
पश्चिम बंगाल की फल्टा विधानसभा सीट पर होने वाले रीपोल से पहले राजनीति गरमा गई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के उम्मीदवार जहांगीर खान ने अचानक चुनाव से अपना नाम वापस ले लिया, जिसके बाद राज्य की राजनीति में कई सवाल उठने लगे हैं। अब चर्चा इस बात की हो रही है कि उन्होंने यह फैसला अपनी मर्जी से लिया या फिर किसी दबाव में आकर पीछे हटे।
जहांगीर खान ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपने फैसले की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा फल्टा क्षेत्र के विकास के लिए एक “स्पेशल पैकेज” घोषित किया गया है। इसी वजह से उन्होंने रीपोल की प्रक्रिया से खुद को अलग करने का फैसला लिया है। उन्होंने कहा, “मैं फल्टा का बेटा हूं और चाहता हूं कि यहां शांति बनी रहे और इलाके का विकास हो।”
हालांकि, TMC ने इस फैसले को पूरी तरह जहांगीर खान का निजी निर्णय बताया। पार्टी ने साफ कहा कि यह पार्टी का फैसला नहीं है। TMC ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर दावा किया कि चुनाव परिणाम आने के बाद से फल्टा क्षेत्र में उनके 100 से ज्यादा कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है। पार्टी के मुताबिक कई कार्यालयों में तोड़फोड़ की गई और डर का माहौल बनाया गया।
TMC ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासन और एजेंसियों के जरिए पार्टी कार्यकर्ताओं पर दबाव बनाया जा रहा है। पार्टी ने यह भी कहा कि कुछ लोग इस दबाव को सहन नहीं कर पाए और मैदान छोड़ने का फैसला कर लिया। TMC ने इस पूरे मामले की निंदा करते हुए कहा कि भाजपा के खिलाफ उनकी लड़ाई जारी रहेगी।
वहीं पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने जहांगीर खान के फैसले पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जहांगीर खान को पता था कि उन्हें कोई पोलिंग एजेंट नहीं मिलेगा, इसलिए वे मैदान छोड़कर भाग गए। इससे पहले भी अधिकारी ने एक रैली में जहांगीर खान पर निशाना साधा था। उन्होंने उन्हें “डाकू” तक कह दिया था और दावा किया था कि मानवाधिकार आयोग ने साल 2021 में उन्हें कुख्यात अपराधियों की सूची में शामिल किया था।
फल्टा सीट पर दोबारा मतदान कराने का फैसला चुनाव आयोग ने लिया था। आयोग ने पूरे क्षेत्र के 285 पोलिंग स्टेशनों पर हुए मतदान को रद्द कर दिया था। चुनाव आयोग का कहना था कि मतदान के दौरान बड़े स्तर पर गड़बड़ी और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की गई।
रिपोर्ट्स के अनुसार कई बूथों पर ईवीएम से छेड़छाड़, मतदाताओं को डराने और मतदान नियमों के उल्लंघन की शिकायतें मिली थीं। कुछ जगहों पर बैलेट यूनिट के बटन पर काला टेप लगाए जाने की बात सामने आई, जिससे वोटिंग प्रक्रिया प्रभावित हुई। इसके अलावा कुछ लोगों पर बूथ में घुसकर दूसरों की जगह वोट डालने के आरोप भी लगे।
इतना ही नहीं, कई पोलिंग स्टेशनों की वीडियो रिकॉर्डिंग भी अधूरी या गायब बताई गई, जिससे चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए। इन सभी शिकायतों को गंभीर मानते हुए चुनाव आयोग ने रीपोल कराने का फैसला किया था।
अब जहांगीर खान के चुनाव से हटने के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है। विपक्ष इसे दबाव की राजनीति बता रहा है, जबकि भाजपा इसे TMC की कमजोरी करार दे रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा विवाद बन सकता है।
