erere | Source: ereनई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे विरोध-प्रदर्शनों को लेकर विदेशी फंडिंग का आरोप सामने आने के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और पूर्व राज्यसभा सांसद महेश जेठमलानी ने दावा किया है कि इन प्रदर्शनों के पीछे विदेशी ताकतों का पैसा लगा हुआ है। उन्होंने इस संबंध में सबूतों के साथ अदालत जाने की बात भी कही है। हालांकि, विदेशी फंडिंग से जुड़े इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

'प्रदर्शनकारियों को विदेशी ताकतों से मिल रहा पैसा', जेठमलानी का दावा

महेश जेठमलानी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट के जरिए आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर हो रहे प्रदर्शनों को विदेशी ताकतों से आर्थिक मदद मिल रही है और उनके स्थानीय समर्थक इसमें भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों और भारत के हितों को लेकर अपने विचार रखते हुए दावा किया कि विदेशी हितों के खिलाफ सरकार के रुख के कारण ऐसी गतिविधियां बढ़ रही हैं।

जेठमलानी ने विदेशी फंडिंग के आरोपों के साथ विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक (एफसीआरए) को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने संकेत दिया कि इस विधेयक को लेकर जारी विवाद भी विरोध-प्रदर्शनों के पीछे एक कारण हो सकता है। हालांकि, उनके दावों के समर्थन में सार्वजनिक रूप से उपलब्ध ठोस सबूतों की पुष्टि अभी नहीं हुई है।

सबूतों के साथ अदालत जाने की बात, आरोपों पर सबकी नजर

जेठमलानी ने कहा है कि वह विदेशी फंडिंग से जुड़े अपने दावों को लेकर अदालत का रुख करेंगे। उनके बयान के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या वह संबंधित वित्तीय लेनदेन, संगठनों या व्यक्तियों से जुड़े दस्तावेज अदालत में पेश करेंगे। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में किसी न्यायिक निष्कर्ष या आधिकारिक जांच के आधार पर इन आरोपों की पुष्टि सामने नहीं आई है। ऐसे में मामले में आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

पहले भी उठे थे प्रदर्शन के खर्च और फंडिंग पर सवाल

जंतर-मंतर पर हुए पिछले प्रदर्शनों के दौरान खाने-पीने की व्यवस्था और कुछ प्रदर्शनकारियों के सोशल मीडिया दावों को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। अब ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे आंदोलन की फंडिंग पर भी राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, प्रदर्शन के आयोजन में खर्च होना अपने आप में विदेशी फंडिंग का प्रमाण नहीं है। इसकी पुष्टि के लिए वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की जांच आवश्यक होगी।

क्या है एफसीआरए विधेयक, जिस पर बढ़ा विवाद?

विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) भारत में विदेशी स्रोतों से मिलने वाले योगदान को नियंत्रित करता है। इसके तहत पात्र व्यक्तियों और संगठनों के लिए विदेशी धन प्राप्त करने, उसका इस्तेमाल करने तथा संबंधित रिकॉर्ड और रिपोर्ट प्रस्तुत करने के नियम निर्धारित होते हैं। कानून का उद्देश्य विदेशी योगदान के उपयोग में पारदर्शिता बनाए रखना और राष्ट्रीय हितों से जुड़े नियामक प्रावधानों को लागू करना है।

एफसीआरए संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर संसद के मानसून सत्र में विवाद हुआ था। उपलब्ध समाचार विवरण के अनुसार, विधेयक को विपक्ष के विरोध के बीच अगस्त में 30 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा गया था। प्रस्तावित बदलावों को लेकर विभिन्न संगठनों और राजनीतिक दलों ने अपनी आपत्तियां रखी हैं।

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग से जुड़ा है राजनीतिक विवाद

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर सीजेपी और कुछ विपक्षी दल मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठा रहे हैं। दूसरी ओर, जेठमलानी ने इन प्रदर्शनों के पीछे विदेशी फंडिंग होने का आरोप लगाया है। अब इस पूरे विवाद में दो अलग-अलग सवाल प्रमुख हो गए हैं—एक ओर चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठाई जा रही आपत्तियां हैं, तो दूसरी ओर विरोध-प्रदर्शनों की फंडिंग पर लगाए गए आरोप। विदेशी धन के इस्तेमाल संबंधी दावों की वास्तविक स्थिति संबंधित साक्ष्यों, जांच और न्यायिक प्रक्रिया से ही स्पष्ट हो सकेगी।