ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के दौर में अब साइबर युद्ध का नया मोर्चा भी खुलता दिखाई दे रहा है। इसी बीच ईरान समर्थित बताए जा रहे हैकर समूह ‘हंडाला’ ने एक सनसनीखेज दावा कर अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। समूह का कहना है कि उसने अमेरिकी जांच एजेंसी संघीय जांच ब्यूरो (एफबीआई) के निगरानी ड्रोन सिस्टम तक पहुंच बना ली है और उसके पास महीनों से संवेदनशील डेटा मौजूद है। इतना ही नहीं, समूह ने अमेरिका में चल रहे फीफा क्लब विश्व कप से जुड़े आयोजनों को निशाना बनाने की धमकी भी दी है। हालांकि साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों और निगरानी संस्थाओं ने इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की है, लेकिन इस घटनाक्रम ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि आधुनिक दौर में खेल आयोजन, सुरक्षा एजेंसियां और साइबर नेटवर्क किस तरह नए खतरों के दायरे में आ चुके हैं।

एफबीआई ड्रोन हैकिंग के दावे से मचा हड़कंप

जिहादी और चरमपंथी गतिविधियों पर नजर रखने वाली संस्था साइट इंटेलिजेंस ग्रुप के अनुसार, ‘हंडाला’ ने दावा किया है कि वह एफबीआई द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले फर्स्ट पर्सन व्यू (एफपीवी) ड्रोन की तस्वीरों और निगरानी डेटा तक लंबे समय से पहुंच बनाए हुए था। हैकर समूह का कहना है कि इन ड्रोन में चेहरा पहचानने की तकनीक और वाहन नंबर प्लेट स्कैन करने जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं लगी हुई थीं, जिनका उपयोग आतंकवाद-रोधी अभियानों में किया जाता है। यदि यह दावा सही साबित होता है तो यह अमेरिकी सुरक्षा तंत्र के लिए एक गंभीर झटका माना जाएगा। हालांकि एफबीआई या अमेरिकी सरकार की ओर से अब तक इस कथित हैकिंग की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे दावों का मकसद कई बार तकनीकी नुकसान पहुंचाने से अधिक मनोवैज्ञानिक दबाव बनाना भी होता है।

फीफा क्लब विश्व कप को धमकी, सुरक्षा एजेंसियां सतर्क

हंडाला के बयान का सबसे चिंताजनक हिस्सा फीफा क्लब विश्व कप को लेकर दी गई चेतावनी है। समूह ने संकेत दिया कि उसे टूर्नामेंट की सुरक्षा व्यवस्था के बारे में जानकारी है और उसने आयोजकों को “सुरक्षा मजबूत करने” की सलाह देते हुए अप्रत्यक्ष धमकी दी। अमेरिका इस समय फीफा क्लब विश्व कप की मेजबानी कर रहा है और अगले वर्ष होने वाले फीफा विश्व कप 2026 की तैयारियों का भी यह महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है। ऐसे में किसी भी प्रकार की साइबर या सुरक्षा चुनौती को बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है। अमेरिकी एजेंसियां पहले ही स्टेडियमों और प्रशंसक क्षेत्रों के आसपास ड्रोन निगरानी बढ़ा चुकी हैं तथा अनधिकृत ड्रोन उड़ाने पर प्रतिबंध लगाया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े खेल आयोजनों को साइबर हमलों के लिए प्रतीकात्मक लक्ष्य माना जाता है क्योंकि इनसे वैश्विक स्तर पर ध्यान आकर्षित होता है।

दावों पर उठे सवाल, वीडियो को बताया गया भ्रामक

हालांकि हंडाला ने अपने दावों के समर्थन में कुछ तस्वीरें और वीडियो भी जारी किए हैं, लेकिन साइट इंटेलिजेंस ग्रुप ने उनमें से कई सामग्रियों को संदिग्ध और भ्रामक बताया है। संस्था के अनुसार, कथित “हैक किए गए ड्रोन फुटेज” में शामिल एक वीडियो वास्तव में दिसंबर 2024 में एक अमेरिकी सॉफ्टवेयर कंपनी द्वारा तैयार किया गया प्रचार वीडियो था, जिसका उपयोग प्राकृतिक आपदा के बाद सर्वेक्षण तकनीक दिखाने के लिए किया गया था। इससे यह संकेत मिलता है कि हैकर समूह अपने दावों को विश्वसनीय बनाने के लिए सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सामग्री का इस्तेमाल कर सकता है। फिर भी सुरक्षा एजेंसियां ऐसे दावों को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं कर रहीं क्योंकि साइबर युद्ध में भ्रामक सूचना अभियान और वास्तविक हमले अक्सर एक-दूसरे के साथ चलते हैं।

साइबर जंग का नया दौर और बढ़ती वैश्विक चिंता

हंडाला का नाम पहले भी कई चर्चित साइबर घटनाओं में सामने आ चुका है। मार्च में इस समूह ने एफबीआई निदेशक काश पटेल के ईमेल खाते में सेंध लगाने और निजी डेटा सार्वजनिक करने का दावा किया था। इसी पृष्ठभूमि में अमेरिकी विदेश विभाग ने समूह के सदस्यों की पहचान से जुड़ी जानकारी देने वालों के लिए एक करोड़ डॉलर (10 मिलियन डॉलर) तक के इनाम की घोषणा की है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच जारी भू-राजनीतिक तनाव अब केवल सैन्य मोर्चों तक सीमित नहीं है, बल्कि साइबर स्पेस भी संघर्ष का महत्वपूर्ण मैदान बन चुका है। ऐसे में फीफा जैसे वैश्विक आयोजनों, सरकारी एजेंसियों और महत्वपूर्ण डिजिटल नेटवर्कों की सुरक्षा आने वाले समय में और भी बड़ी चुनौती बनने वाली है।