उत्तर कोरिया ने एक बार फिर दुनिया को साफ संकेत दे दिया है कि वह अपनी सैन्य और परमाणु ताकत को कम करने के बजाय और अधिक मजबूत बनाने की राह पर आगे बढ़ रहा है। ऐसे समय में जब अमेरिका, दक्षिण कोरिया और पश्चिमी देश लगातार प्योंगयांग पर परमाणु कार्यक्रम रोकने का दबाव बना रहे हैं, उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन ने मिसाइल उत्पादन केंद्र का दौरा कर अपनी सैन्य प्राथमिकताओं को दुनिया के सामने रख दिया है। इसके साथ ही उनकी बहन और देश की सबसे प्रभावशाली राजनीतिक हस्तियों में शामिल किम यो जोंग ने भी दोटूक शब्दों में कह दिया कि उत्तर कोरिया अपने परमाणु हथियारों को खत्म करने पर कोई चर्चा नहीं करेगा। दोनों घटनाओं ने मिलकर यह संकेत दिया है कि प्योंगयांग आने वाले वर्षों में अपनी सैन्य रणनीति को और आक्रामक बनाने की तैयारी कर रहा है।
मिसाइल फैक्ट्री में किम का दौरा क्यों है अहम?
उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी केसीएनए द्वारा जारी तस्वीरों में किम जोंग उन अधिकारियों और इंजीनियरों के साथ एक बड़े मिसाइल उत्पादन केंद्र का निरीक्षण करते दिखाई दिए। तस्वीरों में उनके आसपास विशाल मिसाइलें और सैन्य उपकरण नजर आए। हालांकि सुरक्षा कारणों से फैक्ट्री का नाम और स्थान सार्वजनिक नहीं किया गया, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल एक औपचारिक दौरा नहीं था, बल्कि दुनिया को दिया गया एक रणनीतिक संदेश था। ऐसे समय में जब उत्तर कोरिया पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लागू हैं, किम का सार्वजनिक रूप से मिसाइल उत्पादन केंद्र का दौरा यह दिखाता है कि उनकी सरकार रक्षा उत्पादन को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।
मिसाइल उत्पादन ढाई गुना बढ़ाने का आदेश
दौरे के दौरान किम जोंग उन ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि देश की मिसाइल निर्माण क्षमता में बड़े पैमाने पर वृद्धि की जाए। उन्होंने मौजूदा पंचवर्षीय रक्षा योजना की समीक्षा करते हुए कहा कि सेना की जरूरतों को पूरा करने के लिए मिसाइल उत्पादन को मौजूदा स्तर से लगभग ढाई गुना तक बढ़ाना होगा। यह आदेश केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उत्तर कोरिया की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है जिसके तहत वह अपने पारंपरिक और परमाणु हथियारों से लैस मिसाइल बेड़े को लगातार विस्तार देना चाहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह लक्ष्य हासिल होता है तो उत्तर कोरिया की सैन्य क्षमता पहले से कहीं अधिक मजबूत हो सकती है।
बहन का बयान और परमाणु नीति का भविष्य
मिसाइल फैक्ट्री की तस्वीरें सामने आने के कुछ ही समय बाद किम जोंग उन की बहन किम यो जोंग का बयान भी सुर्खियों में आ गया। उन्होंने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की उस मांग को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिसमें उत्तर कोरिया से परमाणु हथियार कार्यक्रम खत्म करने की बात कही जाती है। किम यो जोंग ने कहा कि उत्तर कोरिया अब एक स्थापित परमाणु शक्ति है और इस वास्तविकता को बदलने का कोई सवाल ही नहीं उठता। उनका यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि उत्तर कोरिया की आधिकारिक नीति और रणनीतिक सोच को दुनिया तक पहुंचाने में किम यो जोंग की बड़ी भूमिका मानी जाती है। उनके बयान ने यह स्पष्ट कर दिया कि प्योंगयांग भविष्य में भी परमाणु हथियारों को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा का सबसे अहम आधार मानता रहेगा।
अमेरिका और पश्चिमी देशों के लिए क्या संदेश?
पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन परमाणु निरस्त्रीकरण को लेकर कोई ठोस समझौता नहीं हो सका। अब किम यो जोंग के बयान और किम जोंग उन के सैन्य गतिविधियों में बढ़ती दिलचस्पी को देखकर यह माना जा रहा है कि उत्तर कोरिया बातचीत की बजाय ताकत के प्रदर्शन पर अधिक भरोसा कर रहा है। राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार यह संदेश केवल अमेरिका के लिए नहीं, बल्कि दक्षिण कोरिया, जापान और पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र के लिए भी है। उत्तर कोरिया यह दिखाना चाहता है कि वह किसी भी दबाव या प्रतिबंध के बावजूद अपनी सैन्य क्षमताओं को कमजोर नहीं होने देगा।
शी जिनपिंग के दौरे से पहले बढ़ी हलचल
इस पूरे घटनाक्रम को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के संभावित उत्तर कोरिया दौरे के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। वर्ष 2019 के बाद शी जिनपिंग पहली बार प्योंगयांग जाने वाले हैं और यह यात्रा दोनों देशों के रिश्तों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। चीन लंबे समय से उत्तर कोरिया का सबसे बड़ा आर्थिक और राजनीतिक सहयोगी रहा है। ऐसे में शी जिनपिंग की यात्रा से ठीक पहले उत्तर कोरिया द्वारा अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन कई संकेत देता है। विश्लेषकों का मानना है कि प्योंगयांग दुनिया को यह दिखाना चाहता है कि वह चीन के साथ अपने रिश्तों को मजबूत रखते हुए भी अपनी स्वतंत्र सैन्य नीति पर कायम है।
दुनिया के लिए बढ़ती चिंता
उत्तर कोरिया के हालिया कदमों ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। मिसाइल उत्पादन बढ़ाने की योजना, परमाणु हथियारों पर अडिग रुख और लगातार सैन्य शक्ति का प्रदर्शन यह संकेत देता है कि आने वाले समय में कोरियाई प्रायद्वीप और पूर्वी एशिया में तनाव और बढ़ सकता है। फिलहाल दुनिया की निगाहें प्योंगयांग और बीजिंग के बीच होने वाली संभावित बातचीत पर टिकी हैं, लेकिन किम जोंग उन और उनकी बहन के हालिया संदेशों ने इतना तो साफ कर दिया है कि उत्तर कोरिया अपनी परमाणु और मिसाइल नीति में पीछे हटने के मूड में बिल्कुल नहीं है।
