अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की उम्मीद लगाई जा रही थी, लेकिन हालात बिल्कुल उलटे हो गए। अमेरिका चाहता था कि ईरान बातचीत में शामिल हो, मगर ईरान ने स्पष्ट कर दिया कि वह किसी भी वार्ता में हिस्सा नहीं लेगा। इसके बाद डोनाल्ड ट्रंप ने बिना ईरान की सहमति के एकतरफा तरीके से संघर्ष-विराम बढ़ाने की घोषणा कर दी। लेकिन इस घोषणा से शांति नहीं आई बल्कि कुछ ही घंटों में समुद्र में नई झड़प ने तनाव को और बढ़ा दिया।


अमेरिका का कहना है कि उसने ईरान को बातचीत के लिए कई संकेत भेजे थे, लेकिन ईरान राज़ी नहीं हुआ। ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान वार्ता नहीं करना चाहता, तब भी हम संघर्ष रोकने की कोशिश जारी रखेंगे।

हालांकि, इस बयान के कुछ घंटे बाद ही होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी सुरक्षा नौकाओं ने दो विदेशी जहाज़ों पर गोलियां चलाईं। ब्रिटिश समुद्री निगरानी एजेंसी के अनुसार, एक जहाज़ को नुकसान पहुँचा, जबकि दूसरा किसी तरह बच निकला।


यह वही समुद्री मार्ग है जहाँ से दुनिया का लगभग पाँचवाँ हिस्सा तेल गुजरता है इसलिए यहां की हलचल पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन जाती है।ईरान का कहना है कि जहाज़ नियमों का पालन नहीं कर रहे थे और उसकी कार्रवाई समुद्री सुरक्षा के भीतर थी। ईरान आरोप लगाता है कि अमेरिका उसकी समुद्री गतिविधियों में दखल दे रहा है। इससे पहले अमेरिका एक ईरानी तेल टैंकर को अपने कब्ज़े में ले चुका है, जिसे तेहरान उकसाने वाली कार्रवाई बताता रहा है।


होर्मुज जैसे संवेदनशील क्षेत्र में अमेरिका और ईरान की टकराव की घटनाएं नई नहीं हैं, लेकिन इस बार हालात इसलिए गंभीर हैं क्योंकि

एक ओर अमेरिका संघर्ष-विराम बढ़ाने की बात कर रहा है दूसरी ओर समुद्र में गोलाबारी जारी है विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान बातचीत से दूर रहेगा तो यह अकेले घोषित संघर्ष-विराम असरदार नहीं होगा। साथ ही, समुद्री क्षेत्र में किसी भी बड़ी घटना के बाद हालात नियंत्रण से बाहर जा सकते हैं।


संघर्ष-विराम बढ़ाया गया है, लेकिन संघर्ष खत्म नहीं हुआ। बातचीत रुकी रही है और दोनों देश एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। आने वाले दिनों में तनाव कम होगा या बढ़ेगा यह पूरी तरह ईरान के रुख पर निर्भर करेगा।