आज के समय में Asthma के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इसके पीछे प्रदूषण एक बड़ी वजह बनकर सामने आया है। खासतौर पर शहरों में बढ़ता धुआं, धूल, वाहन प्रदूषण और खराब एयर क्वालिटी लोगों के फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचा रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस की बीमारी से जूझ रहे लोगों पर इसका असर सबसे ज्यादा देखने को मिल रहा है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और कई हेल्थ रिपोर्ट्स के अनुसार, हवा में मौजूद सूक्ष्म धूल कण (PM2.5 और PM10), धुआं और केमिकल्स सांस के जरिए शरीर में पहुंचकर फेफड़ों में सूजन पैदा करते हैं। यही वजह है कि Asthma के मरीजों को सांस लेने में तकलीफ, सीने में जकड़न, खांसी और व्हीजिंग जैसी समस्याएं बढ़ने लगती हैं।
बच्चों और बुजुर्गों पर ज्यादा खतरा
हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि छोटे बच्चों और बुजुर्गों की इम्यूनिटी कमजोर होने की वजह से प्रदूषण का असर उन पर जल्दी होता है। जिन लोगों को पहले से एलर्जी, ब्रोंकाइटिस या फेफड़ों की बीमारी है, उन्हें ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
रेस्पिरेटरी एक्सपर्ट्स के अनुसार, प्रदूषित हवा फेफड़ों की नलियों को संवेदनशील बना देती है। जब कोई व्यक्ति धूल, धुएं या स्मॉग के संपर्क में आता है, तो Asthma अटैक का खतरा बढ़ सकता है। लंबे समय तक खराब हवा में रहने से बच्चों के फेफड़ों का विकास भी प्रभावित हो सकता है।
डॉक्टरों का कहना है कि मौसम बदलने के दौरान यह समस्या और बढ़ जाती है। गर्मी, धूल भरी आंधी, निर्माण कार्य और ट्रैफिक प्रदूषण Asthma के मरीजों के लिए परेशानी बढ़ा सकते हैं।
घर से बाहर निकलने से पहले रखें इन बातों का ध्यान
AQI (Air Quality Index) जरूर चेक करें
ज्यादा प्रदूषण होने पर मास्क पहनें
सुबह या देर शाम ज्यादा धूल वाले इलाकों से बचें
Asthma के मरीज अपना इनहेलर साथ रखें
घर में एयर वेंटिलेशन और सफाई का ध्यान रखें
धूम्रपान और सेकेंड हैंड स्मोक से दूरी बनाएं
Disclaimer:
यह खबर सामान्य जानकारी पर आधारित है। किसी भी तरह की सांस संबंधी समस्या या Asthma के लक्षण महसूस होने पर डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
