सीतापुर में कांग्रेस सांसद राकेश राठौर का आमरण अनशन आखिरकार करीब 17 घंटे बाद समाप्त हो गया। सोमवार दोपहर अपर पुलिस अधीक्षक समेत वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में यह अनशन खत्म कराया गया। बताया जा रहा है कि बातचीत के दौरान प्रशासन ने पूरे घटनाक्रम में अपनी गलती स्वीकार की और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न होने का भरोसा दिया, जिसके बाद सांसद ने अनशन तोड़ने का निर्णय लिया।

पूरा विवाद उस वक्त शुरू हुआ जब सांसद को उनके ही आवास पर बिना किसी लिखित नोटिस और स्पष्ट कारण बताए रोक दिया गया। सांसद का आरोप है कि यह उनके संवैधानिक अधिकारों और एक जनप्रतिनिधि के विशेषाधिकारों का खुला उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि उन्हें न केवल घर से बाहर जाने से रोका गया, बल्कि उनके जनसंपर्क और जनता से जुड़े कर्तव्यों के निर्वहन में भी बाधा डाली गई, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है।

जानकारी के मुताबिक, सांसद अपने एक रिश्तेदार के यहां जाने के लिए घर से निकल रहे थे, तभी पुलिस ने खुफिया इनपुट का हवाला देते हुए उन्हें बाहर ही रोक दिया। इसी दौरान पुलिस और सांसद के बीच तीखी बहस हो गई। सांसद ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके साथ धक्का-मुक्की की, जिससे वे काफी नाराज़ हो गए। उन्होंने सवाल उठाया कि एक जनप्रतिनिधि के साथ इस तरह का व्यवहार कैसे किया जा सकता है।

इस घटना से आहत होकर राकेश राठौर अपने ही घर के बाहर धरने पर बैठ गए और आमरण अनशन शुरू कर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें शुगर (डायबिटीज) की बीमारी है और अगर उनके साथ कोई अनहोनी होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन की होगी। इस बयान के बाद मामला और गंभीर हो गया और मौके पर तनाव का माहौल बन गया।

दरअसल, पुलिस को खुफिया विभाग से यह इनपुट मिला था कि सांसद गाजीपुर के एक गांव में जाने वाले हैं, जहां विश्वकर्मा समाज की एक नाबालिग लड़की की संदिग्ध मौत का मामला सामने आया है। सांसद वहां पीड़ित परिवार को सांत्वना देने जाना चाहते थे। हालांकि, पुलिस का कहना था कि इस दौरे से कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है, इसलिए एहतियात के तौर पर उन्हें रोका गया। वहीं सांसद का दावा था कि वे महोली में एक मांगलिक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे और उन्हें बेवजह रोका गया।

अनशन के दौरान सीतापुर में राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई। बड़ी संख्या में समर्थक सांसद के आवास के बाहर जुट गए और नारेबाजी करने लगे। स्थिति को देखते हुए कई थानों की पुलिस और पीएसी बल तैनात किया गया, ताकि हालात काबू में रहें। देर रात तक प्रशासनिक अधिकारी लगातार सांसद को मनाने और समाधान निकालने की कोशिश करते रहे।

आखिरकार अपर पुलिस अधीक्षक, नगर मजिस्ट्रेट, एसडीएम सदर, सीओ सिटी समेत कई अधिकारियों और कांग्रेस नेताओं के बीच बैठक हुई। इस बातचीत में पूरे घटनाक्रम पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रशासन ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए आश्वासन दिया कि भविष्य में बिना कारण इस तरह की कार्रवाई नहीं की जाएगी।

इसके बाद राकेश राठौर ने अपना आमरण अनशन समाप्त कर दिया। इस दौरान मौके पर कई स्थानीय नेता और सैकड़ों समर्थक मौजूद रहे, जो पूरे घटनाक्रम के गवाह बने।

इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि गाजीपुर में हुई नाबालिग लड़की की संदिग्ध मौत से भी जुड़ी हुई है, जिसने पहले ही प्रदेश की राजनीति को गर्म कर रखा है। इसी संभावित दौरे को लेकर पुलिस सतर्क थी और यही इस विवाद की बड़ी वजह बनी।