ने बच्चों और उनके अभिभावकों की बात सुनी। बच्चों की समस्या को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने संबंधित अधिकारियों को मौके पर जाकर स्थिति देखने के निर्देश दिए।
एडीएम के निर्देश पर एसडीएम सदर शिवध्यान पांडे और बेसिक शिक्षा अधिकारी राहुल मिश्रा को गांव भेजा गया। अधिकारियों के गांव पहुंचने से बच्चों और ग्रामीणों को उम्मीद जगी कि उनकी लंबे समय से चली आ रही समस्या पर अब प्रशासन गंभीरता से कार्रवाई करेगा।
बीएसए राहुल मिश्रा ने बच्चे को गोद में उठाया और गांव पहुंचे
बच्चों की समस्या सुनने के बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी राहुल मिश्रा उनके साथ सिद्धनडेरा गांव पहुंचे। इस दौरान उनका संवेदनशील अंदाज भी देखने को मिला। बीएसए राहुल मिश्रा ने एक बच्चे को गोद में उठाया और ग्रामीणों के साथ गांव की ओर रवाना हुए।
गांव पहुंचने के बाद उन्होंने उस रास्ते की वास्तविक स्थिति को करीब से देखा, जिस पर बच्चों को बारिश के दौरान स्कूल जाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। उन्होंने सड़क पर जलभराव और कीचड़ की स्थिति का निरीक्षण किया तथा बच्चों और ग्रामीणों से उनकी परेशानी के बारे में जानकारी ली।
बारिश में 500 मीटर का रास्ता बन जाता है सबसे बड़ी बाधा
सिद्धनडेरा गांव इलाहीपुरा ग्योडी क्षेत्र में आता है। गांव के प्राथमिक और जूनियर स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को इसी कच्चे रास्ते से होकर स्कूल जाना पड़ता है। करीब 500 मीटर का यह रास्ता सामान्य दिनों में भले ही आवागमन का माध्यम हो, लेकिन बारिश के दौरान यही रास्ता बच्चों के लिए बड़ी परेशानी बन जाता है।
बारिश के बाद रास्ते में पानी जमा हो जाता है और चारों तरफ कीचड़ फैल जाता है। ऐसे में छोटे बच्चों के लिए सुरक्षित तरीके से स्कूल पहुंचना चुनौती बन जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि वे कई वर्षों से इस समस्या का सामना कर रहे हैं और अब बच्चों के माध्यम से उनकी समस्या प्रशासन तक पहुंची है।
बीएसए ने कहा- तैयार होगी विस्तृत रिपोर्ट
गांव में सड़क का निरीक्षण करने के बाद बीएसए राहुल मिश्रा ने ग्रामीणों को भरोसा दिया कि पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी जाएगी, ताकि सड़क निर्माण का काम प्राथमिकता के आधार पर शुरू कराने की दिशा में कार्रवाई हो सके।
अधिकारियों के इस आश्वासन के बाद ग्रामीणों को उम्मीद है कि उनकी वर्षों पुरानी समस्या का समाधान हो सकता है। बच्चों की मांग और सड़क की स्थिति देखने के बाद प्रशासन की ओर से आगे की कार्रवाई पर अब गांव के लोगों की नजर है।
एडीएम ने भी दिया त्वरित कार्रवाई का भरोसा
एडीएम इंद्रानंदन सिंह ने भी बच्चों और ग्रामीणों को मामले में त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। कलेक्ट्रेट पहुंचकर अपनी समस्या बताने के बाद बच्चों की बात अधिकारियों तक पहुंची और अधिकारियों ने स्वयं गांव जाकर सड़क की स्थिति देखी।
ग्रामीणों का कहना है कि उनके लिए यह 500 मीटर सड़क केवल आने-जाने का रास्ता नहीं है। बारिश के दिनों में यही रास्ता बच्चों की पढ़ाई में सबसे बड़ी बाधा बन जाता है। पानी और कीचड़ के कारण बच्चों को स्कूल जाने में परेशानी होती है और रास्ते में गिरने का खतरा भी बना रहता है।
करीब 100 बच्चों ने एक साथ उठाई आवाज
सिद्धनडेरा गांव की इस समस्या को लेकर करीब 100 बच्चे अपने अभिभावकों के साथ जिला मुख्यालय पहुंचे। बच्चों ने कलेक्ट्रेट परिसर में अपनी मांग रखी और सड़क बनवाने की अपील की। इतनी संख्या में बच्चों के पहुंचने के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया और संबंधित अधिकारियों को मौके पर भेजा।
बच्चों की उम्र भले ही कम हो, लेकिन उन्होंने अपनी समस्या प्रशासन तक पहुंचाने के लिए जिस तरह आवाज उठाई, उसने गांव की बुनियादी समस्या को सामने ला दिया। बच्चों की मुख्य मांग यही है कि स्कूल तक पहुंचने वाला रास्ता बारिश के दिनों में भी सुरक्षित और सुगम बनाया जाए।
बच्चों को अब सड़क बनने की उम्मीद
अधिकारियों के गांव पहुंचने और सड़क का निरीक्षण करने के बाद सिद्धनडेरा के बच्चों और ग्रामीणों को उम्मीद जगी है कि उनकी समस्या का समाधान होगा। बच्चों का कहना है कि यदि गांव में सड़क बन जाती है तो बारिश के दौरान उन्हें कीचड़ और पानी से होकर स्कूल नहीं जाना पड़ेगा।
बच्चों ने अपनी मांग रखते हुए यह भी कहा कि यदि उनके गांव में सड़क बन गई तो वे देश के मुख्यमंत्री को दिल से धन्यवाद देंगे। फिलहाल ग्रामीणों और बच्चों की नजर प्रशासन की ओर है और उन्हें उम्मीद है कि अधिकारियों के आश्वासन के बाद सड़क निर्माण को लेकर आगे कार्रवाई होगी।
