गर्मियों में तेज धूप और अल्ट्रावॉयलेट किरणों का असर सिर्फ त्वचा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि आंखों को भी गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। यही वजह है कि गर्मी के मौसम में आंखों से जुड़ी कई समस्याएं तेजी से बढ़ने लगती हैं। लंबे समय तक तेज धूप में रहने को लेकर अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या इससे मोतियाबिंद का खतरा बढ़ सकता है। मोतियाबिंद आंखों की एक ऐसी समस्या है, जो आमतौर पर 50 से 60 साल की उम्र के बाद देखने को मिलती है। इसमें आंखों के लेंस में धुंधलापन आने लगता है, जिससे चीजें साफ दिखाई नहीं देतीं और धीरे-धीरे नजर कमजोर होने लगती है। हालांकि कई मामलों में कम उम्र में भी इसका खतरा बढ़ सकता है। दिल्ली के Vision Eye Centre के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. तुषार ग्रोवर ने बताया कि मोतियाबिंद मुख्य रूप से उम्र से जुड़ी समस्या है, लेकिन आंखों में चोट, डायबिटीज और लंबे समय तक तेज धूप में रहने से इसका रिस्क बढ़ सकता है। डॉक्टर के मुताबिक अगर आंखें लगातार अल्ट्रावॉयलेट किरणों के संपर्क में रहें, तो मोतियाबिंद समेत कई गंभीर आई डिजीज का खतरा बढ़ सकता है।

आंखों के लिए खतरनाक हो सकती हैं UV किरणें

डॉ. तुषार ग्रोवर के अनुसार, ज्यादा धूप और UV किरणें मोतियाबिंद की प्रक्रिया को थोड़ा तेज कर सकती हैं। हालांकि इसे इसकी सबसे बड़ी वजह नहीं माना जा सकता। UV किरणों की वजह से आंखों में ड्राइनेस, एलर्जी और कंजंक्टिवाइटिस जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा लंबे समय तक UV एक्सपोजर से आंखों के कैंसर का जोखिम भी बढ़ सकता है।

गर्मियों में आंखों का कैसे रखें ख्याल?

एक्सपर्ट्स का कहना है कि गर्मियों में बाहर निकलते समय UV प्रोटेक्शन वाले सनग्लासेस जरूर पहनने चाहिए। अगर ऐसे चश्मे उपलब्ध न हों, तो सामान्य सनग्लासेस भी आंखों को कुछ हद तक सुरक्षा दे सकते हैं। दोपहर के समय तेज धूप में बाहर निकलने से बचना चाहिए और पर्याप्त मात्रा में पानी पीना जरूरी है, ताकि आंखों की नमी बनी रहे। आंखों में ड्राइनेस महसूस होने पर लुब्रिकेंट आई ड्रॉप्स का इस्तेमाल किया जा सकता है। अगर आंखों में जलन, धुंधलापन या किसी तरह की परेशानी महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

आंखों को लेकर लापरवाही पड़ सकती है भारी

डॉक्टरों का कहना है कि तेज धूप और गर्म हवाओं को हल्के में लेना सही नहीं है। गर्मियों में आंखों की सही देखभाल और UV किरणों से बचाव करने से कई गंभीर समस्याओं के खतरे को कम किया जा सकता है।