पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस वक्त सनसनी फैल गई जब भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की देर रात गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह हमला सिर्फ एक आपराधिक वारदात नहीं माना जा रहा, बल्कि इसके पीछे सुनियोजित साजिश और राजनीतिक संदेश की भी आशंका जताई जा रही है। अब इस मामले में पुलिस को पहली बड़ी सफलता मिली है। जांच एजेंसियों ने एक स्थानीय हिस्ट्रीशीटर को गिरफ्तार किया है, जिससे लगातार पूछताछ की जा रही है। शुरुआती जांच में कई ऐसे संकेत मिले हैं, जिन्होंने इस हत्याकांड को और ज्यादा गंभीर बना दिया है।

देर रात पीछा, फिर गोलियों की बौछार
पुलिस जांच के मुताबिक चंद्रनाथ रथ अपनी कार से लौट रहे थे, तभी एक संदिग्ध गाड़ी काफी देर से उनका पीछा कर रही थी। जैसे ही सुनसान रास्ता मिला, हमलावरों ने उनकी कार को रोक लिया और बेहद करीब से ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं। हमला इतना तेज और योजनाबद्ध था कि चंद्रनाथ रथ को संभलने तक का मौका नहीं मिला। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। पुलिस का मानना है कि पूरी घटना पेशेवर तरीके से अंजाम दी गई और हमलावर पहले से हर गतिविधि पर नजर रखे हुए थे।
फर्जी नंबर प्लेट और लंबी रेकी ने बढ़ाया शक
जांच में सामने आया है कि हमलावरों ने पहचान छिपाने के लिए फर्जी नंबर प्लेट वाली गाड़ियों का इस्तेमाल किया। पुलिस को ऐसे संकेत भी मिले हैं कि वारदात से पहले कई दिनों तक चंद्रनाथ रथ की रेकी की गई थी। किस रास्ते से वे आते-जाते हैं, किस समय निकलते हैं और सुरक्षा व्यवस्था कैसी रहती है—इन सभी चीजों की पहले से जानकारी जुटाई गई थी। यही वजह है कि जांच एजेंसियां इसे साधारण हत्या नहीं बल्कि “सुपारी किलिंग” के एंगल से भी देख रही है।

पहली गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा बढ़ा
पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया आरोपी इलाके का पुराना हिस्ट्रीशीटर बताया जा रहा है। अधिकारियों का दावा है कि उसके कई आपराधिक गिरोहों से संबंध रहे हैं। फिलहाल उससे पूछताछ के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि हत्या के पीछे सिर्फ आपराधिक कारण थे या फिर इसके तार किसी बड़े नेटवर्क से जुड़े हैं। हालांकि पुलिस ने साफ किया है कि मुख्य हमलावर और कथित मास्टरमाइंड अभी फरार हैं और उनकी तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है।
बंगाल की राजनीति में फिर बढ़ा तनाव
इस हत्याकांड के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। भारतीय जनता पार्टी ने इसे “टारगेट किलिंग” करार देते हुए राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। वहीं तृणमूल कांग्रेस ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है और राजनीतिक आरोपों से बचने की बात कही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच पहले से चल रहे तीखे टकराव के बीच यह मामला आने वाले दिनों में और बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। फिलहाल सबकी नजर पुलिस जांच पर टिकी है, क्योंकि इस हत्याकांड के पीछे की असली साजिश क्या है, इसका जवाब अभी पूरी तरह सामने आना बाकी है।
