erer | Source: erer शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर 2026 से हो रही है। इस पावन अवसर पर घरों और मंदिरों में मां दुर्गा की पूजा-अर्चना के साथ कलश स्थापना की जाती है। नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। हालांकि, कई बार पूजा की तैयारियों में देरी या किसी अन्य कारण से सुबह का निर्धारित मुहूर्त निकल जाता है। ऐसी स्थिति में भक्तों के मन में सवाल उठता है कि क्या अब कलश स्थापना नहीं की जा सकती और क्या दोपहर या शाम को भी घटस्थापना का कोई शुभ समय उपलब्ध है। ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, यदि सुबह का मुख्य मुहूर्त छूट जाए तो प्रतिपदा तिथि के दौरान राहुकाल से बचते हुए दूसरे शुभ मुहूर्त और चौघड़िया में भी कलश स्थापना का विकल्प देखा जा सकता है।

सुबह कलश स्थापना के लिए क्या है शुभ मुहूर्त?

11 अक्टूबर को शारदीय नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना के लिए सुबह का समय महत्वपूर्ण रहेगा। पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, सुबह 8 बजकर 58 मिनट से 11 बजकर 15 मिनट तक वृश्चिक स्थिर लग्न रहेगा। इस अवधि में कलश स्थापना की जा सकती है।

धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय गणना में स्थिर लग्न को शुभ कार्यों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी वजह से नवरात्रि में घटस्थापना करते समय तिथि के साथ लग्न का भी ध्यान रखा जाता है। इस दौरान पूजा करने वाले श्रद्धालु पहले से पूजन सामग्री तैयार रखकर निर्धारित समय में विधि-विधान के साथ कलश स्थापित कर सकते हैं।

हालांकि, यदि किसी कारण से सुबह का यह समय निकल जाए तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। ज्योतिषाचार्य के बताए अनुसार, इसके बाद भी घटस्थापना के लिए अन्य समय देखे जा सकते हैं।

सुबह का मुहूर्त छूटने पर अभिजीत मुहूर्त में करें पूजा

नवरात्रि के पहले दिन सुबह का निर्धारित मुहूर्त छूटने पर अभिजीत मुहूर्त को एक अन्य विकल्प के रूप में बताया गया है। पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, 11 अक्टूबर को सुबह 11 बजकर 28 मिनट से दोपहर 12 बजकर 42 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा।

ऐसे श्रद्धालु जो सुबह के पहले मुहूर्त में कलश स्थापना नहीं कर पाए हैं, वे इस समय को ध्यान में रख सकते हैं। अभिजीत मुहूर्त को परंपरागत ज्योतिष में कई शुभ कार्यों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

यदि किसी परिवार में पूजा की तैयारियों में अधिक समय लग जाता है और अभिजीत मुहूर्त भी निकल जाता है, तो अन्य चौघड़िया पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, घटस्थापना के लिए तिथि और स्थानीय पंचांग के अनुसार समय की पुष्टि करना जरूरी है।

दोपहर में घटस्थापना के लिए कौन-से चौघड़िया बताए गए हैं?

पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, मुख्य मुहूर्त छूट जाने पर प्रतिपदा तिथि में उपलब्ध शुभ चौघड़िया के आधार पर भी कलश स्थापना का विकल्प देखा जा सकता है। चौघड़िया पद्धति में लाभ, अमृत और शुभ जैसे समयखंडों को शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है।

11 अक्टूबर के लिए बताए गए चौघड़िया का समय इस प्रकार है:

  • चर चौघड़िया: सुबह 7:33 बजे से 9 बजे तक
  • लाभ चौघड़िया: सुबह 9 बजे से 10:28 बजे तक
  • अमृत चौघड़िया: सुबह 10:28 बजे से 11:56 बजे तक
  • शुभ चौघड़िया: दोपहर 1:23 बजे से 2:51 बजे तक
  • इन समयों में से किसी अवधि में पूजा करने से पहले प्रतिपदा तिथि की स्थिति और स्थानीय पंचांग का ध्यान रखना चाहिए। केवल चौघड़िया के नाम के आधार पर समय तय करने के बजाय तिथि और अन्य प्रासंगिक ज्योतिषीय गणनाओं का मिलान करना बेहतर रहेगा।

क्या शाम को भी कर सकते हैं कलश स्थापना?

