
नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी को बड़ा राजनीतिक झटका देते हुए उसके सात राज्यसभा सांसद भाजपा में शामिल हो गए। राघव चड्ढा और छह अन्य सांसदों ने पार्टी छोड़ने का फैसला ऐसे समय में लिया है जब कुछ दिन पहले ही वरिष्ठ आप नेताओं के साथ सार्वजनिक मतभेद सामने आए थे। इस घटनाक्रम ने राष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज कर दी है।
राघव चड्ढा के अलावा भाजपा में शामिल होने वाले सांसदों में संदीप पाठक, अशोक कुमार मित्तल, हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता, विक्रमजीत सिंह साहनी और स्वाति मालीवाल शामिल हैं। स्वाति मालीवाल को छोड़कर बाकी सभी सांसद पंजाब से हैं। स्वाति मालीवाल वर्ष 2024 से ही आम आदमी पार्टी नेतृत्व के साथ सार्वजनिक मतभेदों को लेकर चर्चा में थीं, हालांकि राज्यसभा सदस्यता बनाए रखने के कारण वह पार्टी में बनी हुई थीं।
दिलचस्प बात यह है कि इन सांसदों की राज्यसभा सदस्यता पर दल-बदल कानून के तहत तत्काल कोई खतरा नहीं माना जा रहा है। संविधान की दसवीं अनुसूची के अनुसार यदि किसी दल के दो-तिहाई विधायक या सांसद किसी अन्य दल में विलय के पक्ष में हों, तो उन्हें दल-बदल कानून के तहत अयोग्यता से छूट मिल सकती है।
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा में कुल 10 सांसद थे और पार्टी छोड़ने वाले सात सांसद कुल संख्या के दो-तिहाई के बराबर हैं। ऐसे में यह तर्क दिया जा रहा है कि ये सांसद भाजपा में विलय कर सकते हैं और उनकी राज्यसभा सदस्यता बनी रह सकती है।
राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर कहा, “हम, राज्यसभा में आम आदमी पार्टी से संबंधित दो-तिहाई सांसद, भारतीय संविधान के प्रावधानों का उपयोग करते हुए भारतीय जनता पार्टी में विलय करेंगे।” इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाएं और तेज हो गईं।
आम आदमी पार्टी के कौन से सांसद बचे
इस घटनाक्रम के बाद राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के पास केवल तीन सांसद बचे हैं—संजय सिंह, एन.डी. गुप्ता और बलबीर सिंह सीचेवाल। पंजाब से अब बलबीर सिंह सीचेवाल पार्टी के एकमात्र राज्यसभा सांसद रह गए हैं।
आप और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज
आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भाजपा ने एक बार फिर पंजाबियों के साथ विश्वासघात किया है। वहीं संजय सिंह ने इसे ‘ऑपरेशन लोटस’ का हिस्सा बताते हुए आरोप लगाया कि यह भाजपा की रणनीति के तहत हुआ है। उन्होंने कहा कि पंजाब की जनता पार्टी छोड़ने वाले सात सांसदों को माफ नहीं करेगी।
दूसरी ओर भाजपा ने आम आदमी पार्टी पर तीखा हमला बोला। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा कि आम आदमी पार्टी अब “भ्रष्टाचार का अड्डा” बन चुकी है। उन्होंने कहा कि जो पार्टी कभी खुद को अलग और ईमानदार राजनीति का प्रतीक बताती थी, आज उस पर कोई भरोसा नहीं करता।
सात सांसदों के इस घटनाक्रम ने न केवल आम आदमी पार्टी की संसदीय स्थिति को प्रभावित किया है, बल्कि दल-बदल कानून, राजनीतिक नैतिकता और विपक्षी राजनीति को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है।
