तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने महिला आरक्षण बिल लोकसभा में पास न होने पर केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला किया है। उन्होंने कहा कि संसद में जो हुआ वह सिर्फ राजनीतिक हार नहीं, बल्कि महिलाओं के अधिकारों पर BJP की नीयत की हार है।
नई दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए रेवंत रेड्डी ने कहा कि इस देश में महिलाओं को मतदान का अधिकार कांग्रेस ने दिया था और पार्टी ने महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए लगातार कदम उठाए हैं। उनके अनुसार, BJP का रिकॉर्ड देखें तो महिलाओं को नेतृत्व के शीर्ष पदों पर बहुत कम मौके मिले हैं।
रेवंत रेड्डी ने कहा कि BJP की स्थापना 1980 में हुई थी और लगभग 50 साल बीतने वाले हैं, लेकिन पार्टी ने अब तक 15 बार अध्यक्ष बनाए, जिनमें से एक भी महिला नहीं थी। उन्होंने यह भी कहा कि लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी जैसे नेताओं को कई बार मौका मिला, लेकिन महिलाओं को कभी शीर्ष नेतृत्व में जगह नहीं मिली। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पार्टी में जनरल सेक्रेटरी (ऑर्गेनाइजेशन) जैसे अहम पद पर भी आज तक किसी महिला को नियुक्त नहीं किया गया।
तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर BJP सच में महिलाओं के हक और उनके सम्मान को लेकर गंभीर होती, तो वह अपने ही संगठन में महिलाओं को बराबर अवसर देती। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण जैसे बड़े और जरूरी मुद्दे पर अब BJP की नीयत पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
रेवंत रेड्डी के बयान के बाद देशभर में महिला प्रतिनिधित्व को लेकर बहस और तेज हो गई है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह मुद्दा आने वाले समय में और भी बड़ा राजनीतिक विषय बन सकता है, खासकर तब जब महिला आरक्षण के क्रियान्वयन पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। बीजेपी इसे ऐतिहासिक फैसला बताती है, जबकि विपक्ष इसे अधूरा और सिर्फ घोषणा मान रहा है।
कुल मिलाकर, रेवंत रेड्डी के बयान ने इस बहस को एक नई दिशा दे दी है कि क्या भारत की राजनीति में महिलाओं को सच में बराबरी का हक मिल रहा है या अब भी सिर्फ बातों तक सीमित है।

