देश की राजनीति के लिए आज का दिन बेहद अहम माना जा रहा है। पूर्व से दक्षिण तक लोकतंत्र का सबसे बड़ा उत्सव अपने चरम पर है। एक तरफ पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के पहले चरण के तहत 152 सीटों पर मतदान हो रहा है, तो दूसरी ओर तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं।

यह चुनाव सिर्फ सरकार चुनने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि दो बड़े क्षेत्रीय नेताओं की राजनीतिक ताकत की भी परीक्षा बन गया है। बंगाल में ममता बनर्जी की सियासी पकड़ दांव पर है, जबकि तमिलनाडु में एम.के. स्टालिन अपनी सत्ता बचाने की चुनौती का सामना कर रहे हैं।


बंगाल में सुरक्षा के घेरे में मतदान

पश्चिम बंगाल में पहले चरण की वोटिंग को लेकर सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व है। 16 जिलों की 152 सीटों पर केंद्रीय बलों की 2407 कंपनियां तैनात की गई हैं। उत्तर बंगाल, दक्षिण बंगाल और जंगलमहल के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा एजेंसियां विशेष नजर बनाए हुए हैं।

पूर्व मेदिनीपुर जिले को सबसे संवेदनशील माना गया है, जहां सबसे ज्यादा केंद्रीय बल तैनात किए गए हैं। मतदान केंद्रों के आसपास 100 मीटर तक सुरक्षा घेरा बनाया गया है। हर बूथ पर केंद्रीय जवान मौजूद हैं, जबकि स्थानीय पुलिस व्यवस्था संभाल रही है।

चुनाव आयोग ने किसी भी गड़बड़ी से निपटने के लिए 2193 त्वरित प्रतिक्रिया टीमें भी तैनात की हैं। बूथ कब्जाने, हिंसा या मशीनों से छेड़छाड़ की किसी भी कोशिश पर तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।


हर वोट पर डिजिटल नजर

इस बार बंगाल चुनाव में तकनीक का भी बड़ा इस्तेमाल हो रहा है। सभी मतदान केंद्रों पर शत-प्रतिशत वेबकास्टिंग की व्यवस्था की गई है। मतदान शुरू होने से पहले ईवीएम की जांच की गई और अधिकारियों को किसी भी तकनीकी खराबी की तुरंत रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।

निर्वाचन आयोग ने साफ किया है कि मतदान प्रक्रिया से छेड़छाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।


तमिलनाडु में एक दिन में पूरी तस्वीर साफ करने की कोशिश

वहीं तमिलनाडु में सभी 234 सीटों पर एक ही चरण में मतदान हो रहा है। राज्य के 5.73 करोड़ से ज्यादा मतदाता 4023 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करेंगे।

मुख्य मुकाबला द्रविड़ मुनेत्र कड़गम गठबंधन और अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम गठबंधन के बीच माना जा रहा है।

एम.के. स्टालिन विकास और कल्याण योजनाओं के दम पर जनता का भरोसा जीतने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि ई.के. पलानीस्वामी सत्ता में वापसी के लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं।


विजय की एंट्री ने बढ़ाया रोमांच

इस चुनाव की सबसे दिलचस्प बात अभिनेता से नेता बने विजय की सक्रियता है। उनकी पार्टी की मौजूदगी ने कई सीटों पर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है, जिससे चुनावी समीकरण पूरी तरह बदलते दिख रहे हैं।


किसके पक्ष में जाएगा जनादेश?

बंगाल में ममता बनर्जी के लिए यह सत्ता बचाने की लड़ाई है, जबकि तमिलनाडु में एम.के. स्टालिन के सामने अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत साबित करने की चुनौती है।

आज डाले जाने वाले वोट सिर्फ सरकार नहीं चुनेंगे, बल्कि यह भी तय करेंगे कि बंगाल और तमिलनाडु की राजनीति आने वाले वर्षों में किस दिशा में जाएगी।