बिहार विधान परिषद चुनाव को लेकर NDA के भीतर सियासी हलचल तेज हो गई है। अब सबसे बड़ी चर्चा इस बात की है कि लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) प्रमुख चिराग पासवान द्वारा उम्मीदवार उतारे जाने के बाद राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश का MLC बनना मुश्किल हो सकता है। गठबंधन के भीतर सीटों और उम्मीदवारों को लेकर नए समीकरण बन रहे हैं, जिससे कुशवाहा खेमे की चिंता बढ़ गई है।
चिराग के उम्मीदवार से बदला पूरा गणित
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि उपेंद्र कुशवाहा अपने बेटे दीपक प्रकाश को विधान परिषद भेजने की कोशिश में जुटे थे। लेकिन NDA की ओर से उम्मीदवारों की संख्या बढ़ने और चिराग पासवान की पार्टी द्वारा भी दावेदारी मजबूत किए जाने के बाद समीकरण बदल गए हैं। अब उपलब्ध सीटों और समर्थन के गणित को देखते हुए दीपक प्रकाश की राह पहले जैसी आसान नहीं मानी जा रही है।
BJP के फैसलों ने भी बढ़ाया दबाव
इससे पहले राज्यसभा चुनाव में भी उपेंद्र कुशवाहा को मनचाहा मौका नहीं मिल पाया था। अब MLC चुनाव में BJP की रणनीति ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। पार्टी ने अपने उम्मीदवारों के चयन में संगठनात्मक और जातीय संतुलन को प्राथमिकता दी है, जिससे सहयोगी दलों की दावेदारी सीमित होती
दिखाई दे रही है।
NDA के भीतर बढ़ी अंदरूनी खींचतान
सूत्रों के अनुसार, NDA के कई सहयोगी दल अपने-अपने नेताओं को विधान परिषद भेजने के लिए दबाव बना रहे हैं। ऐसे में अगर चिराग पासवान अपने उम्मीदवार को मैदान में उतारते हैं तो सीटों का गणित और जटिल हो सकता है। इसका सीधा असर उपेंद्र कुशवाहा की राजनीतिक रणनीति पर पड़ सकता है।
दीपक प्रकाश के नाम पर सस्पेंस
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर NDA में अंतिम समय तक सहमति नहीं बनती है तो दीपक प्रकाश का MLC बनना फंस सकता है। यही वजह है कि उपेंद्र कुशवाहा लगातार गठबंधन के शीर्ष नेताओं के संपर्क में बताए जा रहे हैं। उनके लिए यह चुनाव सिर्फ एक सीट का नहीं बल्कि राजनीतिक प्रतिष्ठा का भी सवाल बन गया है।
बिहार की राजनीति में बढ़ा रोमांच
विधान परिषद चुनाव की तारीख नजदीक आते ही NDA के भीतर बैठकों और रणनीतियों का दौर तेज हो गया है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि आखिर गठबंधन अंतिम सूची में किसे मौका देता है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या उपेंद्र कुशवाहा अपने बेटे दीपक प्रकाश को विधान परिषद पहुंचाने में सफल होंगे, या फिर चिराग पासवान के उम्मीदवार की एंट्री उनकी राह का सबसे बड़ा रोड़ा बन जाएगी।
