बिहार की राजनीति में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। पटना के 10, सर्कुलर रोड स्थित उस सरकारी आवास के बाहर, जहां कभी सत्ता के फैसले लिए जाते थे, अब पार्टी कार्यकर्ता खुद सुरक्षा प्रहरी की भूमिका में दिखाई दे रहे हैं। लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी के आवास से सुरक्षाकर्मियों की वापसी के बाद राष्ट्रीय जनता दल ने इसे सिर्फ प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश के रूप में देखा है। यही वजह है कि आवास के बाहर कार्यकर्ताओं की भीड़ जुटने लगी है और पार्टी नेतृत्व इसे सम्मान, सुरक्षा और राजनीतिक संघर्ष से जोड़कर पेश कर रहा है।
पहरे पर पार्टी, जिम्मेदारी अपने हाथ में
सुरक्षा हटने की खबर सामने आते ही आरजेडी कार्यकर्ताओं ने इंतजार करने के बजाय खुद मोर्चा संभाल लिया। शनिवार शाम से ही कार्यकर्ताओं ने आवास के बाहर डेरा डालना शुरू कर दिया। किसी ने गेट की निगरानी संभाली, तो किसी ने आने-जाने वालों पर नजर रखने की जिम्मेदारी ली। पार्टी नेताओं के मुताबिक कार्यकर्ताओं को अलग-अलग शिफ्ट में तैनात किया गया है ताकि दिन-रात निगरानी जारी रहे। यह दृश्य किसी राजनीतिक कार्यक्रम से ज्यादा एक ऐसे अभियान जैसा दिखाई दे रहा है, जिसमें समर्थक अपने नेता की सुरक्षा को अपनी जिम्मेदारी मानकर मैदान में उतर आए हों। आवास के बाहर लगातार जुटे कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब तक सुरक्षा बहाल नहीं होती, उनका पहरा जारी रहेगा।
राजनीतिक आरोपों से गरमाया माहौल
आरजेडी इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक प्रतिशोध से जोड़कर देख रही है। पार्टी नेताओं का आरोप है कि सरकार ने जानबूझकर लालू परिवार की सुरक्षा कम की है। उनका कहना है कि जिन नेताओं की राजनीतिक और सामाजिक हैसियत राज्य स्तर पर महत्वपूर्ण है, उनकी सुरक्षा व्यवस्था को अचानक बदलना सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं माना जा सकता। दूसरी तरफ सत्ता पक्ष की ओर से इसे नियमों और सुरक्षा समीक्षा की प्रक्रिया का हिस्सा बताया जा रहा है। हालांकि इस बहस ने बिहार की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है, जहां सुरक्षा का मुद्दा अब सीधे राजनीतिक टकराव में बदलता दिखाई दे रहा है।
लालू यादव की वापसी पर टिकी सबकी नजर
इस पूरे घटनाक्रम के बीच आरजेडी कार्यकर्ताओं की नजर अब लालू प्रसाद यादव की वापसी पर टिकी हुई है। स्वास्थ्य जांच और इलाज के सिलसिले में विदेश यात्रा से लौटने के बाद उनके पटना आने की चर्चा ने पार्टी कार्यकर्ताओं के उत्साह को और बढ़ा दिया है। माना जा रहा है कि पटना पहुंचने के बाद लालू यादव इस मुद्दे पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया दे सकते हैं। पार्टी के भीतर भी यह चर्चा तेज है कि सुरक्षा विवाद को लेकर कोई बड़ा राजनीतिक अभियान शुरू किया जा सकता है। यही कारण है कि पटना एयरपोर्ट से लेकर राबड़ी आवास तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए हैं।
10 सर्कुलर रोड का राजनीतिक महत्व
राबड़ी देवी का आवास केवल एक सरकारी बंगला नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति का एक अहम प्रतीक भी है। यही वह पता है जहां से वर्षों तक लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की राजनीति संचालित होती रही। महागठबंधन की बैठकों से लेकर विपक्षी रणनीतियों तक, इस आवास ने कई महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाओं को देखा है। ऐसे में यहां से सुरक्षा कर्मियों की वापसी ने इस मुद्दे को और संवेदनशील बना दिया है। आरजेडी समर्थक इसे सिर्फ सुरक्षा में कटौती नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संकेत के रूप में देख रहे हैं।
चुनावी मौसम से पहले बढ़ी सियासी हलचल
बिहार में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच यह विवाद और भी अहम हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सुरक्षा का यह मुद्दा आने वाले दिनों में विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच बड़े टकराव का कारण बन सकता है। आरजेडी इसे अपने समर्थकों को एकजुट करने और राजनीतिक संदेश देने के अवसर के रूप में देख रही है, जबकि सरकार प्रशासनिक प्रक्रिया की दलील दे रही है। फिलहाल पटना के 10, सर्कुलर रोड पर सुरक्षा कर्मियों की जगह पार्टी कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ने यह साफ कर दिया है कि बिहार की राजनीति में यह विवाद अभी लंबा चलने वाला है।
