आरा/बक्सर: भोजपुर-बक्सर स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन क्षेत्र का उपचुनाव अब एक हाई-प्रोफाइल मुकाबले में तब्दील हो चुका है। एनडीए और आरजेडी द्वारा अपने-अपने प्रत्याशियों के एलान के बाद चुनावी बिसात बिछ चुकी है, लेकिन जदयू प्रदेश महासचिव मनोज कुमार की सक्रियता ने इस जंग को दिलचस्प मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है। जहाँ एक ओर मुख्य दल अपनी सांगठनिक ताकत के भरोसे हैं, वहीं मनोज कुमार की व्यक्तिगत पैठ ने राजनीतिक पंडितों को नए समीकरणों पर विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है।
एनडीए ने संदेश विधायक राधाचरण साह के पुत्र कन्हैया प्रसाद पर दांव लगाया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रविवार को कन्हैया के नाम पर मुहर लगाकर यह साफ कर दिया कि पार्टी इस सीट को अपनी साख का सवाल मान रही है। वहीं, आरजेडी ने पूर्व एमएलसी लालदास राय के पुत्र सोनू कुमार राय को मैदान में उतारा है। ये दोनों ही प्रत्याशी मुख्य रूप से अपने पिताओं के राजनैतिक रसूख और गठबंधन के परंपरागत वोट बैंक के सहारे मैदान में उतरे हैं।
इन दो स्थापित खेमों के बीच जदयू के प्रदेश महासचिव मनोज कुमार एक मजबूत चुनौती पेश कर रहे हैं। छात्र राजनीति से शुरुआत करने वाले मनोज कुमार के पास करीब 35 वर्षों का लंबा राजनैतिक और सामाजिक अनुभव है। उनकी पत्नी पीरो की प्रमुख हैं, जिसके कारण स्थानीय निकायों और पंचायत प्रतिनिधियों के बीच उनकी पकड़ काफी गहरी मानी जाती है। क्षेत्र के 25 प्रखंडों में उनके द्वारा चलाए जा रहे जनसंपर्क अभियान और वार्ड सदस्यों, मुखियाओं एवं जिला पार्षदों से उनके व्यक्तिगत संबंधों ने विपक्षी खेमों की चिंता बढ़ा दी है।
राजनैतिक जानकारों का मानना है कि जहाँ कन्हैया प्रसाद और सोनू राय अपने-अपने गठबंधनों के आधार पर जीत का दावा कर रहे हैं, वहीं मनोज कुमार का व्यक्तिगत प्रभाव और स्थानीय पकड़ किसी भी दल का चुनावी गणित बिगाड़ सकती है। यह मुकाबला अब केवल पार्टी सिंबल तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह पारिवारिक विरासत बनाम व्यक्तिगत संघर्ष के बीच की लड़ाई बनता दिख रहा है। 12 मई को होने वाला मतदान और 14 मई के नतीजे यह साफ कर देंगे कि शाहाबाद के पंचायत प्रतिनिधि किसे अपना अगला एमएलसी चुनते हैं।