जिन लोगों की सुबह और दोपहर में घटस्थापना नहीं हो पाती, उनके लिए शाम के समय को लेकर भी सवाल उठता है। पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, प्रतिपदा तिथि के भीतर राहुकाल को छोड़कर अन्य शुभ चौघड़िया में कलश स्थापना के विकल्प पर विचार किया जा सकता है।

11 अक्टूबर के लिए शाम और रात के चौघड़िया का समय इस प्रकार बताया गया है:

  • शुभ चौघड़िया: शाम 5:46 बजे से रात 7:18 बजे तक
  • अमृत चौघड़िया: रात 7:18 बजे से 8:51 बजे तक
  • चर चौघड़िया: रात 8:51 बजे से 10:23 बजे तक
  • इन समयों के संबंध में एक महत्वपूर्ण बात ध्यान रखने योग्य है। बताए गए समय में प्रतिपदा तिथि की समाप्ति और राहुकाल की स्थिति का विशेष ध्यान रखना होगा। प्रतिपदा तिथि समाप्त होने के बाद उस तिथि के आधार पर घटस्थापना का मुहूर्त नहीं माना जा सकता। इसलिए शाम को पूजा करने की योजना बना रहे श्रद्धालुओं को स्थानीय पंचांग से समय की पुष्टि कर लेनी चाहिए।

नवरात्रि के पहले दिन कब रहेगा राहुकाल?

घटस्थापना के लिए शुभ समय चुनते हुए राहुकाल का ध्यान रखना भी जरूरी माना जाता है। पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, 11 अक्टूबर को शाम 4 बजकर 30 मिनट से 6 बजे तक राहुकाल रहेगा।

परंपरागत मान्यता के अनुसार, राहुकाल में शुभ कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है। ऐसे में शाम के समय कलश स्थापना करने की योजना बना रहे श्रद्धालुओं को राहुकाल और प्रतिपदा तिथि, दोनों की स्थिति देखनी चाहिए।

यह विशेष रूप से इसलिए जरूरी है, क्योंकि शाम के लिए बताए गए शुभ चौघड़िया का कुछ समय राहुकाल की अवधि से मेल खाता है। ऐसे में किसी भी समय को बिना मिलान किए घटस्थापना के लिए उपयुक्त मान लेना सही नहीं होगा। पूजा का अंतिम समय निर्धारित करने के लिए स्थानीय पंचांग या योग्य ज्योतिषाचार्य से सलाह लेना उचित रहेगा।

प्रतिपदा तिथि रात 8:37 बजे तक, समय का रखें ध्यान

पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, 11 अक्टूबर को प्रतिपदा तिथि रात 8 बजकर 37 मिनट तक रहेगी। नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना के लिए प्रतिपदा तिथि का विशेष महत्व माना जाता है।

यदि सुबह का मुहूर्त छूट गया है, तो श्रद्धालुओं को उपलब्ध विकल्पों में से ऐसा समय चुनने पर ध्यान देना चाहिए, जो तिथि और स्थानीय पंचांग के अनुसार अनुकूल हो। शाम या रात के लिए बताए गए चौघड़िया का उपयोग करने से पहले यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि प्रतिपदा तिथि उस समय प्रभावी है या नहीं।

धार्मिक परंपराओं में घटस्थापना को नवरात्रि पूजा का महत्वपूर्ण आरंभ माना जाता है। इसलिए केवल सुविधानुसार समय चुनने के बजाय तिथि, मुहूर्त और पूजा की परंपरा को ध्यान में रखना चाहिए।

कलश स्थापना से पहले पूजा की तैयारी कैसे करें?

नवरात्रि के पहले दिन पूजा को व्यवस्थित तरीके से संपन्न करने के लिए पूजन सामग्री पहले से तैयार रखना उपयोगी होता है। श्रद्धालुओं को पूजा स्थल की सफाई करने और कलश, जल, मिट्टी, जौ तथा अन्य आवश्यक सामग्री की व्यवस्था पहले ही कर लेनी चाहिए।

घटस्थापना के समय मां दुर्गा का ध्यान कर संकल्प लिया जाता है। इसके बाद परिवार की परंपरा और प्रचलित पूजा-विधि के अनुसार कलश स्थापना की जाती है। नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा का भी विशेष महत्व है।

समय की कमी की आशंका हो तो पूजा की सामग्री पहले से तैयार रखने से निर्धारित मुहूर्त में अनावश्यक देरी से बचा जा सकता है। साथ ही, पूजा की विधि परिवार की धार्मिक परंपरा के अनुसार अपनाई जा सकती है।

सुबह का मुहूर्त निकल जाए तो क्या करें?

नवरात्रि में घटस्थापना का सुबह का मुहूर्त छूटने पर घबराने के बजाय प्रतिपदा तिथि में उपलब्ध दूसरे विकल्पों की जानकारी लेनी चाहिए। पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, अभिजीत मुहूर्त और अन्य अनुकूल चौघड़िया पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, राहुकाल और प्रतिपदा तिथि की समाप्ति को ध्यान में रखना जरूरी है।