बिहार में शराबबंदी को लेकर सियासी घमासान एक बार फिर तेज हो गया है। राज्य के वरिष्ठ नेता जीतन राम मांझी ने एक बार फिर अपनी ही सरकार की नीति पर सवाल खड़े किए हैं। मांझी ने आरोप लगाया है कि शराबबंदी कानून का सबसे ज्यादा खामियाजा गरीब और कमजोर वर्ग के लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
उनका कहना है कि कानून का पालन कराने के नाम पर प्रशासनिक कार्रवाई में असमानता देखी जा रही है। छोटे और गरीब लोगों को आसानी से पकड़ लिया जाता है, जबकि बड़े स्तर पर शराब के कारोबार में शामिल लोग अक्सर बच निकलते हैं। मांझी ने इस स्थिति को अन्यायपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे समाज में असंतोष बढ़ रहा है।

उन्होंने सरकार से अपील की कि शराबबंदी कानून की समीक्षा की जाए और इसे लागू करने के तरीके में सुधार लाया जाए, ताकि निर्दोष लोगों को परेशान न होना पड़े। मांझी का यह बयान ऐसे समय आया है जब राज्य में शराबबंदी को लेकर लगातार बहस चल रही है और विपक्ष भी इस मुद्दे पर सरकार को घेर रहा है।
बिहार में लागू शराबबंदी कानून को लेकर पहले भी कई बार सवाल उठते रहे हैं। जहां एक तरफ सरकार इसे सामाजिक सुधार का बड़ा कदम बताती है, वहीं दूसरी तरफ इसके क्रियान्वयन को लेकर आलोचनाएं भी सामने आती रहती हैं। मांझी के ताजा बयान ने इस बहस को एक बार फिर हवा दे दी है।
