पटना: भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार पवन सिंह की सक्रिय राजनीति में बड़ी एंट्री हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बिहार विधान परिषद (MLC) द्विवार्षिक चुनाव 2026 के लिए उम्मीदवारों की सूची जारी करते हुए पवन सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया है। पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति द्वारा जारी सूची में उनके अलावा डॉ. संजय मयूख, अनिल कुमार ठाकुर और शीला पंडित के नाम भी शामिल हैं। पवन सिंह को टिकट मिलने के बाद बिहार की राजनीतिक हलचल तेज हो गई है और इसे आगामी विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के बड़े राजनीतिक दांव के रूप में देखा जा रहा है।
भाजपा की ओर से जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार बिहार विधान परिषद के द्विवार्षिक चुनाव 2026 के लिए केंद्रीय चुनाव समिति ने चार नामों को मंजूरी दी है। सूची में सबसे चर्चित नाम भोजपुरी गायक और अभिनेता पवन सिंह का है। इसके अलावा पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और मौजूदा MLC डॉ. संजय मयूख, वरिष्ठ नेता अनिल कुमार ठाकुर और शीला पंडित को भी उम्मीदवार बनाया गया है।
पवन सिंह की उम्मीदवारी क्यों है खास?
पवन सिंह लंबे समय से भोजपुरी सिनेमा का बड़ा चेहरा रहे हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने काराकाट सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़कर सबको चौंका दिया था। हालांकि उन्हें जीत नहीं मिली, लेकिन चुनाव में उनका प्रदर्शन और जनसमर्थन चर्चा का विषय बना रहा। अब भाजपा ने उन्हें विधान परिषद चुनाव में मौका देकर साफ संकेत दिया है कि पार्टी लोकप्रिय चेहरों को अपने साथ जोड़कर राजनीतिक समीकरण मजबूत करना चाहती है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भोजपुरी क्षेत्र में पवन सिंह की लोकप्रियता का लाभ भाजपा आगामी चुनावों में उठाना चाहती है। खासकर युवा और भोजपुरी भाषी मतदाताओं के बीच उनकी मजबूत पकड़ को देखते हुए यह फैसला रणनीतिक माना जा रहा है।
संजय मयूख पर फिर जताया भरोसा
भाजपा ने डॉ. संजय मयूख पर एक बार फिर भरोसा जताया है। वे पिछले दो कार्यकाल से बिहार विधान परिषद के सदस्य रहे हैं और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता के रूप में भी सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। उनके अनुभव को देखते हुए पार्टी ने उन्हें फिर से मौका दिया है।
NDA ने तय किया सीटों का गणित
बिहार विधान परिषद की 10 सीटों पर चुनाव होना है, जिनमें 9 द्विवार्षिक चुनाव और 1 उपचुनाव शामिल है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर सीटों का बंटवारा पहले ही तय हो चुका है। भाजपा और जदयू चार-चार सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि एक सीट चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के हिस्से में गई है।
राजनीतिक संदेश या बड़ा चुनावी दांव?
भाजपा की इस उम्मीदवार सूची को सिर्फ एक औपचारिक चुनावी घोषणा मानना शायद जल्दबाजी होगी। पवन सिंह जैसे लोकप्रिय चेहरे को मैदान में उतारकर पार्टी ने कई राजनीतिक संकेत एक साथ देने की कोशिश की है। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या यह सिर्फ विधान परिषद की सीट का चुनाव है, या फिर 2026 के बिहार विधानसभा चुनाव की बड़ी रणनीति की शुरुआती झलक? राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को भाजपा के उस मास्टरस्ट्रोक के रूप में देखा जा रहा है, जिसके जरिए पार्टी भोजपुरी बेल्ट में अपना प्रभाव और मजबूत करना चाहती है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या पवन सिंह की लोकप्रियता वोटों में तब्दील हो पाएगी, या यह दांव केवल राजनीतिक चर्चा तक ही सीमित रह जाएगा।
