भोपाल की मॉडल और अभिनेत्री ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला अब देश के सबसे चर्चित मामलों में शामिल हो चुका है। शुरुआत में इसे आत्महत्या बताया गया, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, कई ऐसे सवाल सामने आने लगे जिन्होंने पूरे मामले को रहस्यमय बना दिया। दहेज उत्पीड़न, मानसिक प्रताड़ना, गर्भपात के लिए दबाव, चोटों के निशान, CCTV फुटेज, कॉल रिकॉर्ड और व्हाट्सएप्प चैट इन सबने मामले को और गंभीर बना दिया है। यही वजह है कि अब जांच एजेंसियां केवल बयानों पर नहीं, बल्कि डिजिटल और फॉरेंसिक सबूतों पर ज्यादा भरोसा कर रही हैं।इसी बीच मामले में आरोपी और ट्वीशा की सास गिरिबला सिंह को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जांच से जुड़े सूत्रों और मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि बीमारी और स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर कई सवालों के जवाब टालने की कोशिश की जा रही है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन CBI अब कॉल डिटेल रिकॉर्ड, CCTV डेटा और व्हाट्सएप्प चैट के जरिए घटनाओं की पूरी टाइमलाइन जोड़ने में जुटी है।

डिजिटल सबूतों पर सबसे ज्यादा फोकस

CBI की जांच अब डिजिटल साक्ष्यों पर केंद्रित होती दिख रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक जांच एजेंसी डिलीट किए गए मैसेज, व्हाट्सएप्प चैट, कॉल रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक डेटा की गहन जांच कर रही है। एजेंसी को शक है कि घटना से पहले और बाद की बातचीत कई अहम सवालों के जवाब दे सकती है।मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भी अग्रिम जमानत रद्द करते समय व्हाट्सएप्प चैट, चोटों के निशान और कथित प्रताड़ना से जुड़े आरोपों का उल्लेख किया था। अदालत ने माना कि जांच में सामने आए डिजिटल और फॉरेंसिक तथ्यों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

46 फोन कॉल्स पर उठे सवाल

ट्वीशा शर्मा के परिवार ने दावा किया है कि मौत के बाद गिरिबाला सिंह द्वारा कई प्रभावशाली लोगों, न्यायिक अधिकारियों और CCTV तकनीशियनों से संपर्क किया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक परिवार ने 46 फोन नंबरों को लेकर सवाल उठाए हैं और पूछा है कि घटना के तुरंत बाद CCTV से जुड़े लोगों से संपर्क की जरूरत क्यों पड़ी।परिवार का कहना है कि इन कॉल्स की पूरी जांच होनी चाहिए क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक सबूत इस केस की सबसे अहम कड़ी बन चुके हैं।

CCTV और व्हाट्सएप्प चैट पर विवाद

गिरिबाला सिंह की ओर से अदालत में यह दावा भी किया गया कि CCTV सिस्टम में समय संबंधी गड़बड़ी थी और कुछ व्हाट्सएप्प चैट को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया। वहीं जांच एजेंसियों और राज्य सरकार की ओर से अदालत में कहा गया कि सबूतों से छेड़छाड़ और जांच को प्रभावित करने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।यही वजह है कि अब CBI केवल मौखिक बयानों पर निर्भर रहने के बजाय डिजिटल रिकॉर्ड्स की वैज्ञानिक जांच कर रही है।

CBI की जांच किस दिशा में बढ़ रही है?

रिपोर्ट्स के अनुसार CBI घटनास्थल की डिजिटल रीक्रिएशन, अंतिम घंटों की गतिविधियों और इलेक्ट्रॉनिक डेटा की मदद से यह समझने की कोशिश कर रही है कि ट्वीशा शर्मा की मौत से पहले वास्तव में क्या हुआ था। जांच एजेंसी ने कथित तौर पर कई लोगों के बयान दर्ज किए हैं और तकनीकी सबूतों को केस की मुख्य कड़ी माना जा रहा है।