बिहार की मशहूर शाही लीची इस बार जलवायु परिवर्तन की गंभीर मार झेल रही है। बेमौसम बारिश, तापमान में अचानक बदलाव और असामान्य मौसम ने लीची की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है। हालत यह है कि मुजफ्फरपुर समेत कई इलाकों में किसानों को 70 प्रतिशत तक नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। इसका असर सिर्फ किसानों की कमाई पर ही नहीं, बल्कि देशभर में लीची की सप्लाई और गुणवत्ता पर भी देखने को मिलेगा।
असामान्य मौसम ने बिगाड़ा लीची का पूरा चक्र
वैज्ञानिकों के अनुसार नवंबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच मौसम में आए असामान्य बदलावों ने लीची की खेती को बुरी तरह प्रभावित किया। समय से पहले गर्मी बढ़ना, अचानक बारिश होना और तापमान में लगातार उतार-चढ़ाव की वजह से पेड़ों में सही समय पर फूल नहीं आए।
इसके साथ ही कई जगहों पर फल बनने की प्रक्रिया भी प्रभावित हुई और तैयार होने से पहले ही बड़ी संख्या में फल झड़ने लगे। विशेषज्ञों का कहना है कि लीची जैसी संवेदनशील फसल के लिए संतुलित मौसम बेहद जरूरी होता है, लेकिन इस बार मौसम का अस्थिर व्यवहार किसानों के लिए बड़ी परेशानी बन गया।
बिहार की अर्थव्यवस्था और बाजार पर पड़ा असर
राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र के मुताबिक देश के कुल लीची उत्पादन में बिहार की हिस्सेदारी लगभग 43 प्रतिशत है। राज्य में करीब 32 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में लीची की खेती होती है, जिसमें सिर्फ मुजफ्फरपुर में ही लगभग 12 हजार हेक्टेयर में लीची के बाग मौजूद हैं।
मुजफ्फरपुर की प्रसिद्ध ‘शाही लीची’ को साल 2018 में जीआई टैग भी मिल चुका है, जिससे इसकी पहचान देश और विदेश तक बनी हुई है। लेकिन इस बार फसल खराब होने से किसानों की आय पर बड़ा असर पड़ सकता है। साथ ही देश के दूसरे राज्यों में लीची की उपलब्धता कम होने और कीमतें बढ़ने की भी संभावना जताई जा रही है।
वैज्ञानिकों ने जताई भविष्य को लेकर चिंता
विशेषज्ञों का कहना है कि लीची एक उपोष्णकटिबंधीय फल है, जिसे बेहतर विकास के लिए खास प्रकार की जलवायु की जरूरत होती है। बिहार कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के मुताबिक इस बार मौसम में लगातार बदलाव की वजह से फलों में शर्करा बनने की प्रक्रिया भी प्रभावित हुई है।
इसका असर सिर्फ उत्पादन पर ही नहीं, बल्कि लीची के स्वाद और गुणवत्ता पर भी पड़ा है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अगर जलवायु परिवर्तन की यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले वर्षों में लीची और आम जैसी फसलों की खेती और ज्यादा मुश्किल हो सकती है।
कभी बिहार की पहचान मानी जाने वाली शाही लीची…
अब बदलते मौसम के सामने खुद को बचाने की लड़ाई लड़ रही है।
