हम अक्सर देखते हैं कि कुछ लोग बेहद शांत स्वभाव के होते हैं, जबकि कुछ लोगों को छोटी-छोटी बातों पर भी बहुत जल्दी और तेज गुस्सा आ जाता है। क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों होता है? गुस्सा केवल एक भावना नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध हमारे दिमाग और शरीर की कार्यप्रणाली से होता है। जब किसी व्यक्ति को गुस्सा आता है, तो उसके शरीर के भीतर कई तरह के जैविक बदलाव शुरू हो जाते हैं। आइए जानते हैं कि बार-बार और ज्यादा गुस्सा आने के पीछे का वैज्ञानिक कारण क्या है।

दिमाग का यह छोटा सा हिस्सा हो सकता है वजह

हमारे दिमाग में एमिग्डाला (Amygdala) नाम का एक छोटा सा हिस्सा होता है, जिसे शरीर का “खतरे का अलार्म” भी कहा जाता है। जब कोई बात हमें बुरी लगती है या हम किसी स्थिति को खतरे के रूप में महसूस करते हैं, तो यह हिस्सा तुरंत सक्रिय हो जाता है। जिन लोगों को अधिक गुस्सा आता है, उनमें एमिग्डाला अपेक्षाकृत ज्यादा सक्रिय हो सकता है। यह दिमाग के सोचने-समझने और निर्णय लेने वाले हिस्से की कार्यक्षमता को कुछ समय के लिए प्रभावित कर देता है, जिससे व्यक्ति बिना ज्यादा सोचे-समझे प्रतिक्रिया दे सकता है।

गुस्सा आते ही शरीर में क्या बदलाव होते हैं?

जैसे ही एमिग्डाला सक्रिय होता है, शरीर में एड्रेनालिन और कोर्टिसोल जैसे तनाव (Stress) से जुड़े हार्मोन रिलीज होने लगते हैं

इसके परिणामस्वरूप शरीर में कई बदलाव दिखाई देते हैं:

दिल की धड़कन तेज हो जाती है।

ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है।

मांसपेशियों में तनाव महसूस होने लगता है।

सांसें तेज और उथली हो सकती हैं।

चेहरे और हाथों में रक्त प्रवाह बढ़ने से चेहरा लाल पड़ सकता है।

क्या ज्यादा गुस्सा किसी बीमारी का संकेत हो सकता है?

बार-बार और अत्यधिक गुस्सा करना स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकता है। लंबे समय तक तनाव और गुस्से की स्थिति में रहने से हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, नींद की समस्या और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों का खतरा बढ़ सकता है। कुछ मामलों में तनाव, चिंता, अवसाद (डिप्रेशन) या पर्याप्त नींद न मिलने की वजह से भी व्यक्ति अधिक चिड़चिड़ा या गुस्सैल हो सकता है।

गुस्से को नियंत्रित कैसे करें?

गुस्से को नियंत्रित करना संभव है और इसके लिए

कुछ आसान उपाय मददगार साबित हो सकते हैं:

गुस्सा आने पर गहरी और लंबी सांस लें।

1 से 10 तक उल्टी गिनती गिनें।

कुछ समय के लिए उस स्थिति या जगह से दूर हो जाएं।

ठंडा पानी पिएं।

नियमित रूप से योग और ध्यान करें।

पर्याप्त नींद लें और तनाव कम करने वाली गतिविधियों को अपनी दिनचर्या में शामिल करें।

विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित योग, मेडिटेशन और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने से दिमाग शांत रहता है और भावनाओं को बेहतर तरीके से नियंत्रित करने में मदद मिलती है।