अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी अब बिहार पहुंच चुके हैं। पटना एयरपोर्ट पर उनके आगमन के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। पटना पहुंचने के बाद वह सीधे सारण जिले के मस्तीचक गांव के लिए रवाना हुए, जहां वह एक ऐसी पहल की आधारशिला रखने जा रहे हैं जिसे ग्रामीण स्वास्थ्य और कौशल विकास के क्षेत्र में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। यह केवल किसी उद्योगपति का दौरा नहीं, बल्कि बिहार के ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं और रोजगार से जुड़ी एक महत्वाकांक्षी सामाजिक पहल की शुरुआत मानी जा रही है।



आखिर क्यों बिहार आए हैं गौतम अदाणी?

गौतम अदाणी का यह दौरा किसी कारोबारी परियोजना से जुड़ा नहीं है, बल्कि इसके केंद्र में सामाजिक विकास है। मस्तीचक में अदाणी फाउंडेशन और अखंड ज्योति आई हॉस्पिटल के सहयोग से देश के सबसे बड़े ग्रामीण नेत्र स्वास्थ्य कार्यक्रमों में से एक की शुरुआत की जाएगी। इस परियोजना का उद्देश्य उत्तर और मध्य भारत के दूरदराज और पिछड़े ग्रामीण इलाकों तक आधुनिक नेत्र चिकित्सा सेवाएं पहुंचाना है। इसके तहत आंखों की जांच, इलाज और ऑपरेशन जैसी सुविधाओं को गांवों तक पहुंचाने की योजना बनाई गई है।


सिर्फ इलाज नहीं, युवाओं के लिए रोजगार और ट्रेनिंग की भी तैयारी

यह परियोजना केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। इसके साथ ग्रामीण युवाओं के लिए कौशल विकास केंद्र भी विकसित किए जाएंगे, जहां प्रशिक्षण और रोजगार से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। माना जा रहा है कि आने वाले समय में यह अभियान स्वास्थ्य सेवा और स्किल डेवलपमेंट को साथ जोड़ने वाला एक बड़ा मॉडल बन सकता है। ग्रामीण इलाकों के युवाओं को प्रशिक्षण देकर रोजगार के अवसरों से जोड़ना भी इस पहल का अहम हिस्सा है।



‘सेवा ही साधना है’ से जुड़ी बड़ी सोच

गौतम अदाणी लंबे समय से “सेवा ही साधना है” के विचार को सामाजिक अभियानों से जोड़ते रहे हैं। साल 2022 में अपने 60वें जन्मदिन पर अदाणी परिवार ने स्वास्थ्य, शिक्षा और कौशल विकास क्षेत्रों के लिए 60 हजार करोड़ रुपये देने की घोषणा की थी। इसके बाद परिवार की ओर से सामाजिक परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त योगदान भी सामने आया। बिहार की यह पहल उसी व्यापक विजन की अगली कड़ी मानी जा रही है।


अखंड ज्योति आई हॉस्पिटल और अदाणी फाउंडेशन की साझेदारी क्यों अहम है?

अखंड ज्योति आई हॉस्पिटल ने पिछले वर्षों में लाखों लोगों तक नेत्र चिकित्सा सेवाएं पहुंचाई हैं। अस्पताल ने ग्रामीण क्षेत्रों में सस्ती और प्रभावी नेत्र सेवाओं का मॉडल तैयार किया है। वहीं अदाणी फाउंडेशन पहले से कई राज्यों में स्वास्थ्य और सामुदायिक विकास कार्यक्रम चला रहा है। अब दोनों संस्थाओं की साझेदारी से यह दावा किया जा रहा है कि भविष्य में दुनिया का सबसे बड़ा ग्रामीण नेत्र चिकित्सा नेटवर्क तैयार किया जा सकता है।


बिहार से शुरू होकर बड़े बदलाव की उम्मीद

पटना पहुंच चुके गौतम अदाणी का यह दौरा अब केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक बड़े सामाजिक प्रयोग के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले समय में यह साफ होगा कि मस्तीचक से शुरू हुई यह पहल बिहार के गांवों और देश के अन्य हिस्सों में कितनी बड़ी तस्वीर बदल पाती है। फिलहाल नजरें इस बात पर हैं कि आज की यह शुरुआत आगे कितने लोगों की जिंदगी में रोशनी और रोजगार लेकर आती है।