हीटस्ट्रोक या डिहाइड्रेशन? उलझन खत्म करें, इन 6 लक्षणों से तुरंत पहचानें और सुरक्षित रहें

देशभर में गर्मी का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। तेज धूप और लू के कारण लोगों की सेहत पर गंभीर असर पड़ रहा है। ऐसे मौसम में सबसे ज्यादा खतरा हीटस्ट्रोक और डिहाइड्रेशन का होता है। कई बार लोग इन दोनों स्थितियों को लेकर भ्रमित हो जाते हैं, जबकि दोनों की पहचान और इलाज अलग-अलग होता है। सही समय पर पहचान न होने पर स्थिति गंभीर भी हो सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, हीटस्ट्रोक तब होता है जब शरीर का तापमान अचानक बहुत ज्यादा बढ़ जाता है और शरीर उसे नियंत्रित नहीं कर पाता। वहीं डिहाइड्रेशन शरीर में पानी की कमी के कारण होता है। आइए जानते हैं 6 ऐसे लक्षण, जिनसे आप तुरंत पहचान सकते हैं कि आपको हीटस्ट्रोक हुआ है या डिहाइड्रेशन।

सबसे पहला लक्षण है शरीर का तापमान। हीटस्ट्रोक में शरीर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे ज्यादा हो सकता है, जबकि डिहाइड्रेशन में ऐसा जरूरी नहीं होता। दूसरा लक्षण है पसीना आना। हीटस्ट्रोक में कई बार पसीना आना बंद हो जाता है और त्वचा सूखी हो जाती है, जबकि डिहाइड्रेशन में शरीर पसीने के जरिए पानी की कमी को दर्शाता है।

तीसरा महत्वपूर्ण संकेत है चक्कर आना और बेहोशी। हीटस्ट्रोक में व्यक्ति अचानक बेहोश हो सकता है, जबकि डिहाइड्रेशन में कमजोरी और चक्कर अधिक महसूस होते हैं। चौथा लक्षण है दिल की धड़कन। हीटस्ट्रोक में धड़कन बहुत तेज हो सकती है, जबकि डिहाइड्रेशन में भी धड़कन बढ़ती है लेकिन उतनी तीव्र नहीं होती।

पांचवां लक्षण है मानसिक स्थिति में बदलाव। हीटस्ट्रोक में व्यक्ति भ्रमित, चिड़चिड़ा या असामान्य व्यवहार कर सकता है, जबकि डिहाइड्रेशन में यह लक्षण कम देखने को मिलते हैं। छठा और आखिरी लक्षण है प्यास लगना। डिहाइड्रेशन में तेज प्यास लगती है, जबकि हीटस्ट्रोक में कई बार व्यक्ति को प्यास का एहसास भी नहीं होता।

डॉक्टरों का कहना है कि अगर किसी को हीटस्ट्रोक के लक्षण दिखें तो तुरंत उसे ठंडी जगह पर ले जाएं, शरीर को ठंडा करें और तुरंत मेडिकल सहायता लें। वहीं डिहाइड्रेशन की स्थिति में ज्यादा से ज्यादा पानी, ओआरएस या तरल पदार्थ देना जरूरी है।

गर्मी के इस मौसम में बचाव ही सबसे बड़ा उपाय है। दिन के समय बाहर निकलने से बचें, हल्के और ढीले कपड़े पहनें, ज्यादा पानी पिएं और धूप में निकलते समय सिर को ढककर रखें।