मध्य-पूर्व वैसे ही सालों से तनाव में रहता है कभी इज़राइल का मुद्दा, कभी यमन, कभी अमेरिका-ईरान की तकरार। इसी बीच दुनिया को लगता था कि लगातार हमलों, प्रतिबंधों और दबाव की वजह से ईरान की सैन्य फैक्ट्रियाँ बुरी तरह टूट गई हैं।सबका मानना था कि ईरान को दोबारा अपनी ड्रोन बनाने वाली फैक्ट्रियाँ चालू करने में कई साल लगेंगे, क्योंकि पिछले कुछ महीनों में उन पर कई बार हमले हुए थे।मतलब सीधी भाषा में कहें तो दुनिया को लगा था कि ईरान अब जल्दी खड़ा नहीं हो पाएगा।
लेकिन अब अमेरिकी रिपोर्ट ने उल्टा ही कह दिया।रिपोर्ट कहती है कि ईरान ने चुपचाप, तेज़ी से और उम्मीद से कहीं ज्यादा जल्दी अपनी ड्रोन फैक्ट्रियाँ फिर से चालू कर ली हैं।इतना जल्दी कि खुफिया एजेंसियाँ भी हैरान हैं और इसी वजह से यह रिपोर्ट फिर से चर्चा में है, क्योंकि इससे पूरे इलाके का संतुलन बदल सकता है।
अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने हाल के तनाव और दबाव के बावजूद अपनी ड्रोन बनाने की क्षमता दोबारा शुरू कर दी है।जहाँ अमेरिका और उसके साथी देशों को लगा था कि ईरान को वापस पटरी पर आने में बहुत वक्त लगेगा, वहीं रिपोर्ट बताती है कि ईरान ने उम्मीद से कई गुना तेज़ी से अपनी सैन्य फैक्ट्रियाँ स्टार्ट कर दी हैं।
अमेरिकी इंटेलिजेंस यह भी कहती है कि ईरान अगले कुछ महीनों में दुबारा वही ताकत हासिल कर सकता है, जो पहले ड्रोन स्ट्राइक के मामले में उसके पास थी।कुछ आकलन तो कहते हैं कि 6 महीने में ईरान की ड्रोन क्षमता पूरी तरह वापस हो सकती है।इस वजह से अमेरिका, इज़राइल और खाड़ी देश चिंता में हैं, क्योंकि ड्रोन ही वो हथियार हैं जिनकी वजह से ईरान कई जगहों पर मजबूत स्थिति में रहता है चाहे वो यमन का मामला हो, या इज़राइल के साथ तनाव।
दबाव, प्रतिबंध और धमकियों के बावजूद ईरान ने जो दावा किया है, वह सिर्फ उसकी सैन्य क्षमता का सवाल नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता का मामला है।अमेरिकी रिपोर्ट ने कई देशों की नींद उड़ा दी है, और अब नज़रें इस बात पर हैं कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय अगले कदम के तौर पर क्या करता है।ड्रोन टेक्नोलॉजी की इस रेस में कौन आगे निकलेगा ये तो बाद की बात है,पर इतना साफ है कि मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर नई ऊंचाई पर पहुँच गया है।
