सऊदी अरब की राजधानी रियाद में पिछले करीब 8 वर्षों से बेहद कठिन हालात में जीवन बिता रहे भारतीय नागरिक इज़हार अंसारी के लिए आखिरकार राहत की खबर सामने आई है। समाजसेवी रफीक अहमद और उनके साथियों की लगातार कोशिशों के चलते अब इज़हार की भारत वापसी का रास्ता साफ हो गया है।


बिहार के गोपालगंज जिले के रहने वाले इज़हार अंसारी वर्ष 2020 में एक गंभीर सड़क दुर्घटना का शिकार हो गए थे। इस हादसे में उनके दोनों पैर टूट गए और कूल्हे में गंभीर चोट आई। डॉक्टरों को उनके एक पैर में लोहे की रॉड डालनी पड़ी। Dallah Hospital की रिपोर्ट के मुताबिक उन्हें लंबे समय तक इलाज और पूरी तरह बेड रेस्ट की जरूरत थी। इस दौरान वे शारीरिक दर्द के साथ-साथ मानसिक तनाव से भी जूझते रहे।


दुर्घटना के बाद वे काम करने में असमर्थ हो गए। इसी बीच उनके स्पॉन्सर का निधन हो गया, जिससे उनका इकामा रिन्यू नहीं हो सका और वे अवैध स्थिति में आ गए। इलाज का कुल खर्च करीब 1.80 लाख सऊदी रियाल तक पहुंच गया, जिसमें से 1.20 लाख रियाल समाजसेवियों की मदद से माफ कराया गया, लेकिन करीब 60 हजार रियाल का बकाया उनके लिए बड़ी समस्या बना रहा। यही बकाया उनके भारत लौटने में सबसे बड़ी बाधा था।


इस कठिन दौर में इज़हार को मजबूरी में भीख मांगकर गुजारा करना पड़ा। भारत में उनकी दो बेटियां हैं, जिनसे वे 8 वर्षों से मिल नहीं पाए। जब वे सऊदी अरब गए थे, तब उनकी एक बेटी मात्र 2 साल की थी।


मामले ने तब नया मोड़ लिया जब समाजसेवी रफीक अहमद ने सोशल मीडिया पर इज़हार की मदद के लिए अपील की। करीब एक लाख फॉलोअर्स वाले उनके प्लेटफॉर्म पर की गई इस अपील का व्यापक असर हुआ और कुछ ही दिनों में लोगों ने बढ़-चढ़कर आर्थिक मदद की। कई लोगों ने बिना नाम उजागर किए निस्वार्थ भाव से सहयोग किया, जो इंसानियत की मिसाल बन गया।


रफीक अहमद ने न सिर्फ सोशल मीडिया पर अपील की, बल्कि खुद रियाद जाकर इज़हार से मुलाकात की और उनके सभी मेडिकल दस्तावेजों की जांच की। उन्होंने स्थानीय प्रशासन, सामाजिक कार्यकर्ताओं, कानूनी विशेषज्ञों और NGOs से समन्वय स्थापित कर इस मामले को सुलझाने में अहम भूमिका निभाई।


रफीक अहमद ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “मुझे खुशी है कि मेरी अपील पर लोगों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। इससे साबित होता है कि विदेश में रह रहा भारतीय समुदाय मुश्किल में फंसे अपने लोगों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहता है।”


उन्होंने बताया कि शिहाब, डॉ. इदरीस और कई उदार दानदाताओं के संयुक्त प्रयास से इज़हार अंसारी को ‘व्हाइट पासपोर्ट’ (इमरजेंसी सर्टिफिकेट) मिल गया है, जिसके जरिए वे जल्द ही भारत लौट सकेंगे।


रफीक अहमद की इस पहल ने न केवल एक जरूरतमंद शख्स की जिंदगी में बड़ा बदलाव लाया है, बल्कि समाज में इंसानियत और सामाजिक जिम्मेदारी की एक मजबूत मिसाल भी पेश की है। उनकी इस मुहिम की हर ओर खूब चर्चा हो रही है और लोग उनकी मेहनत, संवेदनशीलता और जमीनी स्तर पर की गई सक्रियता की सराहना कर रहे हैं।


इज़हार अंसारी की यह कहानी सिर्फ एक व्यक्ति के संघर्ष और राहत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामूहिक प्रयास, एकजुटता और समाजसेवा की ताकत को भी उजागर करती है, जिसे आम लोग अब प्रेरणा के तौर पर देख रहे हैं।