देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 10 दिनों के भीतर तीसरी बार बढ़ोतरी के बाद सियासी पारा चढ़ गया है। कांग्रेस ने केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि सरकार महंगाई के बीच आम नागरिकों को राहत देने के बजाय उनकी जेब पर लगातार बोझ डाल रही है।

कांग्रेस का आरोप: 'लूट रही है सरकार'
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि बार-बार ईंधन महंगा होने का सीधा असर आम आदमी की जिंदगी पर पड़ता है।
पार्टी के 3 बड़े तर्क:
1. महंगाई की चेन: परिवहन लागत बढ़ने से सब्जी, खाने-पीने की चीजें और रोजमर्रा का सामान महंगा होगा।
2. एकतरफा बोझ: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम गिरने पर फायदा जनता को नहीं मिलता, लेकिन बढ़ते ही बोझ सीधे लोगों पर डाल दिया जाता है।
3. टैक्स का मुद्दा: केंद्र सरकार पेट्रोल-डीजल पर भारी टैक्स वसूल रही है। कांग्रेस ने टैक्स कम कर राहत देने की मांग की है।
पार्टी ने कहा कि देश पहले से महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक दबाव झेल रहा है। ऐसे में ईंधन की कीमतों में लगातार इजाफा लोगों की परेशानी बढ़ा रहा है।
सरकार का पुराना स्टैंड क्या है?
फिलहाल कांग्रेस के ताजा आरोपों पर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है. हालांकि सरकार पहले कहती रही है कि वैश्विक परिस्थितियों, कच्चे तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर घरेलू ईंधन कीमतों पर पड़ता है।
क्यों बढ़ रहे हैं दाम: ग्लोबल फैक्टर
पिछले कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में अस्थिरता है।
मुख्य वजह:
1. पश्चिम एशिया में तनाव: सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
2. वैश्विक दबाव: इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर दिख रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात ऐसे ही रहे तो आने वाले दिनों में ईंधन कीमतों पर और दबाव बढ़ सकता है।
आम आदमी पर असर
पेट्रोल-डीजल महंगा होने से ट्रांसपोर्ट सेक्टर की लागत बढ़ेगी। इसका असर बाजार में लगभग हर चीज की कीमत पर पड़ेगा। कांग्रेस इसी को बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाने में जुटी है।
लगातार बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। विपक्ष हमलावर है और जनता को सरकार से राहत की उम्मीद है। अब नजर इस पर है कि केंद्र टैक्स कटौती या कोई और कदम उठाता है या नहीं।
