उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। जिले में पोलियो वायरस मिलने के बाद हड़कंप मच गया है। जानकारी के मुताबिक, सीवेज (गंदे पानी) के सैंपल में वायरस के संकेत मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग तुरंत अलर्ट मोड में आ गया है। स्थिति को देखते हुए 12 इलाकों में विशेष निगरानी अभियान शुरू किया गया है, जहां करीब सवा लाख बच्चों की जांच और निगरानी की जाएगी।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह वायरस पर्यावरणीय निगरानी (Environmental Surveillance) के दौरान सीवेज सैंपल में पाया गया। इसके बाद तुरंत प्रभावित क्षेत्रों की पहचान की गई और बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए बड़े स्तर पर अभियान शुरू करने का फैसला लिया गया।

12 इलाकों में चलेगा बड़ा अभियान

जानकारी के मुताबिक, जिन इलाकों में निगरानी बढ़ाई गई है वहां घर-घर जाकर बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा। खासतौर पर 0 से 5 साल तक के बच्चों पर फोकस रहेगा। स्वास्थ्य विभाग यह सुनिश्चित करेगा कि किसी भी बच्चे की पोलियो वैक्सीन छूटी न हो।

अधिकारियों का कहना है कि करीब 1.25 लाख बच्चों (सवा लाख) का चेकअप और टीकाकरण रिकॉर्ड की जांच की जाएगी। इसके लिए 160 विशेष टीमें गठित की गई हैं, जो घर-घर जाकर बच्चों की स्थिति का आकलन करेंगी।

क्या है स्वास्थ्य विभाग की तैयारी?

विभाग ने डॉक्टरों, आशा कार्यकर्ताओं और मेडिकल स्टाफ को सक्रिय कर दिया है। टीमों को निर्देश दिया गया है कि अगर किसी बच्चे में हाथ-पैर में कमजोरी, चलने में दिक्कत या अचानक लकवे जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत जांच कराई जाए।

साथ ही, अभिभावकों से अपील की गई है कि वे बच्चों का टीकाकरण रिकॉर्ड जरूर जांचें और पोलियो ड्रॉप्स को लेकर किसी तरह की लापरवाही न बरतें।

क्या बढ़ गया है खतरा?

विशेषज्ञों का कहना है कि सीवेज में वायरस मिलने का मतलब यह जरूरी नहीं कि बड़े स्तर पर संक्रमण फैल गया हो, लेकिन इसे चेतावनी संकेत के तौर पर देखा जाता है। यही वजह है कि स्वास्थ्य विभाग कोई जोखिम नहीं लेना चाहता और समय रहते रोकथाम की कोशिश की जा रही है।

भारत को पहले ही पोलियो मुक्त देश घोषित किया जा चुका है, इसलिए ऐसे मामलों में अतिरिक्त सतर्कता बरती जाती है ताकि वायरस दोबारा सक्रिय न हो सके।

फिलहाल, स्वास्थ्य विभाग लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है। आने वाले दिनों में जांच और निगरानी अभियान की रिपोर्ट के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।