दुनिया के अलग-अलग देशों में जनसंख्या बढ़ने की रफ्तार और परिवार का आकार काफी अलग-अलग होता है। कहीं लोग कम बच्चे पैदा कर रहे हैं, तो कहीं आज भी बड़े परिवार आम बात माने जाते हैं। ऐसे में एक सवाल अक्सर लोगों के मन में आता है कि आखिर दुनिया में किस देश की महिलाएं सबसे ज्यादा बच्चे पैदा करती हैं? इसका जवाब जुड़ा है एक अहम शब्द से फर्टिलिटी रेट (Fertility Rate)।
फर्टिलिटी रेट का मतलब होता है कि एक महिला अपने जीवनकाल में औसतन कितने बच्चों को जन्म देती है। यह किसी देश की जनसंख्या वृद्धि को समझने का अहम पैमाना माना जाता है। अगर किसी देश में फर्टिलिटी रेट 2.1 के आसपास है, तो इसे जनसंख्या को स्थिर बनाए रखने के लिए जरूरी स्तर माना जाता है। लेकिन कई देशों में यह दर इससे काफी ज्यादा या बहुत कम है।

कहां की महिलाएं पैदा करती हैं सबसे ज्यादा बच्चे?
हालिया वैश्विक आंकड़ों के मुताबिक, अफ्रीकी देश नाइजर (Niger) दुनिया में सबसे ज्यादा फर्टिलिटी रेट वाला देश माना जाता है। यहां एक महिला औसतन 6 से 7 बच्चों को जन्म देती है। यानी एक परिवार में कई बच्चों का होना आम बात है।
Niger में लंबे समय से उच्च जन्मदर देखी जाती रही है। इसके पीछे कई सामाजिक और आर्थिक कारण बताए जाते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, यहां कम उम्र में शादी, परिवार नियोजन की सीमित पहुंच, शिक्षा का कम स्तर और ग्रामीण जीवनशैली बड़ी वजहें हैं।
क्यों ज्यादा है फर्टिलिटी रेट?
कुछ देशों में ज्यादा बच्चे पैदा होने के पीछे कई कारण होते हैं:
1. कम उम्र में शादी: कई देशों में लड़कियों की शादी कम उम्र में हो जाती है, जिससे बच्चों की संख्या बढ़ सकती है।
2. शिक्षा की कमी: जहां महिलाओं की शिक्षा का स्तर कम होता है, वहां अक्सर जन्मदर ज्यादा देखी जाती है।
3. स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी: कुछ क्षेत्रों में बच्चों की मृत्यु दर ज्यादा होने के कारण परिवार ज्यादा बच्चे पैदा करना पसंद करते हैं।
4. परिवार नियोजन की सीमित सुविधा: गर्भनिरोधक साधनों तक कम पहुंच भी बड़ी वजह होती है।
कौन से देशों में सबसे कम बच्चे पैदा होते हैं?
दूसरी तरफ कई विकसित देशों में फर्टिलिटी रेट बहुत कम हो चुका है। जैसे South Korea, Japan और कई यूरोपीय देशों में महिलाएं औसतन एक या उससे भी कम बच्चे पैदा कर रही हैं।
इसके पीछे महंगी जीवनशैली, करियर पर फोकस, देर से शादी और बच्चों की परवरिश का बढ़ता खर्च प्रमुख कारण माने जाते हैं। कई देशों की सरकारें अब लोगों को ज्यादा बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहन योजनाएं भी चला रही हैं।
भारत की स्थिति क्या है?
India में भी पिछले कुछ वर्षों में फर्टिलिटी रेट में गिरावट देखी गई है। पहले जहां बड़े परिवार आम थे, वहीं अब शहरीकरण, शिक्षा और जागरूकता बढ़ने के कारण छोटे परिवार का चलन बढ़ा है। कई रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत का फर्टिलिटी रेट अब जनसंख्या स्थिरता के स्तर के करीब पहुंच चुका है।
फर्टिलिटी रेट क्यों है अहम?
फर्टिलिटी रेट सिर्फ बच्चों की संख्या का आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह किसी देश की अर्थव्यवस्था, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य की आबादी से भी जुड़ा होता है। अगर यह बहुत ज्यादा हो, तो संसाधनों पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं अगर बहुत कम हो जाए, तो भविष्य में कामकाजी आबादी घटने का खतरा बढ़ सकता है।
यही वजह है कि दुनियाभर की सरकारें इस आंकड़े पर नजर रखती हैं। कहीं जनसंख्या बढ़ाने की कोशिश हो रही है, तो कहीं इसे नियंत्रित करने पर जोर दिया जा रहा है।
