ट्रेन में सफर के दौरान चोरी, लूटपाट और यात्रियों से ठगी जैसी घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए रेलवे पुलिस (GRP) ने बड़ा कदम उठाया है। अब ट्रेनों में सक्रिय अपराधियों की पूरी जानकारी एक क्लिक पर उपलब्ध होगी। इसके लिए GRP ने खास डिजिटल व्यवस्था शुरू की है, जिससे पुलिसकर्मी ट्रेन में अपराध करने वाले संदिग्धों और पुराने अपराधियों का रिकॉर्ड तुरंत देख सकेंगे।
दरअसल, रेलवे में लंबे समय से ऐसी शिकायतें सामने आती रही हैं कि कुछ अपराधी अलग-अलग ट्रेनों और रूटों पर लगातार वारदात को अंजाम देते हैं। कई बार पुलिस के पास जानकारी होने के बावजूद तुरंत पहचान करना मुश्किल हो जाता था। लेकिन अब नई व्यवस्था के जरिए अपराधियों की “कुंडली” यानी उनका पूरा रिकॉर्ड डिजिटल रूप में तैयार किया जा रहा है।

क्या होगा इस सिस्टम में?
नई व्यवस्था के तहत ट्रेन और रेलवे स्टेशनों पर सक्रिय अपराधियों का डेटाबेस तैयार किया जाएगा, जिसमें उनकी फोटो, आपराधिक इतिहास, पहले की वारदातें, काम करने का तरीका (मोडस ऑपरेंडी) और किन रूटों पर वे ज्यादा सक्रिय रहते हैं जैसी जानकारी शामिल होगी।
इस सिस्टम की मदद से GRP के जवान और अधिकारी मोबाइल या डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए संदिग्ध व्यक्ति की जानकारी तुरंत चेक कर सकेंगे। यानी अगर कोई संदिग्ध पकड़ा जाता है, तो पुलिस को उसका रिकॉर्ड निकालने में ज्यादा समय नहीं लगेगा।
यात्रियों को कैसे होगा फायदा?
GRP का मानना है कि इस पहल से ट्रेन में होने वाले अपराधों पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकेगी। अक्सर जेबकतरे, नशाखुरानी गिरोह, मोबाइल चोर और सामान उड़ाने वाले अपराधी अलग-अलग नामों से यात्रा करते हैं। अब डिजिटल रिकॉर्ड के जरिए उनकी पहचान आसान होगी और कार्रवाई तेजी से हो सकेगी।
यात्रियों को भी इससे राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस तेजी से संदिग्धों तक पहुंच सकेगी। खासकर लंबी दूरी की ट्रेनों में सक्रिय गैंग पर नजर रखना आसान हो जाएगा।

किन अपराधियों पर रहेगी नजर?
GRP के मुताबिक, इस सिस्टम में खासतौर पर चोरी, लूट, नशाखुरानी, महिला यात्रियों से छेड़छाड़ और संगठित गिरोहों से जुड़े अपराधियों का डेटा रखा जाएगा। बार-बार अपराध करने वाले लोगों को “एक्टिव अपराधी” की सूची में रखा जाएगा।
डिजिटल निगरानी पर जोर
रेलवे पुलिस अब सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने पर जोर दे रही है। CCTV, डिजिटल रिकॉर्ड और तकनीक की मदद से ट्रेनों में अपराध कम करने की कोशिश की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि अपराधियों की पहचान और ट्रैकिंग जितनी तेज होगी, यात्रियों की सुरक्षा उतनी मजबूत होगी।
फिलहाल, GRP की इस नई पहल को रेलवे सुरक्षा के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है। अब देखने वाली बात होगी कि यह सिस्टम जमीन पर कितना असर दिखाता है और ट्रेन में अपराध की घटनाओं को कम करने में कितना सफल होता है।
