देश में पिछले कुछ वर्षों से प्रतियोगी और बोर्ड परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। कभी पेपर लीक के आरोप, कभी परीक्षा संचालन में गड़बड़ियां और कभी मूल्यांकन प्रक्रिया पर विवाद-इन सबने लाखों छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। अब केंद्र सरकार इन मुद्दों को लेकर गंभीरता दिखाती नजर आ रही है। इसी क्रम में मंगलवार को संसद की शिक्षा, महिला, बाल विकास, युवा एवं खेल संबंधी स्थायी समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित होने जा रही है, जिसमें NEET, NTA और CBSE से जुड़े कई संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा होगी। इस बैठक को केवल एक नियमित समीक्षा बैठक नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे देश की परीक्षा व्यवस्था में भरोसा बहाल करने की दिशा में एक अहम कदम के रूप में देखा जा रहा है। संसदीय समिति ने इस मामले में सीबीएसई के चेयरपर्सन राहुल सिंह और शिक्षा विभाग के सचिव को तलब किया है, ताकि हाल के विवादों और तकनीकी समस्याओं पर विस्तृत जवाब लिया जा सके।

क्यों महत्वपूर्ण है यह बैठक?

पिछले कुछ समय से देश की परीक्षा प्रणाली लगातार चर्चा के केंद्र में रही है। NEET परीक्षा को लेकर पेपर लीक के आरोपों ने राष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ दी थी। वहीं, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठे। इसी बीच CBSE की ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली में तकनीकी गड़बड़ियों की खबरें सामने आने लगीं, जिससे बोर्ड परीक्षा मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गईं। इन घटनाओं ने न केवल छात्रों और अभिभावकों को प्रभावित किया, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े किए। ऐसे में संसदीय समिति का हस्तक्षेप काफी अहम माना जा रहा है।


ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम पर रहेगा विशेष फोकस

बैठक का सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा CBSE की ऑन स्क्रीन मार्किंग प्रणाली होगा। डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और तेज बनाने के उद्देश्य से लागू किया गया यह सिस्टम हाल के दिनों में तकनीकी समस्याओं के कारण विवादों में आ गया। सूत्रों के अनुसार कई परीक्षकों ने शिकायत की थी कि उन्हें पोर्टल पर लॉगिन करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। इसके अलावा उत्तर पुस्तिकाओं के अपलोड होने में देरी, डेटा एक्सेस से जुड़ी दिक्कतें और तकनीकी बाधाओं की वजह से मूल्यांकन कार्य प्रभावित हुआ। संसदीय समिति यह जानना चाहती है कि इन तकनीकी खामियों का 12वीं बोर्ड परीक्षा के परिणामों पर कितना प्रभाव पड़ा और क्या इससे मूल्यांकन की निष्पक्षता या समयबद्धता प्रभावित हुई।


राहुल सिंह और शिक्षा सचिव से क्या पूछे जाएंगे सवाल?

बैठक में सीबीएसई चेयरपर्सन राहुल सिंह से कई महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे जा सकते हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं- ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम में तकनीकी खामियां क्यों आईं? इन समस्याओं को दूर करने के लिए क्या कदम उठाए गए? क्या मूल्यांकन प्रक्रिया प्रभावित हुई? भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या व्यवस्था बनाई गई है? वहीं शिक्षा विभाग के सचिव से प्रशासनिक जवाबदेही, तकनीकी निगरानी और परीक्षा प्रबंधन प्रणाली की मजबूती को लेकर सवाल पूछे जाने की संभावना है।


NEET और NTA पर भी रहेगी नजर

बैठक में केवल CBSE ही नहीं, बल्कि NEET और NTA से जुड़े मुद्दे भी प्रमुखता से उठ सकते हैं। पिछले वर्षों में पेपर लीक और परीक्षा संचालन को लेकर हुए विवादों ने NTA की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा किया था। विशेषज्ञों का मानना है कि समिति यह जानना चाहेगी कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की सुरक्षा बढ़ाने, प्रश्नपत्रों की गोपनीयता बनाए रखने और तकनीकी ढांचे को मजबूत करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।


छात्रों और अभिभावकों की चिंता का विषय

भारत में हर साल करोड़ों छात्र बोर्ड और प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होते हैं। ऐसे में मूल्यांकन प्रक्रिया या परीक्षा संचालन में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी सीधे छात्रों के भविष्य को प्रभावित करती है।नविशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली अच्छी पहल है, लेकिन इसके लिए मजबूत तकनीकी ढांचा और नियमित ऑडिट जरूरी है। यदि तकनीकी खामियां समय रहते दूर नहीं की गईं, तो छात्रों का भरोसा प्रभावित हो सकता है।


क्या निकल सकता है बैठक का परिणाम?

शिक्षा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि बैठक के बाद संसदीय समिति कुछ महत्वपूर्ण सिफारिशें कर सकती है। इनमें- ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम का स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट, परीक्षा पोर्टल की सुरक्षा और क्षमता बढ़ाना, मूल्यांकन प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करना, परीक्षा प्रबंधन के लिए जवाबदेही तय करना, NTA और CBSE की डिजिटल प्रणालियों की नियमित समीक्षा जैसे सुझाव शामिल हो सकते हैं।


परीक्षा व्यवस्था में भरोसा बहाल करने की चुनौती

आज के समय में परीक्षा केवल एक शैक्षणिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि करोड़ों युवाओं के भविष्य का आधार है। ऐसे में पेपर लीक, तकनीकी गड़बड़ियां और मूल्यांकन विवाद केवल प्रशासनिक मुद्दे नहीं, बल्कि सामाजिक और राष्ट्रीय चिंता का विषय बन चुके हैं। इसी कारण संसदीय समिति की यह बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि समिति की समीक्षा के बाद शिक्षा मंत्रालय, CBSE और NTA परीक्षा व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने के लिए कौन-कौन से कदम उठाते हैं।