भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहना (वेंकिता सुब्रमणि मोहना) की सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। इस नियुक्ति के साथ ही वह देश की सर्वोच्च अदालत में सीधे बार से नियुक्त होने वाली दूसरी महिला जज बन जाएंगी। इससे पहले वर्ष 2018 में वरिष्ठ अधिवक्ता इंदु मल्होत्रा ने यह उपलब्धि हासिल की थी। लंबे समय बाद सुप्रीम कोर्ट में किसी महिला न्यायाधीश की नियुक्ति ने न केवल न्यायपालिका में लैंगिक प्रतिनिधित्व को मजबूती दी है, बल्कि यह भी दिखाया है कि अदालत अब अनुभवी वकीलों को सीधे शीर्ष न्यायिक जिम्मेदारी सौंपने के लिए अधिक खुला दृष्टिकोण अपना रही है।
तीन दशक से अधिक लंबा कानूनी सफर, अदालतों में बनाई अलग पहचान
59 वर्षीय वी. मोहना का कानूनी करियर करीब चार दशकों में फैला हुआ है। उन्होंने 1988 में कोयंबटूर लॉ कॉलेज से कानून की पढ़ाई पूरी की और इसके बाद वकालत के क्षेत्र में सक्रिय हो गईं। अपने करियर के दौरान उन्होंने संवैधानिक, नागरिक और सेवा मामलों में विशेषज्ञता हासिल की। वर्ष 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता (Senior Advocate) का दर्जा दिया, जो किसी भी वकील के लिए बड़ी पेशेवर उपलब्धि मानी जाती है। अदालतों में उनकी पहचान एक ऐसी वकील के रूप में रही है जो जटिल और संवेदनशील मामलों में मजबूत कानूनी तर्कों के लिए जानी जाती हैं। यही अनुभव और विशेषज्ञता उन्हें सीधे सुप्रीम कोर्ट की बेंच तक लेकर आई है।
हिजाब विवाद से लेकर महिला सैन्य अधिकारियों के अधिकारों तक, कई अहम मामलों की पैरवी
वी. मोहना उन चुनिंदा वकीलों में शामिल रही हैं जिन्होंने देश के कई चर्चित और संवेदनशील मामलों में अदालत के सामने पक्ष रखा। कर्नाटक के हिजाब विवाद से जुड़े मामलों में उनकी भूमिका चर्चा में रही। इसके अलावा उन्होंने सशस्त्र बलों में महिला अधिकारियों के अधिकारों और सेवा शर्तों से जुड़े मामलों में भी महत्वपूर्ण पैरवी की। वरिष्ठ नागरिकों के संपत्ति अधिकारों जैसे सामाजिक महत्व के मामलों में भी उन्होंने अदालत के सामने प्रभावी तर्क रखे। इन मामलों ने उन्हें केवल एक सफल वकील ही नहीं, बल्कि संवैधानिक मूल्यों और नागरिक अधिकारों की समझ रखने वाली कानूनी विशेषज्ञ के रूप में स्थापित किया। यही कारण है कि उनकी नियुक्ति को न्यायपालिका में विविध अनुभवों को शामिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
महिला प्रतिनिधित्व और न्यायपालिका के लिए क्यों अहम है यह नियुक्ति?
वी. मोहना सुप्रीम कोर्ट के इतिहास की 12वीं महिला न्यायाधीश होंगी। उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब लंबे समय से न्यायपालिका में महिलाओं की संख्या बढ़ाने की मांग उठती रही है। हाल के महीनों में सुप्रीम कोर्ट में केवल जस्टिस बी. वी. नागरत्ना ही महिला जज थीं। अब वी. मोहना के आने से महिला न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर दो हो जाएगी। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि शीर्ष अदालत में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी न्यायिक दृष्टिकोण को अधिक समावेशी बनाने में मदद करेगी। साथ ही यह युवा महिला वकीलों और कानून के छात्रों के लिए प्रेरणा का भी काम करेगी कि शीर्ष न्यायिक पदों तक पहुंचने के अवसर अब पहले से अधिक व्यापक हो रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट के विस्तार के बीच नई नियुक्तियों का दौर
वी. मोहना की नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब केंद्र सरकार ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 34 से बढ़ाकर 38 कर दी है। इसी क्रम में चार अन्य वरिष्ठ न्यायाधीशों-मुंबई हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश शील नागू, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अरुण पल्ली-को भी सर्वोच्च अदालत में पदोन्नत किया गया है। इन नियुक्तियों के बाद सुप्रीम कोर्ट की क्षमता और न्यायिक कार्यक्षमता दोनों में वृद्धि होने की उम्मीद है। वहीं वी. मोहना का सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचना भारतीय न्यायपालिका में प्रतिभा, अनुभव और महिला नेतृत्व के बढ़ते महत्व का एक मजबूत प्रतीक बनकर उभरा है।
