जब भी महंगे वीजा या विदेश यात्रा की बात होती है, तो ज्यादातर लोगों के दिमाग में United States, United Kingdom या ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों का नाम आता है। लेकिन असलियत इससे बिल्कुल अलग है। दुनिया का सबसे महंगा वीजा सिस्टम किसी बड़े देश का नहीं, बल्कि हिमालय की गोद में बसे छोटे से खूबसूरत देश Bhutan का माना जाता है। भूटान का पर्यटन मॉडल इतना अलग है कि यहां पर्यटकों से हर रात के हिसाब से भारी फीस वसूली जाती है। यही वजह है कि यहां घूमना कई विदेशी यात्रियों के लिए काफी महंगा साबित होता है।


भूटान का वीजा सिस्टम क्यों है इतना खास?

भूटान सिर्फ एक सामान्य वीजा फीस नहीं लेता, बल्कि वहां “सस्टेनेबल डेवलपमेंट फीस” यानी SDF लागू है। भूटान सरकार विदेशी पर्यटकों से प्रति व्यक्ति, प्रति रात 100 डॉलर यानी करीब 8,300 रुपये वसूलती है। साल 2023 से पहले यह रकम 200 डॉलर प्रति रात थी, जिसे बाद में कम किया गया। हालांकि इसके बावजूद यह दुनिया के सबसे महंगे पर्यटन शुल्कों में गिना जाता है। अगर कोई विदेशी पर्यटक सिर्फ सात दिनों के लिए भी भूटान घूमने जाए, तो उसे केवल SDF के तौर पर ही लगभग 700 डॉलर यानी करीब 58 हजार रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं।


‘हाई वैल्यू, लो वॉल्यूम’ नीति पर चलता है भूटान

भूटान पर्यटन के मामले में “High Value, Low Volume Tourism” नीति अपनाता है। इसका मतलब है कि देश ज्यादा भीड़ नहीं चाहता, बल्कि कम लेकिन जिम्मेदार पर्यटकों को प्राथमिकता देता है। भूटान सरकार का मानना है कि अनियंत्रित पर्यटन से वहां की संस्कृति, पर्यावरण और प्राकृतिक सुंदरता को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए यहां आने वाले यात्रियों से ज्यादा शुल्क लेकर पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश की जाती है। यही वजह है कि भूटान आज भी अपनी पारंपरिक संस्कृति और शांत वातावरण के लिए दुनिया भर में मशहूर है।

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भारतीयों के लिए नियम थोड़े अलग

हालांकि भूटान ने अपने पड़ोसी देशों के लिए नियमों में थोड़ी राहत दी है। भारत, बांग्लादेश और मालदीव के नागरिकों को पारंपरिक वीजा की जरूरत नहीं होती। लेकिन भारतीय यात्रियों को भी “सस्टेनेबल डेवलपमेंट फीस” देनी पड़ती है। भारतीयों के लिए यह शुल्क लगभग 1,200 रुपये प्रति व्यक्ति प्रति दिन रखा गया है। यानी भूटान घूमना भारतीयों के लिए बाकी विदेशी पर्यटकों की तुलना में सस्ता जरूर है, लेकिन पूरी तरह मुफ्त नहीं।