भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत मिश्रा के लंदन दौरे के दौरान एक कार्यक्रम में उस समय विवाद खड़ा हो गया, जब कुछ लोगों ने उनके संबोधन के दौरान और बाद में नारेबाजी कर कार्यक्रम में व्यवधान डालने की कोशिश की। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद मामले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा बटोर ली है। घटना को लेकर भारतीय उच्चायोग ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम में इस तरह का व्यवहार स्वीकार नहीं किया जा सकता।

AI और अंतरराष्ट्रीय कानून पर था कार्यक्रम

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत मिश्रा लंदन स्थित बर्कबेक, यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन में "आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और अंतरराष्ट्रीय कानून" विषय पर आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे। अपने संबोधन में उन्होंने AI के बढ़ते प्रभाव, न्याय व्यवस्था में इसके उपयोग और भविष्य की चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि AI एक शक्तिशाली तकनीक है, जिसका असर इस बात पर निर्भर करता है कि उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य और किस व्यवस्था के तहत किया जाता है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र, शिक्षाविद, कानूनी विशेषज्ञ और भारतीय समुदाय के लोग भी मौजूद थे।

सवाल-जवाब के दौरान बढ़ा विवाद

भाषण समाप्त होने के बाद जब सवाल-जवाब का सत्र शुरू हुआ, तब एक व्यक्ति ने भारत में असहमति और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा सवाल उठाया। इसी दौरान माहौल थोड़ा तनावपूर्ण हो गया और कुछ लोगों ने नारेबाजी शुरू कर दी। कार्यक्रम संचालक ने चर्चा को मूल विषय तक सीमित रखने की कोशिश की और माहौल शांत कराने का प्रयास किया, लेकिन कुछ देर तक बहस और शोरगुल जारी रहा। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में भी कार्यक्रम के दौरान हुई इस बहस की झलक दिखाई दे रही है।

भारतीय उच्चायोग ने जताई नाराजगी

घटना के बाद भारतीय उच्चायोग ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी राय रखने और असहमति जताने का अधिकार है, लेकिन उसे सम्मानजनक और सभ्य तरीके से व्यक्त किया जाना चाहिए। उच्चायोग ने कहा कि मुख्य न्यायाधीश का व्याख्यान सफलतापूर्वक संपन्न हुआ था और उसके बाद भी अच्छी चर्चा हुई, लेकिन कुछ लोगों ने जानबूझकर कार्यक्रम में बाधा डालने की कोशिश की। बयान में इस तरह की हरकत को सार्वजनिक कार्यक्रमों की गरिमा के खिलाफ बताया गया।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

घटना का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। कुछ लोग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कई लोगों का कहना है कि किसी भी वक्ता को अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिलना चाहिए और विरोध दर्ज कराने के लिए उचित मंच और तरीका अपनाया जाना चाहिए। इस घटना ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि लोकतांत्रिक विरोध और सार्वजनिक कार्यक्रमों की मर्यादा के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।

AI पर CJI का संदेश रहा चर्चा में

विवाद के बावजूद मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत मिश्रा का AI को लेकर दिया गया संदेश भी काफी चर्चा में है। उन्होंने कहा कि तकनीक तेजी से दुनिया को बदल रही है और न्याय व्यवस्था भी इससे अछूती नहीं है। ऐसे में जरूरी है कि AI का उपयोग पारदर्शिता, निष्पक्षता और लोगों के अधिकारों की रक्षा को ध्यान में रखते हुए किया जाए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नई तकनीकों के साथ मजबूत कानूनी और नैतिक ढांचे की भी जरूरत है, ताकि उनका लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंच सके।