देश में तेजी से बढ़ रहे “डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड” के मामलों को लेकर केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। सरकार ने Supreme Court of India को जानकारी देते हुए बताया कि पिछले चार महीनों में इस तरह की ठगी में इस्तेमाल हो रहे हजारों WhatsApp अकाउंट्स को बैन किया गया है। यह कार्रवाई साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए उठाए गए बड़े कदम के तौर पर देखी जा रही है।

“डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड” एक नई तरह की साइबर ठगी है, जिसमें अपराधी खुद को पुलिस, CBI या अन्य जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं। वे पीड़ितों को वीडियो कॉल या मैसेज के जरिए यह विश्वास दिलाते हैं कि उनके खिलाफ कोई गंभीर मामला दर्ज है और उन्हें “डिजिटल रूप से गिरफ्तार” किया जा रहा है। इसके बाद आरोपी उनसे भारी रकम की मांग करते हैं।

सरकार के अनुसार, इस तरह के मामलों में सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया जा रहा था। शिकायतें मिलने के बाद संबंधित एजेंसियों ने टेक कंपनियों के साथ मिलकर कार्रवाई की और संदिग्ध अकाउंट्स की पहचान कर उन्हें ब्लॉक किया गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के फ्रॉड में अपराधी मनोवैज्ञानिक दबाव बनाकर लोगों को जल्दी निर्णय लेने पर मजबूर करते हैं। कई मामलों में लोग डर के कारण बिना जांच किए ही पैसे ट्रांसफर कर देते हैं।

सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे इस तरह के कॉल या मैसेज से सावधान रहें और किसी भी अनजान व्यक्ति को अपनी निजी जानकारी या पैसे न दें। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि कोई भी एजेंसी “डिजिटल अरेस्ट” जैसी प्रक्रिया नहीं अपनाती।

इस कार्रवाई को साइबर सुरक्षा के लिहाज से एक अहम कदम माना जा रहा है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ अकाउंट बैन करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि लोगों को जागरूक करना भी उतना ही जरूरी है।

फिलहाल, सरकार और एजेंसियां इस तरह के अपराधों को रोकने के लिए लगातार निगरानी और कार्रवाई कर रही हैं, ताकि डिजिटल दुनिया को सुरक्षित बनाया जा सके।